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नगर निगम खजाने में धनराशि 32 करोड़ और पार्षदों ने प्रस्ताव सौंप दिए 250 करोड़ के
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नगर निगम खजाने में धनराशि 32 करोड़ और पार्षदों ने प्रस्ताव सौंप दिए 250 करोड़ के
मेरठ। नगर निगम को सरकार से 14वें वित्त आयोग में 32 करोड़ रुपये मिले हैं। जिनको 31 मार्च से पहले खर्च करना होगा। इस धनराशि की एवज में निगम प्रशासन ने पार्षदों से अपने-अपने वार्ड में होने वाले विकास कार्यों के प्रस्ताव मांगे, जो 250 करोड़ से अधिक के हैं। पार्षदों के प्रस्तावों को देखकर निगम प्रशासन के पसीने छूट गए हैं। देखना यह है कि 32 करोड़ रुपये से किस-किस पार्षद को खुश किया जाएगा। हालांकि, नगर आयुक्त ने साफ कर दिया है कि इस धनराशि को उन सभी इलाकों में लगाया जाएगा जो जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं। यह निर्णय शुक्रवार को नगर आयुक्त ने निगम सभागार में निर्माण विभाग के इंजीनियरों के साथ बैठक में लिया।
नगर आयुक्त डा. अरविंद कुमार चौरसिया ने छह माह पहले 14वें वित्त आयोग के लगभग 72 करोड़ के प्रस्तावों पर कार्यों की प्रगति रिपोर्ट ली। जिसमें पाया कि काफी कार्य ऐसे हैं, जिनकी टेंडर प्रक्रिया और कार्य आदेश हो चुके हैं, लेकिन धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ। कुछ कार्यों की टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। कुछ प्रस्तावों पर कोई काम ही नहीं किया गया। जबकि नियमानुसार 31 मार्च तक 14वें वित्त आयोग के खजाने को खर्च किया जाना अनिवार्य है। समय करीब आते ही निगम प्रशासन सरकारी खजाने को आनन-फानन में खर्च करने की रणनीति तैयार कर रहा है।
नगर आयुक्त डा. अरविंद कुमार चौरसिया के मुताबिक, पार्षदों ने 250 करोड़ के प्रस्ताव दिए हैं। निगम के पास 32 करोड़ हैं। धन के अनुरूप ही काम कराया जाएगा। जलभराव वाले स्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। जिन पुराने प्रस्ताव पर काम शुरू नहीं हुआ, उन पर भी ठोस निर्णय लिया जा रहा है।
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मेरठ। नगर निगम को सरकार से 14वें वित्त आयोग में 32 करोड़ रुपये मिले हैं। जिनको 31 मार्च से पहले खर्च करना होगा। इस धनराशि की एवज में निगम प्रशासन ने पार्षदों से अपने-अपने वार्ड में होने वाले विकास कार्यों के प्रस्ताव मांगे, जो 250 करोड़ से अधिक के हैं। पार्षदों के प्रस्तावों को देखकर निगम प्रशासन के पसीने छूट गए हैं। देखना यह है कि 32 करोड़ रुपये से किस-किस पार्षद को खुश किया जाएगा। हालांकि, नगर आयुक्त ने साफ कर दिया है कि इस धनराशि को उन सभी इलाकों में लगाया जाएगा जो जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं। यह निर्णय शुक्रवार को नगर आयुक्त ने निगम सभागार में निर्माण विभाग के इंजीनियरों के साथ बैठक में लिया।
नगर आयुक्त डा. अरविंद कुमार चौरसिया ने छह माह पहले 14वें वित्त आयोग के लगभग 72 करोड़ के प्रस्तावों पर कार्यों की प्रगति रिपोर्ट ली। जिसमें पाया कि काफी कार्य ऐसे हैं, जिनकी टेंडर प्रक्रिया और कार्य आदेश हो चुके हैं, लेकिन धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ। कुछ कार्यों की टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। कुछ प्रस्तावों पर कोई काम ही नहीं किया गया। जबकि नियमानुसार 31 मार्च तक 14वें वित्त आयोग के खजाने को खर्च किया जाना अनिवार्य है। समय करीब आते ही निगम प्रशासन सरकारी खजाने को आनन-फानन में खर्च करने की रणनीति तैयार कर रहा है।
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नगर आयुक्त डा. अरविंद कुमार चौरसिया के मुताबिक, पार्षदों ने 250 करोड़ के प्रस्ताव दिए हैं। निगम के पास 32 करोड़ हैं। धन के अनुरूप ही काम कराया जाएगा। जलभराव वाले स्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। जिन पुराने प्रस्ताव पर काम शुरू नहीं हुआ, उन पर भी ठोस निर्णय लिया जा रहा है।
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