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साहित्यकार-फिल्मकार डॉ. महेंद्र बावरा का निधन
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साहित्यकार-फिल्मकार डॉ. महेंद्र बावरा का निधन
मेरठ। साहित्यकार, मॉलीवुड के फिल्मकार, शिक्षक और पत्रकार डॉ. महेंद्र सिंह बावरा (68) का सोमवार को निधन हो गया। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। सीने में तेज दर्द की शिकायत पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
डॉ. महेंद्र बावरा ने रत्नावली खंड काव्य लिखा था। इसके अलावा उन्होंने मॉलीवुड की 17 फिल्मों का निर्माण किया। उन्होंने पहली फिल्म पराई बेटियां 1984 में बनाई थी। यह कैसेट में थी। 2003 में उन्होंने कुंदन बनाई थी, जो सीडी में आई थी। कुछ लोग इन्हें ‘मॉलीवुड का दादा साहब फाल्के’ भी कहते थे। इनकी फिल्म किस्मत: एक अनोखा मोड़ को फ्रांस में आयोजित कांस फिल्म फेस्टिवल में भी दिखाया गया था। रायबरेली में इन्हें पीएचडी उपाधि दी गई थी। 2017 तक डॉ. बावरा राम सहाय इंटर कॉलेज में ड्राइंग, हिंदी और समाजशास्त्र के शिक्षक रहे। इन्हें बेस्ट टीचिंग के लिए 2011 में राज्यपाल अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। इस अवार्ड की घोषणा 2009 में की गई थी। उन्होंने काफी समय तक पत्रकारिता भी की। इनके परिवार में पत्नी निर्मला बावरा, दो बेटे अंशुल और रेशुल और पुत्रवधू हैं। इनका परिवार सरधना रोड कंकरखेड़ा में रहता है। इनके बेटे रेशुल ने बताया कि हार्ट अटैक के कारण उनके पिता का निधन हुआ है। घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा है।
महेंद्र बावरा एक शानदार अभिनेता और साहित्यकार थे। मॉलीवुड के लिए उन्होंने बहुत काम किया जो सदैव अविस्मरणीय रहेगा।-ज्ञान दीक्षित वरिष्ठ फोटोग्राफर
महेंद्र बावरा मेरे अच्छे मित्र और सलाहकार दोनों थे। उनके जाने का बहुत दुख है। मॉलीवुड में उनका योगदान श्रेष्ठ है।-राजकुमार शर्मा वरिष्ठ कवि
लंबे समय तक महेंद्र बावरा के साथ मॉलीवुड में सक्रिय रहा। उन्होंने हमेशा एक बड़े भाई की तरह हमें सिखाया। उनका जाना दुखद है।- गिरीश थापर अभिनेता
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मेरठ। साहित्यकार, मॉलीवुड के फिल्मकार, शिक्षक और पत्रकार डॉ. महेंद्र सिंह बावरा (68) का सोमवार को निधन हो गया। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। सीने में तेज दर्द की शिकायत पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
डॉ. महेंद्र बावरा ने रत्नावली खंड काव्य लिखा था। इसके अलावा उन्होंने मॉलीवुड की 17 फिल्मों का निर्माण किया। उन्होंने पहली फिल्म पराई बेटियां 1984 में बनाई थी। यह कैसेट में थी। 2003 में उन्होंने कुंदन बनाई थी, जो सीडी में आई थी। कुछ लोग इन्हें ‘मॉलीवुड का दादा साहब फाल्के’ भी कहते थे। इनकी फिल्म किस्मत: एक अनोखा मोड़ को फ्रांस में आयोजित कांस फिल्म फेस्टिवल में भी दिखाया गया था। रायबरेली में इन्हें पीएचडी उपाधि दी गई थी। 2017 तक डॉ. बावरा राम सहाय इंटर कॉलेज में ड्राइंग, हिंदी और समाजशास्त्र के शिक्षक रहे। इन्हें बेस्ट टीचिंग के लिए 2011 में राज्यपाल अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। इस अवार्ड की घोषणा 2009 में की गई थी। उन्होंने काफी समय तक पत्रकारिता भी की। इनके परिवार में पत्नी निर्मला बावरा, दो बेटे अंशुल और रेशुल और पुत्रवधू हैं। इनका परिवार सरधना रोड कंकरखेड़ा में रहता है। इनके बेटे रेशुल ने बताया कि हार्ट अटैक के कारण उनके पिता का निधन हुआ है। घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा है।
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महेंद्र बावरा एक शानदार अभिनेता और साहित्यकार थे। मॉलीवुड के लिए उन्होंने बहुत काम किया जो सदैव अविस्मरणीय रहेगा।-ज्ञान दीक्षित वरिष्ठ फोटोग्राफर
महेंद्र बावरा मेरे अच्छे मित्र और सलाहकार दोनों थे। उनके जाने का बहुत दुख है। मॉलीवुड में उनका योगदान श्रेष्ठ है।-राजकुमार शर्मा वरिष्ठ कवि
लंबे समय तक महेंद्र बावरा के साथ मॉलीवुड में सक्रिय रहा। उन्होंने हमेशा एक बड़े भाई की तरह हमें सिखाया। उनका जाना दुखद है।- गिरीश थापर अभिनेता