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चुनाव में इस बार भी निजी वाहनों का होगा अधिग्रहण
Updated Mon, 13 Nov 2017 02:42 AM IST
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चुनाव में इस बार भी होगा निजी वाहनों का अधिग्रहण
मेरठ।
विधानसभा चुनाव 2017 में पहली बार निजी वाहनों का अधिग्रहण हुआ था। जिसका जमकर विरोध भी हुआ, लेकिन निजी तौर पर कोर्ट जाने वाले वाहन मालिकों को छोड़ बाकी किसी को राहत नहीं मिली। अब नगर निकाय चुनाव में भी जिला प्रशासन की नजर निजी वाहनों पर टिक गई है। इसके लिए नोटिस जारी होना शुरू हो गए हैं।
चुनाव में मजिस्ट्रेटों के साथ ही उनके साथ भेजे जाने वाली फोर्स के लिए छोटे वाहनों की जरूरत होती है। पोलिंग पार्टियां और मतदान केंद्र पर तैनात पुलिस बल तो बसों के द्वारा जाता है। लेकिन मजिस्ट्रेट और पेट्रोलिंग करने वाली फोर्स बोलेरो, सफारी, इनोवा, इको, मारुती वैन जैसे मध्यम आकार के वाहनों से चलती हैं। विधानसभा चुनाव से पहले तक जिला प्रशासन सरकारी वाहनों के साथ ही टैक्सी में पंजीकृत वाहनों का इसके लिए प्रयोग करता था। लेकिन पहली बार विधानसभा चुनाव 2017 में निजी वाहनों का अधिग्रहण शुरू हुआ।
इस बार भी जिलाधिकारी समीर वर्मा की तरफ से निजी वाहन मालिकों को नोटिस जाना शुरू हो गया है। इस नोटिस में वाहन को 19 नवंबर की सुबह 10 बजे तक पुलिस लाइन मेरठ में पहुंचाने के लिए कहा गया है।
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ये है वाहन अधिग्रहण की शर्त
नोटिस में बताया गया है कि वाहन के लिए पेट्रोल या डीजल का व्यय भाड़ेदार (जो अधिग्रहण कर रहा है) के द्वारा होगा। जबकि गाड़ी की मरम्मत आदि वाहन मालिक खुद कराकर रखेगा, यदि वाहन में कोई क्षति होती है तो उसकी सूचना भाड़ेदार को देगा। इसके साथ ही वाहन मालिक अपनी तरफ से ड्राइवर उपलब्ध करायेगा। यदि ड्राइवर अच्छा नहीं है और उसमें बैठने वाला व्यक्ति शिकायत करता है तो वाहन मालिक को ड्राइवर बदलकर देना होगा।
शासन से आया तो मिलेगा पैसा
नोटिस में वाहन स्वामी को प्रतिकर (किराया) के भुगतान का भी जिक्र किया गया है। जिसमें कहा गया है कि जब गाड़ी वाहन स्वामी वापस लेकर जायेगा तो वह बिल प्रभारी अधिकारी (परिवहन) को देगा। इसके बाद शासन से पैसा आने के बाद धन आवंटित किया जायेगा। इसके लिए वाहन स्वामी को अपना बैंक अकाउंट का पूरा विवरण भी बिल के साथ देना होगा।
व्यापारी हूं कैसे दे दूं गाड़ी
सरस्वती मंदिर सूरजकुंड निवासी प्रदीप कुमार पुत्र शिव कुमार वर्मा के पास उनकी गाड़ी अधिग्रहण होने का नोटिस आया है। प्रदीप कुमार ने बताया कि उनका छोटा सा व्यापार है और मां व पत्नी बीमार रहती है। गाड़ी पर कोई ड्राइवर नहीं है। इसी गाड़ी से मां और पत्नी को बीमारी की हालत में चिकित्सक को दिखाकर लाता हूं और व्यापारिक गतिविधियां भी करता हूं। ऐसे में चार दिन के लिए व्यापार बंद कर गाड़ी कैसे दे दूं।
खास बात
जिलाधिकारी की तरफ से जारी होने लगे निजी वाहन मालिकों को नोटिस
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मेरठ।
विधानसभा चुनाव 2017 में पहली बार निजी वाहनों का अधिग्रहण हुआ था। जिसका जमकर विरोध भी हुआ, लेकिन निजी तौर पर कोर्ट जाने वाले वाहन मालिकों को छोड़ बाकी किसी को राहत नहीं मिली। अब नगर निकाय चुनाव में भी जिला प्रशासन की नजर निजी वाहनों पर टिक गई है। इसके लिए नोटिस जारी होना शुरू हो गए हैं।
चुनाव में मजिस्ट्रेटों के साथ ही उनके साथ भेजे जाने वाली फोर्स के लिए छोटे वाहनों की जरूरत होती है। पोलिंग पार्टियां और मतदान केंद्र पर तैनात पुलिस बल तो बसों के द्वारा जाता है। लेकिन मजिस्ट्रेट और पेट्रोलिंग करने वाली फोर्स बोलेरो, सफारी, इनोवा, इको, मारुती वैन जैसे मध्यम आकार के वाहनों से चलती हैं। विधानसभा चुनाव से पहले तक जिला प्रशासन सरकारी वाहनों के साथ ही टैक्सी में पंजीकृत वाहनों का इसके लिए प्रयोग करता था। लेकिन पहली बार विधानसभा चुनाव 2017 में निजी वाहनों का अधिग्रहण शुरू हुआ।
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इस बार भी जिलाधिकारी समीर वर्मा की तरफ से निजी वाहन मालिकों को नोटिस जाना शुरू हो गया है। इस नोटिस में वाहन को 19 नवंबर की सुबह 10 बजे तक पुलिस लाइन मेरठ में पहुंचाने के लिए कहा गया है।
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ये है वाहन अधिग्रहण की शर्त
नोटिस में बताया गया है कि वाहन के लिए पेट्रोल या डीजल का व्यय भाड़ेदार (जो अधिग्रहण कर रहा है) के द्वारा होगा। जबकि गाड़ी की मरम्मत आदि वाहन मालिक खुद कराकर रखेगा, यदि वाहन में कोई क्षति होती है तो उसकी सूचना भाड़ेदार को देगा। इसके साथ ही वाहन मालिक अपनी तरफ से ड्राइवर उपलब्ध करायेगा। यदि ड्राइवर अच्छा नहीं है और उसमें बैठने वाला व्यक्ति शिकायत करता है तो वाहन मालिक को ड्राइवर बदलकर देना होगा।
शासन से आया तो मिलेगा पैसा
नोटिस में वाहन स्वामी को प्रतिकर (किराया) के भुगतान का भी जिक्र किया गया है। जिसमें कहा गया है कि जब गाड़ी वाहन स्वामी वापस लेकर जायेगा तो वह बिल प्रभारी अधिकारी (परिवहन) को देगा। इसके बाद शासन से पैसा आने के बाद धन आवंटित किया जायेगा। इसके लिए वाहन स्वामी को अपना बैंक अकाउंट का पूरा विवरण भी बिल के साथ देना होगा।
व्यापारी हूं कैसे दे दूं गाड़ी
सरस्वती मंदिर सूरजकुंड निवासी प्रदीप कुमार पुत्र शिव कुमार वर्मा के पास उनकी गाड़ी अधिग्रहण होने का नोटिस आया है। प्रदीप कुमार ने बताया कि उनका छोटा सा व्यापार है और मां व पत्नी बीमार रहती है। गाड़ी पर कोई ड्राइवर नहीं है। इसी गाड़ी से मां और पत्नी को बीमारी की हालत में चिकित्सक को दिखाकर लाता हूं और व्यापारिक गतिविधियां भी करता हूं। ऐसे में चार दिन के लिए व्यापार बंद कर गाड़ी कैसे दे दूं।
खास बात
जिलाधिकारी की तरफ से जारी होने लगे निजी वाहन मालिकों को नोटिस