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300 रुपये की रि
Updated Wed, 06 Dec 2017 02:17 AM IST
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300 रुपये रिश्वत और फर्जीवाड़े में सजा, कई गुना जुर्माना
मेरठ। 17 साल पहले फर्जी अभिलेख तैयार करके सरकारी धन का भुगतान दर्शाने के तीन आरोपियों को स्पेशल जज (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) विनय कुमार द्विवेदी ने दोषी पाते हुए सात-सात साल का कारावास और 40-40 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 10 अप्रैल 2000 को रोजन सिंह पुत्र तालेवर सिंह संग्रह अमीन आगरा ने शिकायत की थी कि राजकुमार गुप्ता उसके पैसे के भुगतान के लिये रिश्वत मांग रहा है। रिश्वत के आरोप में राजकुमार गुप्ता को 300 रुपये रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी मुन्ना लाल व शंकर सिंह के साथ आपस में साज करके वेतन भुगतान रजिस्टर में रोजन सिंह की पूर्व हस्तांतरित रसीदों पर टिकट चिपकाकर उस पर 4.4.2000 की तिथि लिख दी गई। जिसकी गवाही शंकर सिंह व मुन्नालाल ने दी थी।
इस मामले की शिकायत होने पर जांच के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। जिसमें फर्जी अभिलेख तैयार करके रोजन सिंह की शिकायत एवं रिश्वत में पकड़े जाने की कार्यवाही से पूर्व ही पहली तिथि में ही फर्जी भुगतान करना दर्शा दिया गया। जिस पर मामले की सुनवाई स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम विनय कुमार द्विवेदी के न्यायालय में की गई। सरकारी वकील देवकी नंदन शर्मा ने कई गवाह पेश किए, जिनके बयानों के आधार पर राजकुमार गुप्ता, शंकर सिंह व मुन्ना लाल को दोषी पाते हुए सजा सुनाई गई।
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मेरठ। 17 साल पहले फर्जी अभिलेख तैयार करके सरकारी धन का भुगतान दर्शाने के तीन आरोपियों को स्पेशल जज (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) विनय कुमार द्विवेदी ने दोषी पाते हुए सात-सात साल का कारावास और 40-40 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 10 अप्रैल 2000 को रोजन सिंह पुत्र तालेवर सिंह संग्रह अमीन आगरा ने शिकायत की थी कि राजकुमार गुप्ता उसके पैसे के भुगतान के लिये रिश्वत मांग रहा है। रिश्वत के आरोप में राजकुमार गुप्ता को 300 रुपये रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी मुन्ना लाल व शंकर सिंह के साथ आपस में साज करके वेतन भुगतान रजिस्टर में रोजन सिंह की पूर्व हस्तांतरित रसीदों पर टिकट चिपकाकर उस पर 4.4.2000 की तिथि लिख दी गई। जिसकी गवाही शंकर सिंह व मुन्नालाल ने दी थी।
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इस मामले की शिकायत होने पर जांच के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। जिसमें फर्जी अभिलेख तैयार करके रोजन सिंह की शिकायत एवं रिश्वत में पकड़े जाने की कार्यवाही से पूर्व ही पहली तिथि में ही फर्जी भुगतान करना दर्शा दिया गया। जिस पर मामले की सुनवाई स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम विनय कुमार द्विवेदी के न्यायालय में की गई। सरकारी वकील देवकी नंदन शर्मा ने कई गवाह पेश किए, जिनके बयानों के आधार पर राजकुमार गुप्ता, शंकर सिंह व मुन्ना लाल को दोषी पाते हुए सजा सुनाई गई।
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