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ुले में शौच मुक्त योजना को लग रहा है चूना
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खरखौदा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पूरा जिला शौच हो गया है। हालांकि गांवों में प्रत्येक परिवार के पास शौचालय नहीं हैं। वहीं, हापुड़ रोड स्थित करीब दो दर्जन ढाबे भी इस योजना को पलीता लगा रहे हैं। इन पर प्रतिदिन आने वालेे सैकड़ों ग्राहकों के लिए शौचालयों की व्यवस्था नहीं है। ये खुले में शौच के लिए जाते हैं।
केंद्र सरकार ने देश को खुले में शौच मुक्त करने के लिए शुरूआत गांव से की है। पिछले चार वर्षों से इस योजना पर जोरों से काम चल रहा है। इसमें डीएम समेत सभी सरकारी अधिकारी जुडे़ हैं। अधिकारियों की टीम गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रही है। असक्षम लोगों के यहां सरकारी मदद से शौचालय बनाए गए। अधिकारी वर्ष 2011 के आंकड़ों के अनुसार जिला मेरठ को खुले में शौच मुक्त कर दिया। वहीं, हापुड़ रोड पर धीरखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र से लेकर मेरठ में शास्त्रीनगर चुंगी तक दो दर्जन ढाबे हैं। इन पर प्रतिदिन सैकड़ों ग्राहक आते हैं। यहां एक-दो को छोड़कर किसी भी ढाबे पर शौचालय नहीं हैं। इसलिए ग्राहक खुले में शौच जाते हैं। इससे वातावरण दुर्गंधयुक्त रहता है। 2011 की जनगणना के अनुसार प्रत्येक परिवार के पास शौचालय है। इसके बाद गांवों में परिवारों की संख्या बढ़ गई है। जिसके तहत अब भी 10 फीसदी परिवारों के पास शौचालय नहीं हैं। इसलिए वे खुले में शौच जाते हैं।
प्रत्येक वर्ष क्षेत्र में परिवार बढ़ जाते हैं। जिस कारण डिमांड भी बढ़ती है।-मनोज कुमार, एडीओ पंचायत खरखौदा
वर्ष 2011 के अनुसार पात्रों के शौचालय बनवा दिए हैं। अब जैसे-जैसे परिवार बढे़ंगे तो डिमांड भी बढे़गी। इसलिए दोबारा जांच कराई जानी चाहिए। वहीं, रोड किनारे जो ढाबे हैं वे खाद्य सुरक्षा विभाग के पास आते हैं। इसी स्तर से कार्रवाई की जानी चाहिए।-संदीप कुमार, कार्यवाहक डीपीआरओ मेरठ
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केंद्र सरकार ने देश को खुले में शौच मुक्त करने के लिए शुरूआत गांव से की है। पिछले चार वर्षों से इस योजना पर जोरों से काम चल रहा है। इसमें डीएम समेत सभी सरकारी अधिकारी जुडे़ हैं। अधिकारियों की टीम गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रही है। असक्षम लोगों के यहां सरकारी मदद से शौचालय बनाए गए। अधिकारी वर्ष 2011 के आंकड़ों के अनुसार जिला मेरठ को खुले में शौच मुक्त कर दिया। वहीं, हापुड़ रोड पर धीरखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र से लेकर मेरठ में शास्त्रीनगर चुंगी तक दो दर्जन ढाबे हैं। इन पर प्रतिदिन सैकड़ों ग्राहक आते हैं। यहां एक-दो को छोड़कर किसी भी ढाबे पर शौचालय नहीं हैं। इसलिए ग्राहक खुले में शौच जाते हैं। इससे वातावरण दुर्गंधयुक्त रहता है। 2011 की जनगणना के अनुसार प्रत्येक परिवार के पास शौचालय है। इसके बाद गांवों में परिवारों की संख्या बढ़ गई है। जिसके तहत अब भी 10 फीसदी परिवारों के पास शौचालय नहीं हैं। इसलिए वे खुले में शौच जाते हैं।
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प्रत्येक वर्ष क्षेत्र में परिवार बढ़ जाते हैं। जिस कारण डिमांड भी बढ़ती है।-मनोज कुमार, एडीओ पंचायत खरखौदा
वर्ष 2011 के अनुसार पात्रों के शौचालय बनवा दिए हैं। अब जैसे-जैसे परिवार बढे़ंगे तो डिमांड भी बढे़गी। इसलिए दोबारा जांच कराई जानी चाहिए। वहीं, रोड किनारे जो ढाबे हैं वे खाद्य सुरक्षा विभाग के पास आते हैं। इसी स्तर से कार्रवाई की जानी चाहिए।-संदीप कुमार, कार्यवाहक डीपीआरओ मेरठ
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