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कोएड कॉलेजों में चलेगा लड़कियों का सिक्का
Updated Thu, 24 Aug 2017 02:52 AM IST
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नए सत्र के दाखिले में कई कोर्स में लड़कों से आगे, कैंपस की बदल रही तस्वीर
बीएससी बायो, बीकॉम, बीएससी मैथ में कई जगह आगे, मास्टर डिग्री में भी जलवा
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
सीसीएसयू के नए सत्र 2017-18 में कोएड कॉलेजों में लड़कियों का सिक्का चलेगा। कई कॉलेजों में लड़कियों ने लड़कों को पीछे छोड़ दिया है। मेरिट के दम पर वह संख्या में आगे हैं। कुछ जगह पर तो लड़कियों की संख्या 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है। कोएड में बढ़ती संख्या का असर कैंपस के माहौल पर भी पड़ेगा। विवि के दाखिले अंतिम दौर में हैं, लेकिन लड़कियां हाई मेरिट के दम पर पहले ही अपनी जगह बना चुकी हैं।
शहर के कोएड कॉलेजों का हाल
शहर में तीन कोएड कॉलेज हैं। इनमें मेरठ कॉलेज, डीएन कॉलेज और एनएएस कॉलेज शामिल हैं। डीएन कॉलेज में बीकॉम में अब तक हुए दाखिले में करीब 60 प्रतिशत दाखिले लड़कियों के हुए हैं। बीएससी बायो और बीएससी मैथ में स्थिति 50 प्रतिशत से ऊपर है। इस कोएड कॉलेज में लड़कों से ज्यादा लड़कियों के दाखिले हुए हैं। एनएएस डिग्री कॉलेज में बीए को छोड़कर बाकी कोर्स में लड़कियों की संख्या अधिक है। बीकॉम में 64 दाखिले लड़कों के और 87 लड़कियों के हुए हैं। बीएससी बायो में नौ लड़के, 17 लड़कियां, बीएससी मैथ 52 लड़के और 58 लड़कियों के दाखिले हुए हैं। मेरठ कॉलेज में बीएससी बायो में 50 प्रतिशत से अधिक लड़कियों के दाखिले हैं। बीकॉम और बीएससी मैथ में भी अच्छी स्थिति है।
मास्टर डिग्री में भी बेहतर
दाखिले में लड़कियां सिर्फ अंडर ग्रेजुएट कोर्स में ही नहीं बल्कि मास्टर डिग्री में भी आगे हैं। एमएससी फिजिक्स, केमेस्ट्री, जूलॉजी और बॉटनी में लड़कों से ज्यादा लड़कियों के दाखिले हुए हैं। एनएएस कॉलेज में एमएससी केमेस्ट्री में आठ, फिजिक्स में सात, मैथ में 28 लड़कियों के दाखिले हुए हैं। लड़कों कम हैं। एमए अंग्रेजी में लड़कियों के 20 और लड़कों के पांच दाखिले हुए हैं। जूलॉजी और बॉटनी में तो एक्का-दुक्का लड़कों को ही दाखिले मिलते हैं।
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17 गर्ल्स कॉलेज, लड़कों का एक भी नहीं
मेरठ और सहारनपुर मंडल में लड़कियों के लिए 17 गवर्नमेंट और एडेड कॉलेज हैं। वहीं, सिर्फ लड़कों के लिए एक भी कॉलेज नहीं है। कोएड में पहले छात्राओं की संख्या कम रहती थी। जागरूकता बढ़ने और मेरिट के दम पर अब संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। विश्वविद्यालय कैंपस की तस्वीर भी जुदा नहीं है। वहां भी कई विभागों में लड़कियों का बोलबाला है।
छात्र संघ चुनाव पर पड़ेगा असर
दाखिले बंद होते ही छात्र संघ चुनाव की सरगर्मी शुरू होगी। कोएड कॉलेजों में लड़कियों की बढ़ती संख्या के कारण छात्र संगठनों में महिला कार्यकर्ताओं की मांग बढ़ गई है। छात्र नेता नए सत्र के चुनाव की तैयारी के लिहाज से इन दिनों कॉलेजों में सक्रिय हैं। दाखिले में मदद करने और जान पहचान बनाने का काम जारी है। कोएड कॉलेजों में अभी तक छात्रसंघ अध्यक्ष लड़की नहीं बनी। बढ़ती संख्या के बीच छात्र संघ अध्यक्ष पद पर लड़की प्रत्याशी उतारने पर भी विचार कर रहे हैं।
वर्जन...
सीसीएसयू प्रवेश प्रक्रिया समन्वयक प्रोफेसर वाई विमला का कहना है साल दर साल कोएड कॉलेजों में लड़कियों की संख्या बढ़ती जा रही है। मेरिट के दम पर वे दाखिला पा रही हैं। इससे कोएड कॉलेजों के माहौल पर फर्क पड़ेगा। ट्रेडिशनल कोर्स में लड़कियां आगे हैं।
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बीएससी बायो, बीकॉम, बीएससी मैथ में कई जगह आगे, मास्टर डिग्री में भी जलवा
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
सीसीएसयू के नए सत्र 2017-18 में कोएड कॉलेजों में लड़कियों का सिक्का चलेगा। कई कॉलेजों में लड़कियों ने लड़कों को पीछे छोड़ दिया है। मेरिट के दम पर वह संख्या में आगे हैं। कुछ जगह पर तो लड़कियों की संख्या 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है। कोएड में बढ़ती संख्या का असर कैंपस के माहौल पर भी पड़ेगा। विवि के दाखिले अंतिम दौर में हैं, लेकिन लड़कियां हाई मेरिट के दम पर पहले ही अपनी जगह बना चुकी हैं।
शहर के कोएड कॉलेजों का हाल
शहर में तीन कोएड कॉलेज हैं। इनमें मेरठ कॉलेज, डीएन कॉलेज और एनएएस कॉलेज शामिल हैं। डीएन कॉलेज में बीकॉम में अब तक हुए दाखिले में करीब 60 प्रतिशत दाखिले लड़कियों के हुए हैं। बीएससी बायो और बीएससी मैथ में स्थिति 50 प्रतिशत से ऊपर है। इस कोएड कॉलेज में लड़कों से ज्यादा लड़कियों के दाखिले हुए हैं। एनएएस डिग्री कॉलेज में बीए को छोड़कर बाकी कोर्स में लड़कियों की संख्या अधिक है। बीकॉम में 64 दाखिले लड़कों के और 87 लड़कियों के हुए हैं। बीएससी बायो में नौ लड़के, 17 लड़कियां, बीएससी मैथ 52 लड़के और 58 लड़कियों के दाखिले हुए हैं। मेरठ कॉलेज में बीएससी बायो में 50 प्रतिशत से अधिक लड़कियों के दाखिले हैं। बीकॉम और बीएससी मैथ में भी अच्छी स्थिति है।
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मास्टर डिग्री में भी बेहतर
दाखिले में लड़कियां सिर्फ अंडर ग्रेजुएट कोर्स में ही नहीं बल्कि मास्टर डिग्री में भी आगे हैं। एमएससी फिजिक्स, केमेस्ट्री, जूलॉजी और बॉटनी में लड़कों से ज्यादा लड़कियों के दाखिले हुए हैं। एनएएस कॉलेज में एमएससी केमेस्ट्री में आठ, फिजिक्स में सात, मैथ में 28 लड़कियों के दाखिले हुए हैं। लड़कों कम हैं। एमए अंग्रेजी में लड़कियों के 20 और लड़कों के पांच दाखिले हुए हैं। जूलॉजी और बॉटनी में तो एक्का-दुक्का लड़कों को ही दाखिले मिलते हैं।
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17 गर्ल्स कॉलेज, लड़कों का एक भी नहीं
मेरठ और सहारनपुर मंडल में लड़कियों के लिए 17 गवर्नमेंट और एडेड कॉलेज हैं। वहीं, सिर्फ लड़कों के लिए एक भी कॉलेज नहीं है। कोएड में पहले छात्राओं की संख्या कम रहती थी। जागरूकता बढ़ने और मेरिट के दम पर अब संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। विश्वविद्यालय कैंपस की तस्वीर भी जुदा नहीं है। वहां भी कई विभागों में लड़कियों का बोलबाला है।
छात्र संघ चुनाव पर पड़ेगा असर
दाखिले बंद होते ही छात्र संघ चुनाव की सरगर्मी शुरू होगी। कोएड कॉलेजों में लड़कियों की बढ़ती संख्या के कारण छात्र संगठनों में महिला कार्यकर्ताओं की मांग बढ़ गई है। छात्र नेता नए सत्र के चुनाव की तैयारी के लिहाज से इन दिनों कॉलेजों में सक्रिय हैं। दाखिले में मदद करने और जान पहचान बनाने का काम जारी है। कोएड कॉलेजों में अभी तक छात्रसंघ अध्यक्ष लड़की नहीं बनी। बढ़ती संख्या के बीच छात्र संघ अध्यक्ष पद पर लड़की प्रत्याशी उतारने पर भी विचार कर रहे हैं।
वर्जन...
सीसीएसयू प्रवेश प्रक्रिया समन्वयक प्रोफेसर वाई विमला का कहना है साल दर साल कोएड कॉलेजों में लड़कियों की संख्या बढ़ती जा रही है। मेरिट के दम पर वे दाखिला पा रही हैं। इससे कोएड कॉलेजों के माहौल पर फर्क पड़ेगा। ट्रेडिशनल कोर्स में लड़कियां आगे हैं।