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खराब जीवन-शैली, तनाव से बढ़ रहा बच्चों में मोटापा
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खराब जीवन-शैली, तनाव से बढ़ रहा बच्चों में मोटापा
- जन्मजात हाइपोथाइराइड मानसिक मंदता का प्रमुख कारण
- मेडिकल कॉलेज में किया गया कार्यशाला का आयोजन
- विभिन्न जिलों से आए करीब 100 चिकित्सक हुए शामिल
फोटो...
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। मेडिकल कॉलेज परिसर में रविवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया। विषय था बच्चों में होने वाली बीमारियां और उनकी जांच कर उनका इलाज करना। इसमें विभिन्न जिलों से आए करीब 100 चिकित्सक शामिल हुए।
कार्यशाला में सीडीईआर कानपुर के निदेशक डॉ. अनुराग बाजपेयी ने बच्चों का विकास न होना, कद न बढ़ना आदि समस्याओें के बारे में बताया। डॉ. रिद्धी, डॉ. विजय जायसवाल ने भी बच्चों के शारीरिक विकास के बारे में चर्चा की। डॉ. चेतन, डॉ. अनुराग ने बताया कि आज की जीवन शैली खानपान, तनाव के कारण बच्चों में मोटापे की समस्या आम हो गई है। एएमयू अलीगढ़ की प्रोफेसर डॉ. आयशा और दिल्ली हिंदू राव अस्पताल के डॉ. रविंद्र ने बताया कि कंजेनिटल (जन्मजात) हाइपोथाइरॉइड मानसिक मंदता का एक प्रमुख कारण है। थायराइड एक तरह की ग्रंथि है, जो गले के बिल्कुल सामने की ओर होती है। यह ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है। इसकी समय रहते पहचान कर मानसिक मंदता को रोका जा सकता है। मेडिकल कॉलेज में बाल रोग प्रमुख डॉ. विजय जायसवाल ने बताया कि कॉलेज में इस बीमारी की जांच निशुल्क उपलब्ध है। थाइराइड बीमारी जन्म के अलावा बाद में भी हो सकती है, जिसे अक्वायर्ड हाइपोथारॉइड कहा जाता है। इसके प्रमुख लक्षण है- वजन बढ़ना, भूख न लगना, ठंड बर्दाश्त ना कर पाना, कब्ज रहना, ज्यादा सोना, काम करने की इच्छा न होना। इसका भी इलाज संभव है। अस्पष्ट जननांग वाले बच्चों की पहचान व इलाज के बारे में बताया गया। डॉ. रिद्धी व डॉ. अनुराग ने कैल्शियम की कमी व विटामिन डी की कमी के बारे में भी जानकारी दी। कार्यशाला का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलित कर प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज प्रोफेसर आरसी गुप्ता, डॉ. जेएस मलिक, आईएपी अध्यक्ष डॉ. अर्चना दूबे, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ, डॉ. मीरा जैन एवं वीके गर्ग द्वारा किया गया। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय जैन, डॉ. पीपीएस चौहान, डॉ. जेएस मलिक, डॉ. अमित जैन एवं डॉ. तरूण गोयल आदि मुरादाबाद, बिजनौर, मुजफ्फरनगर एवं अलीगढ़ के चिकित्सक शामिल हुए।
मेडिकल में डायबिटीज पीड़ित बच्चों का निशुल्क इलाज
डॉ. विकास मेहरोत्रा, किलकारी हॉस्पिटल, अलीगढ़ ने मधुमेह की बीमारी के विषय में बताया। यह रोग इन्सुलिन स्राव की कमी से जुड़ा है, इसलिये बच्चों में मधुमेह का इलाज इन्सुलिन इन्जेक्शन से होता है। नवजात शिशुओं में मधुमेह की जांच के लिये जेनेटिक टेस्टिंग कराई जाती है। मेडिकल के बाल रोग विभाग 18 साल तक के डायबिटीज से पीड़ित बच्चों का निशुल्क इलाज एवं इन्सुलिन का वितरण किया जा रहा है।
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- जन्मजात हाइपोथाइराइड मानसिक मंदता का प्रमुख कारण
- मेडिकल कॉलेज में किया गया कार्यशाला का आयोजन
- विभिन्न जिलों से आए करीब 100 चिकित्सक हुए शामिल
फोटो...
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। मेडिकल कॉलेज परिसर में रविवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया। विषय था बच्चों में होने वाली बीमारियां और उनकी जांच कर उनका इलाज करना। इसमें विभिन्न जिलों से आए करीब 100 चिकित्सक शामिल हुए।
कार्यशाला में सीडीईआर कानपुर के निदेशक डॉ. अनुराग बाजपेयी ने बच्चों का विकास न होना, कद न बढ़ना आदि समस्याओें के बारे में बताया। डॉ. रिद्धी, डॉ. विजय जायसवाल ने भी बच्चों के शारीरिक विकास के बारे में चर्चा की। डॉ. चेतन, डॉ. अनुराग ने बताया कि आज की जीवन शैली खानपान, तनाव के कारण बच्चों में मोटापे की समस्या आम हो गई है। एएमयू अलीगढ़ की प्रोफेसर डॉ. आयशा और दिल्ली हिंदू राव अस्पताल के डॉ. रविंद्र ने बताया कि कंजेनिटल (जन्मजात) हाइपोथाइरॉइड मानसिक मंदता का एक प्रमुख कारण है। थायराइड एक तरह की ग्रंथि है, जो गले के बिल्कुल सामने की ओर होती है। यह ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है। इसकी समय रहते पहचान कर मानसिक मंदता को रोका जा सकता है। मेडिकल कॉलेज में बाल रोग प्रमुख डॉ. विजय जायसवाल ने बताया कि कॉलेज में इस बीमारी की जांच निशुल्क उपलब्ध है। थाइराइड बीमारी जन्म के अलावा बाद में भी हो सकती है, जिसे अक्वायर्ड हाइपोथारॉइड कहा जाता है। इसके प्रमुख लक्षण है- वजन बढ़ना, भूख न लगना, ठंड बर्दाश्त ना कर पाना, कब्ज रहना, ज्यादा सोना, काम करने की इच्छा न होना। इसका भी इलाज संभव है। अस्पष्ट जननांग वाले बच्चों की पहचान व इलाज के बारे में बताया गया। डॉ. रिद्धी व डॉ. अनुराग ने कैल्शियम की कमी व विटामिन डी की कमी के बारे में भी जानकारी दी। कार्यशाला का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलित कर प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज प्रोफेसर आरसी गुप्ता, डॉ. जेएस मलिक, आईएपी अध्यक्ष डॉ. अर्चना दूबे, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ, डॉ. मीरा जैन एवं वीके गर्ग द्वारा किया गया। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय जैन, डॉ. पीपीएस चौहान, डॉ. जेएस मलिक, डॉ. अमित जैन एवं डॉ. तरूण गोयल आदि मुरादाबाद, बिजनौर, मुजफ्फरनगर एवं अलीगढ़ के चिकित्सक शामिल हुए।
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मेडिकल में डायबिटीज पीड़ित बच्चों का निशुल्क इलाज
डॉ. विकास मेहरोत्रा, किलकारी हॉस्पिटल, अलीगढ़ ने मधुमेह की बीमारी के विषय में बताया। यह रोग इन्सुलिन स्राव की कमी से जुड़ा है, इसलिये बच्चों में मधुमेह का इलाज इन्सुलिन इन्जेक्शन से होता है। नवजात शिशुओं में मधुमेह की जांच के लिये जेनेटिक टेस्टिंग कराई जाती है। मेडिकल के बाल रोग विभाग 18 साल तक के डायबिटीज से पीड़ित बच्चों का निशुल्क इलाज एवं इन्सुलिन का वितरण किया जा रहा है।
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