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आमदनी 35 पैसे खर्चा रुपया, कैसे स्मार्ट सिटी बनेगी भैया

Mon, 25 Sep 2017 09:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Mon, 25 Sep 2017 09:38 AM IST
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35 paisa cost money, how smart city will become brother
नगर निगम की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

35 पैसे की आमदनी के बावजूद एक रुपये खर्च करने वाला नगर निगम प्रशासन स्मार्ट सिटी के सपने देख रहा है। कम राजस्व वसूली को लेकर स्मार्ट सिटी की परीक्षा में तीन बार धड़ाम होने के बावजूद निगम सुधार की भूमिका में नजर नहीं आ रहा है। स्मार्ट सिटी की अंतिम परीक्षा में बैठने में करीब एक माह का समय बचा है। निगम ने इस बार भी राजस्व बढ़ाने के प्रति कोई गंभीरता नहीं दिखाई तो उसे फिर से बड़ा झटका लग सकता है। 

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किसी भी शहर को स्मार्ट सिटी में शामिल होने के लिए अपनी आमदनी और खर्च का ब्यौरा भी देना होगा। क्योंकि शहर को स्मार्ट बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाले धन में नगर निगम खजाने से भी कुछ अंश लगाया जाना है। यही नहीं, भविष्य में स्मार्ट सिटी को संजोकर रखने के लिए भी नगर निगम के खजाने की स्थिति अच्छी होनी चाहिए। 
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यहां आमदनी कम, खर्चा बहुत ज्यादा
अगर नगर निगम की आय पर गौर करें तो विभिन्न स्रोतों से करीब 50 करोड़ रुपये ही वार्षिक आय है, जबकि नगर निगम का वार्षिक खर्च बजट 140 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि नगर निगम राजस्व बढ़ाने में कितने कदम चल पाया है। 
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दूसरों के भरोसे बजट
यह भी बड़ा सवाल है कि आमदनी से ज्यादा खर्चा होने पर काम कैसे चल रहा है। निगम सूत्रों के अनुसार उसे अवस्थापना निधि और तेरहवें वित्त आयोग से हर साल बजट का बड़ा हिस्सा मिल जाता है, जिससे काम चल जाता है। लेकिन निगम अपने दम पर इस बजट को खर्च करने की स्थिति में नहीं है। जबकि उसके सामने आमदनी के काफी जरिये हैं। लेकिन हर साल यह बजट दूसरों के भरोसे रहता है।

राजस्व बढ़ाने के स्रोत नजर अंदाज  
निगम ने राजस्व बढ़ाने के कई पहलुओं पर काम करना ही बंद कर दिया है। जिनमें मवेशी ठेका, वाहन पार्किंग,  अवैध होर्डिंग की छूट, केनोपी आदि के ठेके हैं। जिनमें निगम प्रशासन वसूली ही नहीं कर पा रहा है। इनके ठेके ही नहीं छोड़े गए हैं। इतना ही नहीं शहर में शत प्रतिशत भवन टैक्स लगाने पर भी निगम को लाखों रुपये राजस्व की बढ़त मिल सकती है। साथ ही अवैध होर्डिंग कारोबार पर प्रतिबंध लगाकर निगम के खजाने को भरा जा सकता है। इन सभी पहलुओं पर निगम प्रशासन ठोस कदम नहीं उठा रहा है।  

इसी सप्ताह प्रपोजल पर होगा काम 
स्मार्ट सिटी प्रपोजल 31 अक्तूबर को राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार को जाना है। उससे पहले नगर निगम प्रशासन और कंसलटेंट को संयुक्त रूप से प्रपोजल पर काम करना होगा। बता दें कि पूर्व में समीक्षा बैठकों में आय से ज्यादा खर्च होने के बिंदु पर ही निगम के अंक काटे जा चुके हैं। अब निगम अधिकारियों का कहना है कि सभी विभागों से आंकड़े जुटाए गए हैं, जिनको प्रपोजल में शामिल किया जाना है। 


सफाई और सीवर भी है बड़ा मुद्दा 
स्मार्ट शहरों की सूची में शामिल होने के लिए निगम प्रशासन को स्वच्छता पर सबसे अधिक काम करना होगा। प्रपोजल में इस बिंदु को भी प्राथमिकता पर लिया गया है। अगर महानगर में धरातल पर सफाई की स्थिति पर गौर करें तो कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है। शहर की सड़कों की सफाई हो या फिर सीवर, पूरी व्यवस्था चौपट है। शहर में शौचालय बनवाने में भी निगम प्रशासन कामयाब नहीं हो रहा है।

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