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गेंहू की पछेती बुवाई के लिए बीज न मिलने से किसान परेशान।
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किसानों को नहीं मिल रहा गेहूं की पछेती प्रजाति का बीज
- मिल से पर्चियां नहीं मिलने से समय पर खाली नहीं हो रहे गन्ने के खेत
माछरा। सरकार जहां किसानों को कम लागत में लाभ दोगुना करने को कह रही है परंतु किसानों को पछेती प्रजाति का गेंहू का बीज राजकीय बीज भंडार पर नहीं होने के कारण पुराना घर रखा या प्राइवेट दुकानों से खरीदकर बुवाई गेंहू की करनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि दिसंबर माह निकल गया है अब गेंहू की बुवाई का समय करीब पांच जनवरी तक का है।
दिसंबर माह बीत जाने के बाद जनवरी माह में पांच जनवरी तक ज्यादातर किसान पछेती गेहूं की बुवाई करते है परंतु सरकार राजकीय बीज भंडारों पर पछेती प्रजाति का बीज गेहूं का उपलब्ध नहीं करा पाई है। कृषक राजेंद्र कुमार, प्रदीप शर्मा, उत्तम, आदि का कहना है किसान को महंगे रेट पर प्राइवेट दुकानदारों से या फिर किसान के घर पर अपना ही रखा पुराना गेहूं के बीज से बुवाई करनी पड़ रही है। राजकीय कृषि बीज भंडार माछरा के इंचार्ज सोनपाल भारद्वाज ने बताया कि वह जिला कृषि अधिकारी की बैठक में गए थे वहां पर उन्होंने पछेती प्रजाति गेहूं के बीज मांगने की मांग रखी। परंतु उन्होंने बताया कि उन्हें गेंहू का बीज जो मिलता है वह बीज विकास निगम उत्तर प्रदेश सरकार या फिर नेशनल मीट कारपोरेशन से मिलता है। वहां से भी बीज नहीं मिला किसानों का कहना है कि महंगा गेहूं का पछेती प्रजाति का बीज प्राइवेट दुकान से कुछ किसान खरीद नहीं सकते है। इसलिए उन्होंने गेहूं के स्थान पर अन्य फसल बोने का निर्णय लिया है।
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- मिल से पर्चियां नहीं मिलने से समय पर खाली नहीं हो रहे गन्ने के खेत
माछरा। सरकार जहां किसानों को कम लागत में लाभ दोगुना करने को कह रही है परंतु किसानों को पछेती प्रजाति का गेंहू का बीज राजकीय बीज भंडार पर नहीं होने के कारण पुराना घर रखा या प्राइवेट दुकानों से खरीदकर बुवाई गेंहू की करनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि दिसंबर माह निकल गया है अब गेंहू की बुवाई का समय करीब पांच जनवरी तक का है।
दिसंबर माह बीत जाने के बाद जनवरी माह में पांच जनवरी तक ज्यादातर किसान पछेती गेहूं की बुवाई करते है परंतु सरकार राजकीय बीज भंडारों पर पछेती प्रजाति का बीज गेहूं का उपलब्ध नहीं करा पाई है। कृषक राजेंद्र कुमार, प्रदीप शर्मा, उत्तम, आदि का कहना है किसान को महंगे रेट पर प्राइवेट दुकानदारों से या फिर किसान के घर पर अपना ही रखा पुराना गेहूं के बीज से बुवाई करनी पड़ रही है। राजकीय कृषि बीज भंडार माछरा के इंचार्ज सोनपाल भारद्वाज ने बताया कि वह जिला कृषि अधिकारी की बैठक में गए थे वहां पर उन्होंने पछेती प्रजाति गेहूं के बीज मांगने की मांग रखी। परंतु उन्होंने बताया कि उन्हें गेंहू का बीज जो मिलता है वह बीज विकास निगम उत्तर प्रदेश सरकार या फिर नेशनल मीट कारपोरेशन से मिलता है। वहां से भी बीज नहीं मिला किसानों का कहना है कि महंगा गेहूं का पछेती प्रजाति का बीज प्राइवेट दुकान से कुछ किसान खरीद नहीं सकते है। इसलिए उन्होंने गेहूं के स्थान पर अन्य फसल बोने का निर्णय लिया है।
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