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रावण के पुतले बनाता है अनीस का परिवार
Updated Wed, 10 Oct 2018 01:17 AM IST
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खेकड़ा (बागपत)। खेकड़ा और आसपास के नगरों में रामलीला में दहन करने के लिए दशानन (रावण) और उसके परिवार के पुतले को खेकड़ा के अनीस का परिवार ही स्वरूप देता है। खास बात यह है कि पुतले में भले ही अन्य कलाकारों का सहयोग लिया जाता है, लेकिन रावण के मुकुट और उसके दस सिर का निर्माण और पुतले की रामलीला मैदान में स्थापना अनीस या फिर उनके बेटे करते हैं। कहा जाता है कि लंकापति रावण दस सिर वाला था। हम सभी पौराणिक ग्रंथों के माध्यम से उसकी कल्पना करते हैं, लेकिन उस कल्पना को कुछ लोग मूर्ति या पुतले के रूप में आकार दे देते हैं। उन्हीं में से एक है खेकड़ा का यह मुस्लिम परिवार।
ईदगाह के पास नई बस्ती निवासी अनीस ने अपने पिता हनीफ से यह हुनर सीखा था। अनीस आतिशबाज के बेटे इरफान और इमरान बताते हैं कि उनके पूर्वज रावण परिवार के पुतले सदियों से बना रहे हैं। इसमें महिलाओं व बच्चों का सहयोग बिल्कुल नहीं लिया। इरफान ने बताया कि पुतला बनाने का कार्य श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद शुरू हो जाता है। इसके लिए कलाकार ढूंढना मुश्किल होता है, इसलिए पुरानी टीम ही कार्य करती है। नए लोगों को सहयोग में रखा जाता है। रावण और उसके परिवार के पुतले बनाने के बागपत, खेकड़ा, गाजियाबाद व अन्य जगहों से आर्डर आते हैं। कलाकारों की कमी के कारण अधिक आर्डर नहीं ले पाते हैं।
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ईदगाह के पास नई बस्ती निवासी अनीस ने अपने पिता हनीफ से यह हुनर सीखा था। अनीस आतिशबाज के बेटे इरफान और इमरान बताते हैं कि उनके पूर्वज रावण परिवार के पुतले सदियों से बना रहे हैं। इसमें महिलाओं व बच्चों का सहयोग बिल्कुल नहीं लिया। इरफान ने बताया कि पुतला बनाने का कार्य श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद शुरू हो जाता है। इसके लिए कलाकार ढूंढना मुश्किल होता है, इसलिए पुरानी टीम ही कार्य करती है। नए लोगों को सहयोग में रखा जाता है। रावण और उसके परिवार के पुतले बनाने के बागपत, खेकड़ा, गाजियाबाद व अन्य जगहों से आर्डर आते हैं। कलाकारों की कमी के कारण अधिक आर्डर नहीं ले पाते हैं।
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