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आपके मोबाइल पर शहर के कोने-कोने का नक्शा
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मेरठ। अगर आप कहीं जा रहे हैं और आपको कोई घर या कोई स्थल ढूंढने में दिक्कत हो रही है तो इसके लिए डिजिटल मैप तैयार किया जा रहा है। मेरठ का भी डिजिटल मैप बनना शुरू हो गया है। इसका सर्वे कराया जा रहा है। इसके बाद मेरठ के एक-एक स्थान की जानकारी आपके मोबाइल पर होगी। अभी गूगल मैप के जरिए सिर्फ रास्ता ही दिखाई देता था, लेकिन अब मकान के पते के साथ वह किस गली में है उसकी जानकारी भी डिजिटल मैप के माध्यम से मिल जाएगी।
गुरुग्राम की कंपनी बना रही मैप
मैप फॉर इंडिया कंपनी की टीम मेरठ में सर्वे कर डिजिटल मैप तैयार कर रही है। शहर के शास्त्रीनगर, जाकिर कॉलोनी से इसकी शुरूआत कर दी गई है। शास्त्रीनगर के-ब्लॉक में सोमवार को सर्वे किया गया। टीम के सदस्य मैप को साथ लेकर मकानों के नंबर लिख रहे थे। जिसे सैटेलाइट के माध्यम से मैपिंग कर डिजिटल मैप तैयार कराया जाएगा।
पांच से छह महीने में तैयार होगा मैप
कंपनी से जुड़े सदस्यों ने बताया कि पूरे मेरठ में अभी कार्य करने में एक से दो महीने का वक्त लग जाएगा। इसके बाद सैटेलाइट के माध्यम से मैपिंग की जाएगी। यानि लगभग पांच से छह महीने के अंदर डिजिटल मैप तैयार होगा। मैप फॉर इंडिया के सदस्य मकानों के सर्वे के बाद इसे बेंगलुरु भेजेंगे। वहां सैटेलाइट से जोड़कर गूगल पर अपलोड कर दिया जाएगा।
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डिजिटल मैप के फायदे
1. डिजिटल मैप के बनने से शहर का विकास सुनियोजित तरीके से किया जा सकता है।
2. डिजिटल मैपिंग में शहरों के पार्क, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, स्टेडियम, अस्पताल के रास्ते भी आसानी से दिख जाते हैं।
3. इस मैप के जरिए यह भी जाना जा सकता है कि शहर का विकास किस इलाके में कितना हुआ है और वहां किन सुविधाओं की जरुरत है।
4. इसके माध्यम से शहरी की आबादी का आंकलन कर सुविधाएं उपलब्ध कराईं जाएंगी।
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मेरठ। अगर आप कहीं जा रहे हैं और आपको कोई घर या कोई स्थल ढूंढने में दिक्कत हो रही है तो इसके लिए डिजिटल मैप तैयार किया जा रहा है। मेरठ का भी डिजिटल मैप बनना शुरू हो गया है। इसका सर्वे कराया जा रहा है। इसके बाद मेरठ के एक-एक स्थान की जानकारी आपके मोबाइल पर होगी। अभी गूगल मैप के जरिए सिर्फ रास्ता ही दिखाई देता था, लेकिन अब मकान के पते के साथ वह किस गली में है उसकी जानकारी भी डिजिटल मैप के माध्यम से मिल जाएगी।
गुरुग्राम की कंपनी बना रही मैप
मैप फॉर इंडिया कंपनी की टीम मेरठ में सर्वे कर डिजिटल मैप तैयार कर रही है। शहर के शास्त्रीनगर, जाकिर कॉलोनी से इसकी शुरूआत कर दी गई है। शास्त्रीनगर के-ब्लॉक में सोमवार को सर्वे किया गया। टीम के सदस्य मैप को साथ लेकर मकानों के नंबर लिख रहे थे। जिसे सैटेलाइट के माध्यम से मैपिंग कर डिजिटल मैप तैयार कराया जाएगा।
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पांच से छह महीने में तैयार होगा मैप
कंपनी से जुड़े सदस्यों ने बताया कि पूरे मेरठ में अभी कार्य करने में एक से दो महीने का वक्त लग जाएगा। इसके बाद सैटेलाइट के माध्यम से मैपिंग की जाएगी। यानि लगभग पांच से छह महीने के अंदर डिजिटल मैप तैयार होगा। मैप फॉर इंडिया के सदस्य मकानों के सर्वे के बाद इसे बेंगलुरु भेजेंगे। वहां सैटेलाइट से जोड़कर गूगल पर अपलोड कर दिया जाएगा।
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डिजिटल मैप के फायदे
1. डिजिटल मैप के बनने से शहर का विकास सुनियोजित तरीके से किया जा सकता है।
2. डिजिटल मैपिंग में शहरों के पार्क, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, स्टेडियम, अस्पताल के रास्ते भी आसानी से दिख जाते हैं।
3. इस मैप के जरिए यह भी जाना जा सकता है कि शहर का विकास किस इलाके में कितना हुआ है और वहां किन सुविधाओं की जरुरत है।
4. इसके माध्यम से शहरी की आबादी का आंकलन कर सुविधाएं उपलब्ध कराईं जाएंगी।