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निगम की बोर्ड बैठक आज, उठेंगे मुददे
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अवस्थापना, टीएफसी और बोर्ड फंड से निकाले गए टेंडर का मामला भी गूंजेगा
मेरठ। नगर निगम की पूर्व में स्थगित की गई बोर्ड बैठक बुधवार को होगी। सभी पार्षदों ने निगम अधिकारियों को घेरने की तैयारी कर ली है। शहर के विकास से जुड़ी अवस्थापना, टीएफसी और निगम बोर्ड फंड से निकाले जा रहे टेंडर पर अधिकारियों को घेरा जाना तय है। क्योंकि निगम बोर्ड फंड में फूटी कोड़ी नहीं है। फिर भी टेंडर निकाले जा रहे हैं। अवस्थापना निधि और टीएफसी के खजाने से होने वाले विकास कार्यों की टेंडर प्रक्रिया पर फाइनल होने से पहले ही भ्रष्टाचार के आरोप लग गए।
महापौर ने पिछले सप्ताह बोर्ड बैठक बुलाई थी। पार्षदों ने समय पर बैठक का एजेंडा न मिलने के कारण तैयारी न होने की बात कही थी। महापौर ने बोर्ड बैठक को स्थगित कर दिया था। उसके बाद बृहस्पतिवार को फिर से बोर्ड बैठक बुलाई गई। लेकिन नगरायुक्त सहित अधिकतर अधिकारी बोर्ड बैठक में नहीं पहुंचे थे, जिसके कारण महापौर ने फिर से बोर्ड बैठक को स्थगित कर दिया था। बुधवार को फिर से बैठक बुलाई गई है। जिसमें पूर्व में आयोजित की गयी कार्यकारिणी की बैठक में पास एजेंडे पर चर्चा होनी है। हालांकि बोर्ड बैठक हो या फिर कार्यकारिणी बैठक। दोनों को ही पार्षद अपने तरीके से ही चलाते हैं। शुरुआत में ही शहर के विकास पर चर्चा करने की बजाय वर्चस्व की जंग छिड़ जाती है।
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मेरठ। नगर निगम की पूर्व में स्थगित की गई बोर्ड बैठक बुधवार को होगी। सभी पार्षदों ने निगम अधिकारियों को घेरने की तैयारी कर ली है। शहर के विकास से जुड़ी अवस्थापना, टीएफसी और निगम बोर्ड फंड से निकाले जा रहे टेंडर पर अधिकारियों को घेरा जाना तय है। क्योंकि निगम बोर्ड फंड में फूटी कोड़ी नहीं है। फिर भी टेंडर निकाले जा रहे हैं। अवस्थापना निधि और टीएफसी के खजाने से होने वाले विकास कार्यों की टेंडर प्रक्रिया पर फाइनल होने से पहले ही भ्रष्टाचार के आरोप लग गए।
महापौर ने पिछले सप्ताह बोर्ड बैठक बुलाई थी। पार्षदों ने समय पर बैठक का एजेंडा न मिलने के कारण तैयारी न होने की बात कही थी। महापौर ने बोर्ड बैठक को स्थगित कर दिया था। उसके बाद बृहस्पतिवार को फिर से बोर्ड बैठक बुलाई गई। लेकिन नगरायुक्त सहित अधिकतर अधिकारी बोर्ड बैठक में नहीं पहुंचे थे, जिसके कारण महापौर ने फिर से बोर्ड बैठक को स्थगित कर दिया था। बुधवार को फिर से बैठक बुलाई गई है। जिसमें पूर्व में आयोजित की गयी कार्यकारिणी की बैठक में पास एजेंडे पर चर्चा होनी है। हालांकि बोर्ड बैठक हो या फिर कार्यकारिणी बैठक। दोनों को ही पार्षद अपने तरीके से ही चलाते हैं। शुरुआत में ही शहर के विकास पर चर्चा करने की बजाय वर्चस्व की जंग छिड़ जाती है।
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