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Meerut News: हर कोई बोला, सांगवान को मिला उसकी तपस्या का फल
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हर कोई बोला, सांगवान को मिला उसकी तपस्या का फल
- रालोद के लिए छोड़ा घर-दर, नहीं की शादी
- समर्थक बोले, जयंत ने दिल जीत लिया
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। गरीबों का हमदर्द, लाचारों का गुमगुसार, सियासत का मंझा हुआ खिलाड़ी और आज के दौर की मक्कारी में कतई अनाड़ी। तबीयत के इस फक्कड़ मिजाज किरदार का नाम है डॉ. राजकुमार सांगवान। उन्होंने जिंदगी की खुरदरी जमीन पर नंगे पांव चलते हुए अपनी फकीरी के जरिए राजनीति के नए आयाम गढ़े। 44 साल से समाज और सियासत के लिए समर्पित राजकुमार सांगवान को उनके त्याग का ईनाम मिल ही गया। रालोद मुखिया चौधरी जयंत सिंह ने डॉ. सांगवान को बागपत लोकसभा से प्रत्याशी घोषित किया तो गांवों में कितने ही किसानों की आंखें नम हो गईं। छात्र राजनीति के पुराने नेता भावुक हो गए। हर कोई यही बोला कि आज सांगवान को उसकी तपस्या का फल मिल गया...जयंत ने दिल जीत लिया।
चौधरी चरण सिंह का आशीर्वाद लेकर राजनीति शुरू करने वाले सांगवान ने समाजसेवा के चलते विवाह तक नहीं किया। उन्हें कई बार दूसरी पार्टी से टिकट का ऑफर मिला लेकिन उन्होंने यह कहते हुए इंकार कर दिया कि चौधरी चरण सिंह से प्रेरित होकर राजनीति में आए हैं। इस पार्टी को नहीं छोड़ेंगे। कई मौके आए जब उनको इस समर्पण का फल मिलना चाहिए था, लेकिन हाशिए पर आने के बाद भी वे पार्टी के प्रति कभी कुछ नहीं बोले।
बागपत के माया त्यागी कांड के आंदोलन में गए थे सन 1980 में जेल
63 साल के डॉ. राजकुमार सांगवान सन 1980 में पहली बार बागपत के माया त्यागी कांड में हुए आंदोलन में जेल गए थे। इसके अलावा वे दर्जनों बार छात्र और किसान आंदोलनों में जेल गए। सन् 1982 में वे मेरठ में रालोद के जिला उपाध्यक्ष बने। सन् 1986 में छात्र रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने। 1990 में मेरठ के युवा रालोद के जिलाध्यक्ष रहे। इसके बाद वह युवा रालोद में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष बने। सन् 1995 में चाैधरी अजित सिंह ने उन्हें झारखंड और बिहार के चुनाव में प्रदेश प्रभारी बनाया। इसके बाद वे रालोद में प्रदेश महामंत्री और प्रदेश महामंत्री सगंठन बने। वर्तमान में वे रालोद के राष्ट्रीय सचिव हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में वह सिवालखास विधान सभा के उम्मीदवार घोषित होने वाले थे लेकिन ऐन वक्त पर सपा ने इस सीट पर गुलाम मोहम्मद को रालोद से प्रत्याशी घोषित करा दिया था। टिकट नहीं मिलने पर भी उन्होंने गुलाम मोहम्मद के लिए प्रचार किया।
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चौधरी चरण सिंह पर किया है शोध
मूलरूप से सिवालखास क्षेत्र के उपलेहड़ा गांव में साहब सिंह के परिवार में जन्मे वर्तमान में वेस्टर्न कचहरी रोड पर रहने वाले डॉ. राजकुमार सांगवान ने मेरठ काॅलेज से एमए इतिहास की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने चौधरी चरण सिंह पर शोध किया। इसके बाद वे मेरठ कॉलेज में इतिहास के प्रोफेसर रहे।
सर्किट हाउस की मुलाकात से लोकसभा प्रत्याशी बनने का सफर
डॉ. राजकुमार सांगवान सन 1979 में मेरठ कॉलेज में स्नातक करने आए थे। यहीं से उन्होंने छात्र राजनीति शुरू की। वह चौधरी चरण सिंह की नीतियों से प्रभावित थे। उस दौरान चौधरी चरण सिंह मेरठ आए तो डॉ. सांगवान की पहली मुलाकात उनसे सर्किट हाउस में हुई। पैर छूकर चौधरी साहब का आशीर्वाद लिया। चौधरी साहब ने कहा कि छात्रों की आवाज को ईमानदारी से उठाते रहना। इसके बाद से डॉ. सांगवान राजनीति के ही हो गए। एक वक्त ऐसा भी आया जब उनकी छात्रों में लोकप्रियता को देखते हुए एक पूर्व मुख्यमंत्री ने जिले के कप्तान से उनको सिंबल पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव भिजवाया लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया।
पूर्व डीजीपी ने हंसकर कहा, आप अब भी छात्र नेता हो
डाॅ. सांगवान का छात्रों से जुड़ाव सबसे अधिक रहा। जो भी उनके पास गया, उसके लिए वे खड़े हो गए। एक बार जब उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी मेरठ आए तो डॉ. सांगवान छात्रों के किसी मामले में उनसे मिले। डीजीपी ने हंसते हुए कहा कि मैं जब एसएसपी था, आप तब भी छात्र नेता थे, आज डीजीपी हूं, आप अब भी छात्रों की पैरवी करते हैं।
हर कोई बोला जयंत ने दिल जीत लिया
डॉ. सांगवान को टिकट दिए जाने पर बागपत के धनौरा सिल्वरनगर निवासी सुखबीर सिंह कहते हैं कि ऐसे ईमानदार इंसान को टिकट देकर जयंत ने बड़ा दिल दिखाया है। मवीकला निवासी धर्मपाल सिंह आर्य, बड़ौत निवासी सुरेश राणा, बावली निवासी ऋषिपाल सिंह और सिनौली नंगला निवासी देवपाल सिंह कहते हैं कि जमीनी नेता को टिकट देकर जयंत ने दिल जीत लिया।
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- रालोद के लिए छोड़ा घर-दर, नहीं की शादी
- समर्थक बोले, जयंत ने दिल जीत लिया
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। गरीबों का हमदर्द, लाचारों का गुमगुसार, सियासत का मंझा हुआ खिलाड़ी और आज के दौर की मक्कारी में कतई अनाड़ी। तबीयत के इस फक्कड़ मिजाज किरदार का नाम है डॉ. राजकुमार सांगवान। उन्होंने जिंदगी की खुरदरी जमीन पर नंगे पांव चलते हुए अपनी फकीरी के जरिए राजनीति के नए आयाम गढ़े। 44 साल से समाज और सियासत के लिए समर्पित राजकुमार सांगवान को उनके त्याग का ईनाम मिल ही गया। रालोद मुखिया चौधरी जयंत सिंह ने डॉ. सांगवान को बागपत लोकसभा से प्रत्याशी घोषित किया तो गांवों में कितने ही किसानों की आंखें नम हो गईं। छात्र राजनीति के पुराने नेता भावुक हो गए। हर कोई यही बोला कि आज सांगवान को उसकी तपस्या का फल मिल गया...जयंत ने दिल जीत लिया।
चौधरी चरण सिंह का आशीर्वाद लेकर राजनीति शुरू करने वाले सांगवान ने समाजसेवा के चलते विवाह तक नहीं किया। उन्हें कई बार दूसरी पार्टी से टिकट का ऑफर मिला लेकिन उन्होंने यह कहते हुए इंकार कर दिया कि चौधरी चरण सिंह से प्रेरित होकर राजनीति में आए हैं। इस पार्टी को नहीं छोड़ेंगे। कई मौके आए जब उनको इस समर्पण का फल मिलना चाहिए था, लेकिन हाशिए पर आने के बाद भी वे पार्टी के प्रति कभी कुछ नहीं बोले।
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बागपत के माया त्यागी कांड के आंदोलन में गए थे सन 1980 में जेल
63 साल के डॉ. राजकुमार सांगवान सन 1980 में पहली बार बागपत के माया त्यागी कांड में हुए आंदोलन में जेल गए थे। इसके अलावा वे दर्जनों बार छात्र और किसान आंदोलनों में जेल गए। सन् 1982 में वे मेरठ में रालोद के जिला उपाध्यक्ष बने। सन् 1986 में छात्र रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने। 1990 में मेरठ के युवा रालोद के जिलाध्यक्ष रहे। इसके बाद वह युवा रालोद में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष बने। सन् 1995 में चाैधरी अजित सिंह ने उन्हें झारखंड और बिहार के चुनाव में प्रदेश प्रभारी बनाया। इसके बाद वे रालोद में प्रदेश महामंत्री और प्रदेश महामंत्री सगंठन बने। वर्तमान में वे रालोद के राष्ट्रीय सचिव हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में वह सिवालखास विधान सभा के उम्मीदवार घोषित होने वाले थे लेकिन ऐन वक्त पर सपा ने इस सीट पर गुलाम मोहम्मद को रालोद से प्रत्याशी घोषित करा दिया था। टिकट नहीं मिलने पर भी उन्होंने गुलाम मोहम्मद के लिए प्रचार किया।
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चौधरी चरण सिंह पर किया है शोध
मूलरूप से सिवालखास क्षेत्र के उपलेहड़ा गांव में साहब सिंह के परिवार में जन्मे वर्तमान में वेस्टर्न कचहरी रोड पर रहने वाले डॉ. राजकुमार सांगवान ने मेरठ काॅलेज से एमए इतिहास की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने चौधरी चरण सिंह पर शोध किया। इसके बाद वे मेरठ कॉलेज में इतिहास के प्रोफेसर रहे।
सर्किट हाउस की मुलाकात से लोकसभा प्रत्याशी बनने का सफर
डॉ. राजकुमार सांगवान सन 1979 में मेरठ कॉलेज में स्नातक करने आए थे। यहीं से उन्होंने छात्र राजनीति शुरू की। वह चौधरी चरण सिंह की नीतियों से प्रभावित थे। उस दौरान चौधरी चरण सिंह मेरठ आए तो डॉ. सांगवान की पहली मुलाकात उनसे सर्किट हाउस में हुई। पैर छूकर चौधरी साहब का आशीर्वाद लिया। चौधरी साहब ने कहा कि छात्रों की आवाज को ईमानदारी से उठाते रहना। इसके बाद से डॉ. सांगवान राजनीति के ही हो गए। एक वक्त ऐसा भी आया जब उनकी छात्रों में लोकप्रियता को देखते हुए एक पूर्व मुख्यमंत्री ने जिले के कप्तान से उनको सिंबल पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव भिजवाया लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया।
पूर्व डीजीपी ने हंसकर कहा, आप अब भी छात्र नेता हो
डाॅ. सांगवान का छात्रों से जुड़ाव सबसे अधिक रहा। जो भी उनके पास गया, उसके लिए वे खड़े हो गए। एक बार जब उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी मेरठ आए तो डॉ. सांगवान छात्रों के किसी मामले में उनसे मिले। डीजीपी ने हंसते हुए कहा कि मैं जब एसएसपी था, आप तब भी छात्र नेता थे, आज डीजीपी हूं, आप अब भी छात्रों की पैरवी करते हैं।
हर कोई बोला जयंत ने दिल जीत लिया
डॉ. सांगवान को टिकट दिए जाने पर बागपत के धनौरा सिल्वरनगर निवासी सुखबीर सिंह कहते हैं कि ऐसे ईमानदार इंसान को टिकट देकर जयंत ने बड़ा दिल दिखाया है। मवीकला निवासी धर्मपाल सिंह आर्य, बड़ौत निवासी सुरेश राणा, बावली निवासी ऋषिपाल सिंह और सिनौली नंगला निवासी देवपाल सिंह कहते हैं कि जमीनी नेता को टिकट देकर जयंत ने दिल जीत लिया।