फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   ऑल इंडिया टॉपर्स की सफलता की कहानी

ऑल इंडिया टॉपर्स की सफलता की कहानी

Tue, 07 May 2019 02:19 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 07 May 2019 02:19 AM IST
विज्ञापन
ऑल इंडिया टॉपर्स की सफलता की कहानी

विज्ञापन
नोट : सीबीएसई 10वीं की बोर्ड परीक्षा में ऑल इंडिया टॉपर्स की सफलता की कहानी

ऑल इंडिया टॉपर 1

वत्सल वार्ष्णेय, ऑल इंडिया टॉपर
लक्ष्य : बीटेक करके इंजीनियर बनना
बच्चों के लिए टिप्स : मन लगाकर पढ़ाई करें। पिछले साल के पेपर हल करें। साथ ही खुद के सैंपल पेपर बनाकर उन्हें लगातार हल करते रहें। पढ़ाई के दौरान तनाव न लें।

मेरठ। सीबीएसई दसवीं की बोर्ड परीक्षा में ऑल इंडिया टॉपर में शामिल मेरठ के वत्सल वार्ष्णेय ने 500 में से 499 अंक हासिल किए हैं। वत्सल दीवान पब्लिक स्कूल कैंट के छात्र हैं। उनका परिवार सोमदत्त विहार जागृति विहार में रहता है। पिता डॉ. अनुपम वार्ष्णेय मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज में पैथोलॉजिस्ट हैं। मम्मी डॉ. तरंग गोयल मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज में त्वचा रोग विशेषज्ञ हैं। छोटा भाई वासु दीवान पब्लिक स्कूल में ही छठवीं कक्षा में पढ़ता है। वत्सल को मैथ सबसे ज्यादा प्रिय है। पढ़ाई के साथ बैडमिंटन खेलना पसंद है। वत्सल अपनी सफलता का श्रेय शिक्षक ों व परिवार को देते हैं। वत्सल बीटेक करके इंजीनियर बनना चाहते हैं। माता-पिता चिकित्सक हैं, लेकिन वत्सल का सपना इंजीनियर बनना है। वत्सल केवल व्हाट्सएप प्रयोग करते हैं। सोशल मीडिया पर कोई एकाउंट नहीं है। व्हाट्सएप का प्रयोग भी केवल पढ़ाई और एजुकेशन ग्रुप तक सीमित है। वत्सल ने पांच में से चार विषयों में पूरे 100 अंक लिए हैं। केवल गणित में 99 अंक हैं, 01 नंबर कटा है। गणित में एक अंक कटने की वजह वत्सल सवाल में कंफ्यूजन को बताते हैं। बिना कोचिंग सफलता हासिल की है। वत्सल आगे की पढ़ाई पीसीएम स्ट्रीम लेकर कर रहे हैं।
विज्ञापन


स्कोर कार्ड
अंग्रेजी -100
फ्रैंच - 100
मैथ्स - 99
साइंस - 100
सोशल साइंस - 100
प्रतिशत - 99.8

---------------------------------------------------

लोड लिए बिना फोकस होकर की पढ़ाई

ऑल इंडिया टॉपर 3-- शुभ अग्रवाल

लक्ष्य : आईआईएम क्रैक करना
बच्चों के लिए टिप्स : पढ़ाई का कोई समय नहीं है। जब भी आपको समय मिले पढ़ने बैठ जाएं। जब तक मन करें लगातार पढ़ाई करते रहें।

मेरठ। सीबीएसई 10वीं बोर्ड की परीक्षा में 500 में से 497 अंक लाकर ऑल इंडिया में थर्ड रैंक पाने वाले शुभ अग्रवाल का सपना मैनेजमेंट लाइन में जाना है। दीवान पब्लिक स्कूल कैंट के छात्र शुभ के पिता विशाल अग्रवाल बिजनेसमैन हैं। मम्मी निधि अग्रवाल होममेकर हैं। छोटी बहन श्रेया अग्रवाल दीवान पब्लिक स्कूल में नवमीं की छात्रा हैं। परिवार प्रभात नगर में रहता है। शुभ ने दीवान स्कूल से दसवीं करने के बाद 11वीं में अपना स्कूल बदल लिया है। 11वीं में शुभ ने डीपीएस आरके पुरम दिल्ली में प्रवेश लिया है। कॉमर्स विद मैथ स्ट्रीम लेकर आगे की पढ़ाई करेंगे। फिलहाल शुभ का सपना मैनेजमेंट लाइन में जाना है। पढ़ने के अलावा शुभ को संगीत सुनना और बैडमिंटन खेलना पसंद है। अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों व अभिभावकों को देते हैं। बकौल शुभ मैंने कभी भी लगातार घंटों पढ़ाई नहीं की। जब भी पढ़ता मन लगाकर पढ़ता। तीन घंटे से ज्यादा कभी लगकर नहीं पढ़ा। अच्छे अंक आने की उम्मीद थी, लेकिन टॉप कर जाऊंगा यह सोचा भी नहीं था। बिना कोचिंग सेल्फ स्टडी से यह सफलता हासिल की है। लेकिन शिक्षकों ने साथ दिया है। सोशल मीडिया पर केवल इंस्टाग्राम यूज़ करता हूं। शुभ ने 497 अंक लिए हैं। तीन अंक साइंस में कटे हैं, बकौल शुभ पेपर ट्रिकी होने के कारण साइंस में तीन अंक कट गए। अचानक से सीबीएसई ने रिजल्ट जारी कर दिया। सुबह शुभ स्कूल में थे, क्लास भी अटैंड की, अचानक तीन बजे रिजल्ट आया तो पता चला कि टॉप किया है। शुभ डीपीएस आरके पुरम में हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करते हैं। माता-पिता को जब बेटे के टॉपर बनने की खबर मिली तो तुरंत बेटे से मिलने दिल्ली के लिए निकल गए। प्रमुख बात यह कि शुभ ने संस्कृत में भी 100 अंक हासिल किए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


स्कोर कार्ड
अंग्रेजी - 100
संस्कृत - 100
मैथ - 100
साइंस - 97
सोशल साइंस - 100
प्रतिशत - 99.4

------------------------------------------------

एक महीने पहले पिता गुजरे, फिर भी बने टॉपर

ऑल इंडिया टॉपर 3- दिपांशु बिसारिया

लक्ष्य- आईएएस बनकर देश सेवा करना

बच्चों के लिए टिप्स : पढ़ाई को बोझ न समझें। लगातार पढ़ाई करते रहें। जब मन न करे तो खेल लेना बेहतर होता है।

मेरठ। सीबीएसई दसवीं बोर्ड की परीक्षा में ऑल इंडिया में टॉप थर्ड रैंक लाने वाले मेरठ के दीपांशु बिसारिया ने 497 अंक लिए हैं। दीपांशु केएल इंटरनेशनल स्कूल सोमदत्त विहार के छात्र हैं। उन्होंने बताया की कभी टॉपर बनने के बारे में सोचा नही था। मुझे सिर्फ 98 प्रतिशत से ऊपर अंक लाने थे। 2 जनवरी 2019 को दीपांशु के पिता स्वर्गीय देवानंद बिसारिया की स्वाइन फ्लू के चलते मौत हो गई थी। परीक्षा से एक माह पहले ही पिता की मृत्यु हो गई थी, इसके बाद भी दीपांशु ने हौसला नहीं हारा। दीपांशु के पिता देवानंद बिसारिया मेरठ के माछरा ब्लॉक में प्राइमरी स्कूल में अध्यापक थे। दीपांशु ने बताया कि उसका लक्ष्य आईएएस बनकर पिता का सपना पूरा करने का है। माता आशा गृहणी हैं और एक छोटा भाई वंश आठवीं कक्षा में केएल इंटरनेशनल स्कूल का छात्र है। दीपांशु सिर्फ 2 घंटे रोजाना पढ़ाई कर टॉपर बने हैं। उन्होंने बताया कि इस 2 घंटे में वह इत्मिनान के साथ पढ़ते थे। इसमें से एक घंटा मैथ को देते थे। उनका पसंदीदा विषय मैथ है। 11वी में पीसीएम लेंगे। उन्होंने मैथ और साइंस की तैयारी के लिए ट्यूशन लिया। बकौल दीपांशु विषय की रेगुलर स्टडी करने से कभी मात नहीं खा सकते। दीपांशु को पढ़ाई के साथ कबड्डी खेलना और फुटबॉल खेलना अच्छा लगता है। तनाव दूर भगाने के लिए वो वीडियो गेम भी खूब खेलते हैं। सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर हैं। दीपांशु के दादाजी बालेश्वर बिसारिया को जैसे ही पोते के टॉपर बनने की खबर मिली तो मिठाई खाते हुए वो रोने लगे। बोले. आज यह दिन देखने को मेरा बेटा नहीं रहा। वहीं उन्होंने बताया कि मैंने दीपांशु से कहा था कि तुझे मेहनत कर नाम रोशन करना है। दादाजी बालेश्वर साल 2010 में यूपी रोडवेज से सेवानिवृत्त हुए हैं।

स्कोर कार्ड
मैथ - 100
एसएसटी - 100
साइंस - 99
अंग्रेजी -99
संस्कृत - 99
प्रतिशत- 99.4
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed