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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बड़ी कार्रवाई, जहर उगलने वाले मेरठ-बागपत के 308 भट्टे बंद

Mon, 12 Aug 2019 02:13 AM IST
Gaurav sharma मोहित कुमार, अमर उजाला, मेरठ
मोहित कुमार, अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Mon, 12 Aug 2019 02:13 AM IST
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308 kilns closed in NCR.
ईंट भट्ठे - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली एनसीआर में बढ़ रहे वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का चाबुक अब ईंट भट्ठों पर भी चल रहा है। मेरठ और बागपत में बिना जिगजैग प्रणाली के चल रहे 308 ईंट भट्ठों को टीम ने बंद करा दिया है। भट्ठों की मॉनिटरिंग कर पूरी रिपोर्ट तैयार कर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजी गई है।
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पिछले दो साल से उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनजीटी ने सख्त रुख अपना रखा है। मेरठ में 238 और बागपत में करीब 525 से अधिक ईट भट्ठे हैं। इनसे निकलने वाले धुएं से भी एनसीआर में प्रदूषण बढ़ रहा है।
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इसके लिए भट्ठों को जिगजैग से जोड़ा जाए, ताकि बाहर निकलने वाला धुएं को रोका जा सके। करीब दो महीने में टीम ने मेरठ में करीब 133 ईंट भट्ठे बंद कराए, जबकि 31 भट्ठा संचालकों ने स्वयं ही बंद कर दिए। इसके अलावा बागपत में टीम ने 34 भट्ठे बंद कराए, जबकि 110 भट्ठे संचालकों ने स्वयं बंद किए।
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टीम ने निरीक्षण कर किए थे चिह्नित
बागपत और मेरठ में निरीक्षण के दौरान ऐसे भट्ठे चिह्नित किए गए जो प्रदूषण फैला रहे थे। शुरुआत में मेरठ में 88 और बागपत में 107 भट्ठे थे। इन्हें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने नोटिस जारी कर कहा कि बिना जिगजैग वाले ईंट भट्ठों को चलने नहीं दिया जाएगा। मेरठ में 69 भट्ठे और बागपत में 336 भट्ठे जिगजैग हैं।

जिगजैग के बिना नहीं चलेंगे भट्ठे
प्रदूषण फैला रहे ईंट भट्ठों का संचालन नए सत्र में तभी होगा जब वह जिगजैग हो जाएंगे। जिगजैग होने से धुआं इस तरह से निकलता है कि वह बाहर तक नहीं आता। जबकि बिना जिगजैग वालों में भट्ठों का धुआं सीधे ही निकल जाता है। जिससे वातावरण प्रदूषित होता है।

जिगजैग तकनीक में टेडी मेढ़ी लाइन बनाकर हवा दी जाती है। इससे ईंधन कम लगता है। पहले एक लाख ईट पकाने में 26 टन कोयला लगता था, इस तकनीक से 16 टन कोयला ही लगेगा। एनसीआर  दिल्ली में इनवायरमेंट प्रोविंसल एंड कंट्रोल अथॉरिटी (ईपीसीए) ने भी इस पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए है।

जिगजैग से वायु प्रदूषण होता है कम
जिला प्रशासन के सहयोग से मेरठ और बागपत में बिना जिगजैग वाले भट्ठे बंद करा दिए है। कुछ ने स्वयं ही बंद कर लिए है। जिन्होंने बंद नहीं किए हैं उन्हे नोटिस जारी किए गए है। आगामी सत्र में बिना जिगजैग वाले भट्ठे नहीं चलने दिए जाएंगे। जिगजैग प्रणाली से वायु प्रदूषण में कमी आती है। -आरके त्यागी, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी

नियमानुसार ही संचालन कराएंगे
बिना जिगजैग वाले भट्ठों से वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी को देखते हुए यह निर्णय लिया है। इसके चलते मेरठ और बागपत में ईंट भट्ठों को बंद किया गया है। नियमानुसार ही भट्ठों का संचालन किया जाएगा। मेरठ और बागपत में जिन भट्ठा संचालकों ने जिगजैग कर लिया है उनका संचालन किया जाएगा। -डॉ. योगेंद्र कुमार, सहायक प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी

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