फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   यूनिवर्सिटी में बंद मिले सीसीटीवी, खामियां ही खामियां

यूनिवर्सिटी में बंद मिले सीसीटीवी, खामियां ही खामियां

Tue, 20 Mar 2018 02:08 AM IST
Updated Tue, 20 Mar 2018 02:08 AM IST
विज्ञापन
यूनिवर्सिटी में बंद मिले सीसीटीवी, खामियां ही खामियां
उत्तर पुस्तिका कक्ष में नहीं मिला कैमरा, हस्ताक्षर गायब
विज्ञापन

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में एमबीबीएस की कॉपियां बदलने के खेल में सोमवार को एसटीएफ की टीम ने कैंपस पहुंचकर घंटों जांच पड़ताल की। टीम ने स्टोर रूम और उत्तर पुस्तिका कक्ष के दोनों भवनों में रखी गईं कॉपियों के बंडल चेक किए तो खामियां ही खामियां मिलीं। उत्तर पुस्तिका कक्ष में एक जगह कैमरे ही नहीं लगे थे तो दूसरी जगह कैमरा था। लेकिन उसमें बैकअप व्यवस्था नहीं थी। एमबीबीएस की कॉपियों के बंडलों पर केंद्राध्यक्ष के हस्ताक्षर नहीं मिले। यहां पर्याप्त रोशनी की भी व्यवस्था नहीं थी। इन सभी बिंदुओं को विवेचना में शामिल किया जा रहा है।
एसटीएफ के सीओ बृजेश सिंह और इंस्पेक्टर धर्मेंद्र यादव की टीम सोमवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे विवि पहुंची। टीम ने उत्तर पुस्तिका कक्ष की छोटी बिल्डिंग में रखी गईं एमबीबीएस कॉपियों की जांच की। यहां पर कॉपियों के कई बंडलों पर केंद्र अधीक्षक के हस्ताक्षर ही नहीं थे। एक बंडल पर नमूना मोहर ही नहीं मिली। यहां पर एक सीसीटीवी कैमरा लगा था। लेकिन जब उसकी रिकार्डिंग देखनी चाही तो तभी बिजली जाने से सीसीटीवी कैमरा भी बंद हो गया। सीओ ने यूनिवर्सिटी के अफसरों से बैकअप के बारे में पूछा तो सब एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे। सीओ ने कहा कि ये सीसीटीवी कैमरा तो किसी काम का नहीं है। टीम ने इसका डीवीआर मांग लिया। कॉपियों के बंडल पर हस्ताक्षर नहीं होने की बाबत भी इसको जांच में शामिल किया गया है।
विज्ञापन

कॉपियों का सेक्शन करें सील
इसके बाद टीम मेन उत्तर पुस्तिका बिल्डिंग में पहुंची। यहां पर रविवार रात यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सील लगा दी थी। पुलिस और एसटीएफ अफसरों की मौजूदगी में सील तोड़कर ताला खोला गया। यहां पर भीतर कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा था। यहां पर साल 2017 की कॉपियां रखी हैं। इनमें एमबीबीएस 2017 की सेकेंड और थर्ड ईयर की कॉपियां भी थीं। इनका रिजल्ट जारी हो चुका है। सीओ ने विवि के प्रशासनिक अधिकारियों से इन कॉपियों वाले सेक्शन को भी सील कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि जांच में कई तथ्य ऐसे हैं, जिनके चलते उन्हें ये कॉपियां चेक करनी पड़ सकती हैं। इसके बाद उन्होंने पवन और चंद्र प्रकाश के रूम में दस्तावेजों का रिकॉर्ड चेक किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

नहीं मिला कॉपियों का हिसाब
टीम ने स्टोर रूम में रखीं खाली कॉपियों का रिकॉर्ड रूम देखा। स्टोर रूम कर्मचारियों ने बताया कि यहां कंपनी से कॉपियां आने के बाद बंडलों के सीरियल नंबर की रजिस्टर में इंट्री करके कॉलेजों में कॉपियां भेज दी जाती हैं। कॉपी के नंबर के हिसाब से ये बताया जा सकता है कि वो किस कॉलेज को भेजी गई थी। टीम ने जब कर्मचारियों से सवाल किया कि अगर कोई कर्मचारी पूरा बंडल ही गायब कर दे तो कैसे पता चलेगा? इस पर सब चुप्पी साध गए। यानी साफ हो गया कि स्टोर रूम से कॉपियों का बंडल गायब करना किसी कर्मचारी के लिए बड़ी बात नहीं है। टीम ने स्टोर रूम के कई कर्मचारियों के नाम और नंबर नोट किए। इनसे भी जरूरत पड़ने पर पूछताछ की जाएगी। कुलपति से मिले सीओ

जांच पड़ताल के बाद सीओ बृजेश सिंह कुलपति प्रो. एनके तनेजा से मिले। सीओ ने कर्मचारियों की संलिप्तता और खामियों के बारे में बात की। कुलपति ने कहा कि इस सबको लेकर पूरी प्लानिंग की जा रही है। उन्होंने सीओ से कहा कि इस प्रकरण में जो भी दोषी हैं, उन्हें जेल भेजिए। ऐसा गंभीर अपराध करने वालों को यही सजा मिलना चाहिए। इस दौरान रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक समेत विवि प्रशासन के कई अधिकारी मौजूद रहे।

खास बातें:
- सीसीएसयू में जांच करने पहुंची एसटीएफ की टीम को मिली खामियां ही खामियां
- एमबीबीएस की कॉपियां बदलने के मामले में पड़ताल, कॉपियों के पांच बंडलों पर नहीं मिले हस्ताक्षर
- उत्तर पुस्तिका कक्ष, कॉपी सेंटर और स्टोर रूम में कर्मचारियों से की पूछताछ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed