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बिजली बढ़ोतरी प्रस्ताव का हुआ विरोध
Updated Sat, 23 Sep 2017 02:23 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा यूपीपीसीएल के प्रस्तावित विद्युत टैरिफ प्लान 2017-18 के लिए शुक्रवार को नोएडा में जनसुनवाई की गई। इंदिरा गांधी कला केंद्र ऑडिटोरियम में हुई जन सुनवाई में पश्चिमांचल के सभी 14 जिलों से पहुंचे किसान संगठनों, व्यापारियों व बुनकरों आदि के प्रतिनिधियों ने प्रस्तावित विद्युत दर बढ़ोतरी वाले टैरिफ प्लान का विरोध किया। साथ ही कहा कि जब तक सिस्टम 24 घंटे बिजली आपूर्ति का लोड उठाने में सक्षम न हो तब तक बिजली दरों को नहीं बढ़ाया जाए।
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत के नेतृत्व में मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बागपत, बिजनौर, गाजियाबाद व बुलंदशहर आदि जिलो से काफी किसान पहुंचे। चौधरी राकेश टिकैत ने आयोग के अध्यक्ष से कहा कि किसी को भी जनसुनवाई बैठक की जानकारी कंपनी की तरफ से नहीं दी गई। उन्होंने मीडिया से जानकारी हासिल हुई तो वे आनन-फानन में यहां पहुंचे। टिकैत ने कहा कि गांवों में गरीब किसान और मजदूर रहते हैं। सरकार किसानों की आय जब दोगुना कर दे तब बिजली दरों में बढ़ोतरी करे। भाकियू बढ़ी बिजली दरों को बर्दाश्त नहीं करेगी। भारतीय किसान आंदोलन के अध्यक्ष कुलदीप त्यागी ने भी बिजली बढ़ोतरी का विरोध किया। मेरठ से गए व्यापारियों व बुनकर प्रतिनिधियों ने भी बिजली दरे बढ़ाए जाने को गैर वाजिब बताया। आयोग ने बैठक में पहुंचे सभी के विचार सुने और उनका ज्ञापन लिया। अध्यक्ष एसके अग्रवाल ने आश्वस्त किया कि आयोग यूपीपीसीएल और उपभोक्ताओं की मांग और शिकायतों पर सहानुभूति पूर्वक फैसला करेगा।
12 से 400 फीसदी तक बढ़ोतरी का है प्रस्ताव
यूपीपीसीएल ने शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र की बिजली बढ़ोतरी का प्रस्ताव आयोग को दिया है। इसमें शहरी बिजली 12 फीसदी और ग्रामीण घरेलू बिजली दरें 260 फीसदी से 400 फीसदी तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। कारपोरेशन ने ग्रामीण मीटर्ड उपभोक्ताओं की बिजली दरों में करीब 150 फीसदी तो किसानों की बिजली दरों में 60 फीसदी तक इजाफा करने का प्रस्ताव किया है। इसके अलावा दो किलोवाट वाले ग्रामीण अनमीटर्ड उपभोक्ताओं को प्रति किलोवाट 180 रुपये से बढ़ाकर 650 रुपये प्रति किलोवाट करने का प्रस्ताव है। दो किलोवाट से ऊपर 200 रुपये प्रति किलोवाट से बढ़ाकर 800 रुपये प्रति किलोवाट करने का प्रस्ताव है। नई दरों का एलान अक्तूबर से नवंबर के बीच होने का अनुमान है।
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घाटा पाटने के लिए दरें बढ़ाने पर फोकस
यूपीपीसीएल ने 15 हजार 118 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का अनुमान लगाया है। बिजली दरों में प्रस्तावित वृद्धि से करीब 11 हजार करोड़ की अतिरिक्त आय होगी। यानि घाटा पाटने के लिए दरें बढ़ाने पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है।
ये है प्रस्तावित बिजली टैरिफ प्लान 2017-18
शहरी घरेलू उपभोक्ता
यूनिट दर प्रस्ताव
150 4.40 4.90
151-300 4.95 5.40
301-500 5.60 6.20
500 से ऊपर 6.20 6.70
फिक्स चार्ज 90 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये प्रति किलोवाट
ग्रामीण मीटर्ड उपभोक्ताओं के लिए बनाए चार स्लैब
150 यूनिट तक 4.40 रुपये
151 से 300 यूनिट तक 4.95 रुपये
301 से 500 यूनिट तक 5.60 रुपये
500 यूनिट से ज्यादा 6.20 रुपये
50 रुपये फिक्स चार्ज को बढ़ाकर 65 रुपये करने का प्रस्ताव हैं।
ग्रामीण मीटर उपभोक्ताओं को अभी तक 2.20 रुपये प्रति यूनिट देना पड़ता है।
खास बात
बिजली दर बढ़ोतरी प्रस्ताव पर नियामक आयोग ने की जन सुनवाई
किसान संगठन, व्यापारी, बुनकर आदि ने किया बिजली दरों में बढ़ोतरी का विरोध
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मेरठ।
उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा यूपीपीसीएल के प्रस्तावित विद्युत टैरिफ प्लान 2017-18 के लिए शुक्रवार को नोएडा में जनसुनवाई की गई। इंदिरा गांधी कला केंद्र ऑडिटोरियम में हुई जन सुनवाई में पश्चिमांचल के सभी 14 जिलों से पहुंचे किसान संगठनों, व्यापारियों व बुनकरों आदि के प्रतिनिधियों ने प्रस्तावित विद्युत दर बढ़ोतरी वाले टैरिफ प्लान का विरोध किया। साथ ही कहा कि जब तक सिस्टम 24 घंटे बिजली आपूर्ति का लोड उठाने में सक्षम न हो तब तक बिजली दरों को नहीं बढ़ाया जाए।
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत के नेतृत्व में मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बागपत, बिजनौर, गाजियाबाद व बुलंदशहर आदि जिलो से काफी किसान पहुंचे। चौधरी राकेश टिकैत ने आयोग के अध्यक्ष से कहा कि किसी को भी जनसुनवाई बैठक की जानकारी कंपनी की तरफ से नहीं दी गई। उन्होंने मीडिया से जानकारी हासिल हुई तो वे आनन-फानन में यहां पहुंचे। टिकैत ने कहा कि गांवों में गरीब किसान और मजदूर रहते हैं। सरकार किसानों की आय जब दोगुना कर दे तब बिजली दरों में बढ़ोतरी करे। भाकियू बढ़ी बिजली दरों को बर्दाश्त नहीं करेगी। भारतीय किसान आंदोलन के अध्यक्ष कुलदीप त्यागी ने भी बिजली बढ़ोतरी का विरोध किया। मेरठ से गए व्यापारियों व बुनकर प्रतिनिधियों ने भी बिजली दरे बढ़ाए जाने को गैर वाजिब बताया। आयोग ने बैठक में पहुंचे सभी के विचार सुने और उनका ज्ञापन लिया। अध्यक्ष एसके अग्रवाल ने आश्वस्त किया कि आयोग यूपीपीसीएल और उपभोक्ताओं की मांग और शिकायतों पर सहानुभूति पूर्वक फैसला करेगा।
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12 से 400 फीसदी तक बढ़ोतरी का है प्रस्ताव
यूपीपीसीएल ने शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र की बिजली बढ़ोतरी का प्रस्ताव आयोग को दिया है। इसमें शहरी बिजली 12 फीसदी और ग्रामीण घरेलू बिजली दरें 260 फीसदी से 400 फीसदी तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। कारपोरेशन ने ग्रामीण मीटर्ड उपभोक्ताओं की बिजली दरों में करीब 150 फीसदी तो किसानों की बिजली दरों में 60 फीसदी तक इजाफा करने का प्रस्ताव किया है। इसके अलावा दो किलोवाट वाले ग्रामीण अनमीटर्ड उपभोक्ताओं को प्रति किलोवाट 180 रुपये से बढ़ाकर 650 रुपये प्रति किलोवाट करने का प्रस्ताव है। दो किलोवाट से ऊपर 200 रुपये प्रति किलोवाट से बढ़ाकर 800 रुपये प्रति किलोवाट करने का प्रस्ताव है। नई दरों का एलान अक्तूबर से नवंबर के बीच होने का अनुमान है।
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घाटा पाटने के लिए दरें बढ़ाने पर फोकस
यूपीपीसीएल ने 15 हजार 118 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का अनुमान लगाया है। बिजली दरों में प्रस्तावित वृद्धि से करीब 11 हजार करोड़ की अतिरिक्त आय होगी। यानि घाटा पाटने के लिए दरें बढ़ाने पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है।
ये है प्रस्तावित बिजली टैरिफ प्लान 2017-18
शहरी घरेलू उपभोक्ता
यूनिट दर प्रस्ताव
150 4.40 4.90
151-300 4.95 5.40
301-500 5.60 6.20
500 से ऊपर 6.20 6.70
फिक्स चार्ज 90 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये प्रति किलोवाट
ग्रामीण मीटर्ड उपभोक्ताओं के लिए बनाए चार स्लैब
150 यूनिट तक 4.40 रुपये
151 से 300 यूनिट तक 4.95 रुपये
301 से 500 यूनिट तक 5.60 रुपये
500 यूनिट से ज्यादा 6.20 रुपये
50 रुपये फिक्स चार्ज को बढ़ाकर 65 रुपये करने का प्रस्ताव हैं।
ग्रामीण मीटर उपभोक्ताओं को अभी तक 2.20 रुपये प्रति यूनिट देना पड़ता है।
खास बात
बिजली दर बढ़ोतरी प्रस्ताव पर नियामक आयोग ने की जन सुनवाई
किसान संगठन, व्यापारी, बुनकर आदि ने किया बिजली दरों में बढ़ोतरी का विरोध