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नेटवर्क बगैर मशीनों में फंस रहा राशन वितरण
Updated Fri, 07 Jul 2017 08:43 PM IST
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फोटो समाचार-------
मशीनों में फंसा गरीबों का राशन
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
सरकारी सस्ते गल्ले की कालाबाजारी रोकने के लिए शुरू की गई ई-पॉश मशीन व्यवस्था तीसरे दिन ही डगमगा गई। नेटवर्क न मिलने के कारण राशन की डिलीवरी मशीनों में फंसकर रह गयी है। इसके चलते राशन की दुकानों पर कार्ड धारकों की लम्बी लाइनें लगनी शुरू हो गयी हैं। लचर व्यवस्था में राशन डीलरों को पसीना छूट रहा है, वहीं जनता परेशान हो रही है।
जिलापूर्ति विभाग ने राशन वितरण व्यवस्था सुधारने के लिए कोटेदारों को ई-पॉश मशीनें बांटी हैं। तीन दिन से शहर की सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर मशीनों के माध्यम से राशन वितरण हो रहा है। राशन की कालाबाजारी रोकने में तो मशीन सही साबित हो रही है, लेकिन फोर जी नेटवर्क न मिलने से मशीनें चल नहीं पा रही हैं। शुक्रवार को अमर उजाला टीम ने शहर में राशन वितरण व्यवस्था का जायजा लिया। टीम ने नगर निगम के बाहर सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान पर लंबी लाइनों में लगी महिलाओं से बात की। सामने बैठे राशन विक्रेता हाजी मैराज मशीन में नेटवर्क आने का इंतजार कर रहे थे।
तीन दिन में 182 को मिला राशन
हाजी मैराज की माने तो वह तीन दिन से लगातार राशन वितरण कर रहे हैं। लेकिन मशीन में नेटवर्क न होने के कारण 182 कार्ड धारकों को ही राशन बंट पाया है। जबकि दुकान पर 595 कार्डधारक हैं। लाइन में लगी महिला शकीला बेगम, शाइस्ता, शबनम आदि ने बताया कि वह सुबह आठ बजे से लाइन में लगे हैं। मशीन से पर्ची ही नहीं निकल रही है। बच्चों को अकेला छोड़कर घर से आए। दोपहर एक बज गया है। अभी तक तो मशीन से हमारे नाम की पर्ची निकली नहीं। इससे तो पहले ही व्यवस्था अच्छी थी। अधिक से अधिक 20 मिनट दुकान पर खड़े होना पड़ता था। सभी को राशन भी मिलता था।
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प्रमुख बातें ===
ई-पॉश मशीनों में नेटवर्क नहीं आने से चरमराई खाद्य वितरण व्यवस्था
कोटे पर लगी लाइनें, एक दिन में बंट पा रहा है 60 परिवारों को राशन
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मशीनों में फंसा गरीबों का राशन
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
सरकारी सस्ते गल्ले की कालाबाजारी रोकने के लिए शुरू की गई ई-पॉश मशीन व्यवस्था तीसरे दिन ही डगमगा गई। नेटवर्क न मिलने के कारण राशन की डिलीवरी मशीनों में फंसकर रह गयी है। इसके चलते राशन की दुकानों पर कार्ड धारकों की लम्बी लाइनें लगनी शुरू हो गयी हैं। लचर व्यवस्था में राशन डीलरों को पसीना छूट रहा है, वहीं जनता परेशान हो रही है।
जिलापूर्ति विभाग ने राशन वितरण व्यवस्था सुधारने के लिए कोटेदारों को ई-पॉश मशीनें बांटी हैं। तीन दिन से शहर की सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर मशीनों के माध्यम से राशन वितरण हो रहा है। राशन की कालाबाजारी रोकने में तो मशीन सही साबित हो रही है, लेकिन फोर जी नेटवर्क न मिलने से मशीनें चल नहीं पा रही हैं। शुक्रवार को अमर उजाला टीम ने शहर में राशन वितरण व्यवस्था का जायजा लिया। टीम ने नगर निगम के बाहर सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान पर लंबी लाइनों में लगी महिलाओं से बात की। सामने बैठे राशन विक्रेता हाजी मैराज मशीन में नेटवर्क आने का इंतजार कर रहे थे।
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तीन दिन में 182 को मिला राशन
हाजी मैराज की माने तो वह तीन दिन से लगातार राशन वितरण कर रहे हैं। लेकिन मशीन में नेटवर्क न होने के कारण 182 कार्ड धारकों को ही राशन बंट पाया है। जबकि दुकान पर 595 कार्डधारक हैं। लाइन में लगी महिला शकीला बेगम, शाइस्ता, शबनम आदि ने बताया कि वह सुबह आठ बजे से लाइन में लगे हैं। मशीन से पर्ची ही नहीं निकल रही है। बच्चों को अकेला छोड़कर घर से आए। दोपहर एक बज गया है। अभी तक तो मशीन से हमारे नाम की पर्ची निकली नहीं। इससे तो पहले ही व्यवस्था अच्छी थी। अधिक से अधिक 20 मिनट दुकान पर खड़े होना पड़ता था। सभी को राशन भी मिलता था।
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प्रमुख बातें ===
ई-पॉश मशीनों में नेटवर्क नहीं आने से चरमराई खाद्य वितरण व्यवस्था
कोटे पर लगी लाइनें, एक दिन में बंट पा रहा है 60 परिवारों को राशन