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सावधान! यहां दूध-घी से लेकर आइसक्रीम में भी मिलावट
Updated Fri, 11 Aug 2017 03:03 AM IST
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मेरठ। दैनिक प्रयोग में आने वाली वस्तुओं में शुद्धता की कोई गारंटी नहीं रह गई है। एफडीए ने बृहस्पतिवार को जुलाई के आंकड़े जारी किए, जिसमें 29 नमूने फेल पाते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई है। 6.74 लाख रुपये जुर्माना वसूला गया है।
इनमें मिठाई के तीन, बोतल बंद पानी का एक, दूध के सात, बटर, घी और आइसक्रीम के नौ, वनस्पति घी का एक, सुपारी, पान मसाला के एक-एक, गुटखा के दो और चार अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने फेल हुए हैं। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी सर्वेश मिश्रा ने बताया कि इनमें दो केस क्रिमिनल और 27 सिविल के केस हैं। पिछले 15 दिनों में 40 से ज्यादा खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए हैं, इनकी रिपोर्ट आनी बाकी है। जो सैंपल फेल होंगे, उन मामलों में कार्रवाई अगस्त के आखिरी सप्ताह या सितंबर माह में हो पाएगी।
मेडिकल में नहीं मिल रहा सही इलाज
मेरठ। बृहस्पतिवार को मेडिकल में भर्ती सतीश नामक मरीज के परिजनों ने अस्पताल में सही इलाज न मिलने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि एक्सीडेंट में चोट लगने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उसे अस्पताल से घर भेज दिया गया था। दो दिन पहले फिर भर्ती तो कर लिया गया। लेकिन उसका सही से इलाज नहीं किया जा रहा है।
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खास बात
- एफडीए की छापामारी में भरे गए 29 नमूने फेल पाए गए, एफआईआर दर्ज
- 40 से ज्यादा खाद्य पदार्थों की सैंपल रिपोर्ट अभी आना बाकी
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इनमें मिठाई के तीन, बोतल बंद पानी का एक, दूध के सात, बटर, घी और आइसक्रीम के नौ, वनस्पति घी का एक, सुपारी, पान मसाला के एक-एक, गुटखा के दो और चार अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने फेल हुए हैं। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी सर्वेश मिश्रा ने बताया कि इनमें दो केस क्रिमिनल और 27 सिविल के केस हैं। पिछले 15 दिनों में 40 से ज्यादा खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए हैं, इनकी रिपोर्ट आनी बाकी है। जो सैंपल फेल होंगे, उन मामलों में कार्रवाई अगस्त के आखिरी सप्ताह या सितंबर माह में हो पाएगी।
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मेडिकल में नहीं मिल रहा सही इलाज
मेरठ। बृहस्पतिवार को मेडिकल में भर्ती सतीश नामक मरीज के परिजनों ने अस्पताल में सही इलाज न मिलने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि एक्सीडेंट में चोट लगने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उसे अस्पताल से घर भेज दिया गया था। दो दिन पहले फिर भर्ती तो कर लिया गया। लेकिन उसका सही से इलाज नहीं किया जा रहा है।
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खास बात
- एफडीए की छापामारी में भरे गए 29 नमूने फेल पाए गए, एफआईआर दर्ज
- 40 से ज्यादा खाद्य पदार्थों की सैंपल रिपोर्ट अभी आना बाकी