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दलित समाज को दे भाजपा तरजीह: गोपाल काली
Updated Wed, 04 Apr 2018 01:40 AM IST
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दलित समाज को तरजीह दे भाजपा: गोपाल काली
मेरठ। हस्तिनापुर से भाजपा के पूर्व विधायक गोपाल काली ने सोमवार को हुए दलित हिंसक विरोध पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने दलितों के साथ होने वाले दोयम दर्जे के व्यवहार को इस गुस्से का कारण बताया है तो हिंसा के लिए दलित नहीं बल्कि बाहरी लोगों को जिम्मेदार बताया है। ऐसे में दलितों के आक्रोश को समाप्त करने और भाजपा के साथ जोड़ने के लिए दलित समाज के नेताओं को तरजीह देने का सुझाव पत्र में दिया है।
गोपाल काली ने पत्र में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भारत बंद आंदोलन में जो घटनाएं घटित हुई, वो बेहद अफसोस जनक है। क्योंकि दलित समाज ऐसे महापुरूषों का अनुयायी है जिसने अंहिसा को परम धर्म बताया है। लेकिन यह भी सत्य है कि दलित समाज को आज भी बराबरी का दर्जा नहीं मिला है। आज भी पुराने इतिहास की तरह दलितों का शोषण और अपमान होता है। इसकी घटनाएं लगातार मीडिया में आती रहती हैं। उन्होंने कहा कि वह खुद इसके शिकार हैं, क्योंकि पार्टी में उन्हें खुद दोयम दर्जे का व्यक्ति माना जाता है। यदि दलितों के बीच की दूरी को पाटना है और उनके बीच घुसपैठ बनानी है तो इस दूरी को मिटाना होगा। इसके साथ ही इस आंदोलन में हुई हिंसा के बाद जो गिरफ्तारी हुई हैं, उसकी उच्च स्तरीय जांच के बाद कार्रवाई की जाए। क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में वो युवक पकड़े गए हैं, जो शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे और निर्दोष हैं। जबकि इस आंदोलन को हिंसात्मक बनाने का काम बाहरी लोगों ने किया है।
खास बातें:
भाजपा के पूर्व विधायक ने लिखा प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र
आंदोलन में पकड़े गए बेगुनाह दलितों को कार्रवाई से बचाने की रखी मांग
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मेरठ। हस्तिनापुर से भाजपा के पूर्व विधायक गोपाल काली ने सोमवार को हुए दलित हिंसक विरोध पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने दलितों के साथ होने वाले दोयम दर्जे के व्यवहार को इस गुस्से का कारण बताया है तो हिंसा के लिए दलित नहीं बल्कि बाहरी लोगों को जिम्मेदार बताया है। ऐसे में दलितों के आक्रोश को समाप्त करने और भाजपा के साथ जोड़ने के लिए दलित समाज के नेताओं को तरजीह देने का सुझाव पत्र में दिया है।
गोपाल काली ने पत्र में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भारत बंद आंदोलन में जो घटनाएं घटित हुई, वो बेहद अफसोस जनक है। क्योंकि दलित समाज ऐसे महापुरूषों का अनुयायी है जिसने अंहिसा को परम धर्म बताया है। लेकिन यह भी सत्य है कि दलित समाज को आज भी बराबरी का दर्जा नहीं मिला है। आज भी पुराने इतिहास की तरह दलितों का शोषण और अपमान होता है। इसकी घटनाएं लगातार मीडिया में आती रहती हैं। उन्होंने कहा कि वह खुद इसके शिकार हैं, क्योंकि पार्टी में उन्हें खुद दोयम दर्जे का व्यक्ति माना जाता है। यदि दलितों के बीच की दूरी को पाटना है और उनके बीच घुसपैठ बनानी है तो इस दूरी को मिटाना होगा। इसके साथ ही इस आंदोलन में हुई हिंसा के बाद जो गिरफ्तारी हुई हैं, उसकी उच्च स्तरीय जांच के बाद कार्रवाई की जाए। क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में वो युवक पकड़े गए हैं, जो शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे और निर्दोष हैं। जबकि इस आंदोलन को हिंसात्मक बनाने का काम बाहरी लोगों ने किया है।
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खास बातें:
भाजपा के पूर्व विधायक ने लिखा प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र
आंदोलन में पकड़े गए बेगुनाह दलितों को कार्रवाई से बचाने की रखी मांग