विज्ञापन

रेश्म की खेती के लिए गांव गांव जाकर किसानों को जागरुक करेंगे अधिकारी

Meerut Bureau Updated Sat, 14 Jul 2018 02:28 AM IST
ख़बर सुनें
रेशम केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचे डायरेक्टर ने अधिकारियों को दिए निर्देश
विज्ञापन
विज्ञापन
निरीक्षण के दौरान केंद्र और बीजागार में मिली खामियां, लगाई फटकार
खपत 40 हजार मीट्रिक टन और उत्पादन मात्र नौ हजार मीट्रिक टन
अमर उजाला ब्यूरो
कंकरखेड़ा।
पूरे देश में प्रतिवर्ष लगभग 40 हजार मीट्रिक टन रेशम की खपत होती है। जबकि नौ हजार मीट्रिक टन ही रेशम का उत्पादन हो पाता है। अकेले उप्र में प्रतिवर्ष करीब 30 हजार मीट्रिक टन की खपत होती है और उत्पादन मात्र तीन हजार मीट्रिक टन। ऐसे में रेशम विभाग इसका उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों के लिए कई योजनाएं ला रहा है। इसके तहत प्रत्येक केंद्र के अधिकारी गांवों में जाकर कैंप लगाएंगे और किसानों को रेशम की ख्ेाती के लिए जागरूक करेंगे।
शुक्रवार को रेशम विभाग के डायरेक्टर नरेंद्र सिंह पटेल ने कंकरखेड़ा सरधना रोड स्थित राजकीय रेशम कार्यालय का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि दिनोंदिन देश और प्रदेश में रेशम की खपत बढ़ रही है। लेकिन उसके सापेक्ष उत्पादन बहुत कम है। इसका सबसे बड़ा कारण किसान इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं। जबकि यह गेहूं और धान की खेती से ज्यादा फायदेमंद है। उन्होंने बताया कि प्रति एकड़ जमीन में रेशम की खेती करने के लिए सरकार किसान को 30 हजार रुपये देती है। एक एकड़ जमीन में करीब 250 से 300 किलोग्राम रेशम का उत्पादन होता है। जो करीब 300-350 प्रति किलो के हिसाब से बिकता है। अन्य खर्चों को निकाल भी दें तो कम से कम 75 हजार रुपये एक फसल में पैदा कर सकता है। करीब तीन लाख रुपये साल में एक एकड़ जमीन में खेती करके कमा सकता है। इस फसल के नष्ट होने या बीमारियां लगने का भी खतरा बहुत कम होता है।
मात्र 30 दिन की मेहनत
डायरेक्टर नरेन्द्र सिंह पटेल ने बताया कि रेशम की खेती का खेल मात्र 30 दिन का होता है। उसमें भी 12 दिन के बाद कीड़ा तैयार करके रेशम विभाग किसान को देता है। उसके बाद मात्र 18 दिन ही किसान को देखरेख करनी पड़ती है। एक माह में कीड़ा ककॉन यानि कोया बनाकर तैयार कर देता है। उसके तीन माह बाद फिर से फसल की तैयारी कर सकता है। साल में तीन फसल किसान ले सकता है। बंगलुरू में साल में 8-10 तक फसल किसान तैयार कर लेते हैं।

अधिकारियों को दिए निर्देश
डायरेक्टर ने कार्यालय का निरीक्षण करने के दौरान खिर्वा रोड स्थित राजकीय बीजागार का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण में कई खामियां मिली। इसके चलते उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई। साथ ही खामियों को खत्म करने के निर्देश दिए। बीजागार में बीज का रखरखाव सही नहीं मिला। तैयार हो रही फसलों की हालत कुछ ज्यादा ठीक नहीं मिली।

रीलिंग व टुवीस्टिंग मशीन भी उपलब्ध
डायरेक्टर ने बताया कि पहले कॉकन से रेशम का धागा निकालने के लिए रीलिंग व टुवीस्टिंग मशीन केवल कानपुर और बनारस में ही थी। अब पीलीभीत व बहराइच में भी दो मशीनें लगाई गई हैं। एक मशीन की कीमत 15 से 20 लाख होती है। रेशम उत्पादन के लिए मेरठ में 5, सहारनपुर में 11 और बिजनौर में 4 केंद्र हैं।

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

Meerut

यूपी पुलिस भर्ती में दिल्ली पुलिस के सिपाही ने दी भाई के बदले परीक्षा, आरोपी अभ्यर्थी गिरफ्तार

भाई को भर्ती कराने के लिए दिल्ली पुलिस के सिपाही ने यूपी पुलिस की लिखित परीक्षा दे दी।

11 दिसंबर 2018

विज्ञापन

VIDEO: यूपी एसटीएफ को सौंपा गया आर्मी का जवान जितेंद्र

बुलंदशहर हिंसा में आरोपी जवान जितेंद्र को सेना ने यूपी एसटीएफ के हवाले कर दिया है। मेरठ रेंज के आईजी राम कुमार ने बताया कि पूछताछ के बाद हिंसा में जितेंद्र की भूमिका तय होगी।

9 दिसंबर 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Election