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लाउडस्पीकर उतरवाने पर बोले उलमा
Updated Mon, 08 Jan 2018 11:50 PM IST
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साजिश के तहत टारगेट किए जा रहे मस्जिद और मदरसे
देवबंद (सहारनपुर)। धर्मस्थलों से लाउडस्पीकर हटाने वाले सरकारी आदेश पर देवबंदी उलमा ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि इस सरकार में साजिश के तहत मस्जिदों और मदरसों को टारगेट किया जा रहा है।
अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि मस्जिदों में अजान के वक्त लाउडस्पीकर का इस्तेमाल होता है वो तीन से पांच मिनट के लिए, जबकि उसके बाद नमाज अदा करने के लिए 10 मिनट का समय लगता है। कुछ मस्जिदें ऐसी हैं जहां नमाज के लिए स्पीकर का इस्तेमाल होता है। लेकिन वह मस्जिद परिसर के भीतर होते हैं। जिनकी आवाज बाहर तक नहीं जाती। इसलिए मस्जिदों को इस आदेश से बाहर ही रखा जाए तो बेहतर होगा। मौलाना जीशान कासमी का कहना है कि सरकार जान बूझकर मदरसों और मस्जिदों को निशाना बना रही है। हर दिन नए नए कानून बनाकर उन्हें परेशान किया जा रहा है। जबकि सब जानते हैं कि मस्जिदों में इस्तेमाल होने वाले लाउडस्पीकर से किसी को कोई परेशानी नहीं है। क्योंकि उनका इस्तेमाल केवल ढाई से तीन मिनट के लिए ही होता है। ताकि लोगों को नमाज के वक्त का पता लग जाए।
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देवबंद (सहारनपुर)। धर्मस्थलों से लाउडस्पीकर हटाने वाले सरकारी आदेश पर देवबंदी उलमा ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि इस सरकार में साजिश के तहत मस्जिदों और मदरसों को टारगेट किया जा रहा है।
अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि मस्जिदों में अजान के वक्त लाउडस्पीकर का इस्तेमाल होता है वो तीन से पांच मिनट के लिए, जबकि उसके बाद नमाज अदा करने के लिए 10 मिनट का समय लगता है। कुछ मस्जिदें ऐसी हैं जहां नमाज के लिए स्पीकर का इस्तेमाल होता है। लेकिन वह मस्जिद परिसर के भीतर होते हैं। जिनकी आवाज बाहर तक नहीं जाती। इसलिए मस्जिदों को इस आदेश से बाहर ही रखा जाए तो बेहतर होगा। मौलाना जीशान कासमी का कहना है कि सरकार जान बूझकर मदरसों और मस्जिदों को निशाना बना रही है। हर दिन नए नए कानून बनाकर उन्हें परेशान किया जा रहा है। जबकि सब जानते हैं कि मस्जिदों में इस्तेमाल होने वाले लाउडस्पीकर से किसी को कोई परेशानी नहीं है। क्योंकि उनका इस्तेमाल केवल ढाई से तीन मिनट के लिए ही होता है। ताकि लोगों को नमाज के वक्त का पता लग जाए।
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