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बंद मिलें चलने से किसानों को मिलेगी संजीवनी

Fri, 08 Feb 2019 01:59 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 08 Feb 2019 01:59 AM IST
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बंद मिलें चलने से किसानों को मिलेगी संजीवनी
बंद पड़ी मिलें चलने से किसानों को मिलेगी संजीवनी
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गन्ने के बढ़ते रकबे से मिलों को पेराई करने में आ रही दिक्कत
मेरठ। प्रदेश सरकार ने अपने बजट में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास के लिए कई घोषणाएं की हैं। इसमें सरकारी क्षेत्र की बंद पड़ी शुगर मिलों को चलाने के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके अलावा सहकारी क्षेत्र की बंद पड़ी मिलों को पीपीपी मॉडल से संचालित कराने के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इन दोनों घोषणाओं से न केवल शुगर इंडस्ट्री को फायदा होगा, बल्कि गन्ना किसानों को भी राहत मिलेगी।

गन्ने का रकबा लगातार बढ़ने से वर्तमान में संचालित प्रदेश की 125 शुगर मिलों को गन्ना पेराई करने में पसीने छूट रहे हैं। अमूमन अप्रैल में ही बंद हो जाने वाली शुगर मिलें मई-जून तक गन्ने की पेराई कर रही हैं। इससे किसानों को गर्मी में गन्ना डालना पड़ रहा है। गन्ने के साथ ही अन्य फसलों की बुआई भी लेट हो रही है। सरकार ने इसके अलावा सहकारी मिलों का गन्ना मूल्य भुगतान कराने के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इससे मेरठ मंडल की तीन शुगर मिलों रमाला, अनूपशहर और बागपत मिल का बकाया भुगतान भी हो सकेगा। वर्तमान में बंपर चीनी स्टॉक की बिक्री नहीं होने से मिलों को गन्ना मूल्य भुगतान करने में दिक्कत हो रही है। वर्तमान पेराई सत्र में मंडल की चीनी मिलों पर किसानों का 1200 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया हो चुका है। प्रदेश की शुगर मिलों पर भी यह आंकड़ा 13000 करोड़ तक पहुंच गया है।
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