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पुलिस का खेल, अवैध हिरासत और झूठी कहानी
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पुलिस का खेल, अवैध हिरासत और झूठी कहानी
मेरठ। मेडिकल पुलिस के शर्मनाक खेल से एक परिवार पांच दिन से तनाव में है। एक्सीडेंट में घायल युवक के संग अनहोनी बताकर पुलिस ने एक युवक को पांच दिन तक अवैध तरीके से हिरासत में रखा। पोल खुलने के बाद भी पुलिस ने 15 सौ रुपये वसूल कर उसको छोड़ा। इसकी शिकायत करने पर एसएसपी ने एसओ से जवाब तलब किया।
पुलिस के मुताबिक कानपुर निवासी विनोद अपने परिवार के साथ मेडिकल क्षेत्र में कुटी चौराहे पर रहता है। होली के दिन विनोद, दोस्त विशाल व एक अन्य युवक के साथ बाइक से गंगानगर होली खेलने गया था। गंगानगर में डिवाइडर रोड पर डॉ. नीरज के घर के बाहर खड़ी कार से उनकी बाइक टकरा गई। हादसे में तीनों को चोट लगी। विशाल ज्यादा घायल था। विनोद ने गंगानगर के देवानंद अस्पताल में उपचार कराया और घर पहुंचा दिया। इसके बाद परिजन विशाल को मेडिकल कॉलेज ले गए।
विनोद का कहना है कि सोमवार को उसे मेडिकल पुलिस ने बुलाकर हिरासत में ले लिया और हवालात में डाल दिया। आरोप है कि उसने गंगानगर में एक्सीडेंट की बात बताई। इसके बाद भी मेडिकल पुलिस ने हिरासत में रखा। विनोद के परिजन मेडिकल थाने पहुंचे तो एसओ मेडिकल ने घायल युवक के साथ अनहोनी की बात कह दी। शुक्रवार तक पुलिस ने विनोद को जेल नहीं भेजा। इसकी शिकायत विनोद के परिजनों ने एसएसपी से की। घायल युवक के ठीकठाक होने का पता चलने पर विनोद के परिजन भड़क गए। उन्होंने मेडिकल थाने में हंगामा किया। किरकिरी होने पर मेडिकल पुलिस ने 15 सौ रुपये लेकर विनोद को छोड़ा। एसएसपी ने मामले में जांच बैठा दी है।
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फिर चर्चा में एसओ मेडिकल
शुक्रवार को मामला एसएसपी तक पहुंचा। इसके बावजूद मेडिकल पुलिस ने विनोद से 15 सौ रुपये वसूले। तब जाकर छोड़ा। इससे पहले भी एसओ मेडिकल ने आचार संहिता का उल्लंघन किया। एसओ ने अपने फेसबुक डीपी पर मैं भी चौकीदार हूं स्लोगन लिखा था। एसओ मेडिकल कैलाशचंद ने बताया कि घायल युवक के साथ अनहोनी की बात मैंने नहीं कही। एक्सीडेंट करने वाले युवक को पुलिस ने पकड़ा था।
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मेरठ। मेडिकल पुलिस के शर्मनाक खेल से एक परिवार पांच दिन से तनाव में है। एक्सीडेंट में घायल युवक के संग अनहोनी बताकर पुलिस ने एक युवक को पांच दिन तक अवैध तरीके से हिरासत में रखा। पोल खुलने के बाद भी पुलिस ने 15 सौ रुपये वसूल कर उसको छोड़ा। इसकी शिकायत करने पर एसएसपी ने एसओ से जवाब तलब किया।
पुलिस के मुताबिक कानपुर निवासी विनोद अपने परिवार के साथ मेडिकल क्षेत्र में कुटी चौराहे पर रहता है। होली के दिन विनोद, दोस्त विशाल व एक अन्य युवक के साथ बाइक से गंगानगर होली खेलने गया था। गंगानगर में डिवाइडर रोड पर डॉ. नीरज के घर के बाहर खड़ी कार से उनकी बाइक टकरा गई। हादसे में तीनों को चोट लगी। विशाल ज्यादा घायल था। विनोद ने गंगानगर के देवानंद अस्पताल में उपचार कराया और घर पहुंचा दिया। इसके बाद परिजन विशाल को मेडिकल कॉलेज ले गए।
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विनोद का कहना है कि सोमवार को उसे मेडिकल पुलिस ने बुलाकर हिरासत में ले लिया और हवालात में डाल दिया। आरोप है कि उसने गंगानगर में एक्सीडेंट की बात बताई। इसके बाद भी मेडिकल पुलिस ने हिरासत में रखा। विनोद के परिजन मेडिकल थाने पहुंचे तो एसओ मेडिकल ने घायल युवक के साथ अनहोनी की बात कह दी। शुक्रवार तक पुलिस ने विनोद को जेल नहीं भेजा। इसकी शिकायत विनोद के परिजनों ने एसएसपी से की। घायल युवक के ठीकठाक होने का पता चलने पर विनोद के परिजन भड़क गए। उन्होंने मेडिकल थाने में हंगामा किया। किरकिरी होने पर मेडिकल पुलिस ने 15 सौ रुपये लेकर विनोद को छोड़ा। एसएसपी ने मामले में जांच बैठा दी है।
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फिर चर्चा में एसओ मेडिकल
शुक्रवार को मामला एसएसपी तक पहुंचा। इसके बावजूद मेडिकल पुलिस ने विनोद से 15 सौ रुपये वसूले। तब जाकर छोड़ा। इससे पहले भी एसओ मेडिकल ने आचार संहिता का उल्लंघन किया। एसओ ने अपने फेसबुक डीपी पर मैं भी चौकीदार हूं स्लोगन लिखा था। एसओ मेडिकल कैलाशचंद ने बताया कि घायल युवक के साथ अनहोनी की बात मैंने नहीं कही। एक्सीडेंट करने वाले युवक को पुलिस ने पकड़ा था।