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प्रमुख सचिव और एडीजी के कोर्ट में बयान दर्ज
Updated Wed, 20 Sep 2017 02:47 AM IST
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मेरठ। मथुरा में 5 हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोपी सिपाही उमेश कुमार पर मुकदमा चलाने की अनुमति देने के मामले में मथुरा के पूर्व एसएसपी एवं वर्तमान में उत्तराखंड के एडीजी (कानून व्यवस्था) अशोक कुमार ने मंगलवार को स्पेशल जज (भ्रष्टाचार निवारण) पीके श्रीवास्तव की कोर्ट में बयान दर्ज कराए।
मामला वर्ष 2000 का है। शिकायत कर्ता नसरुद्दीन ने दरोगा राम खिलावन और क्राइम ब्रांच के चार सिपाहियों पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। जिस पर विजिलेंस टीम ने गिरफ्तारी की थी। सिपाही उमेश घर के बाहर खड़ा था, जिसे विवेचनाधिकारी ने आरोपी पाते हुए मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी थी।
वहीं, आगरा के सरकार बनाम अमृत सिंह के मामले में आरोपी लिपिक मक्खन लाल के विरुद्ध मुकदमा चलाने की अनुमति देने के मामले में प्रमुख सचिव सहायतित परियोजना डिंपल वर्मा ने कोर्ट में बयान दर्ज कराए। उन्होंने बताया कि वह बुलंदशहर में डीएम के पद पर कार्यरत थीं। तब उनके सामने भ्रष्टाचार निवारण संगठन के मुकदमे विवेचक द्वारा लिपिक मक्खन लाल जो विशेष भूमि अध्यापति अधिकारी आगरा के यहां कार्यरत था, उसने लोक सेवक के पद पर रहते हुए भर्ती में नोटशीट तैयार कर नियुक्ति के लिए एसएलओ को प्रस्तुत किया था। जो नियुक्ति नियमावलियों के अनुसार अवैधानिक पायी गई थी। जिस पर उन्होंने मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। दोनों अफसरों के बयान सरकारी वकील देवकी नंदन शर्मा ने दर्ज कराए।
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मामला वर्ष 2000 का है। शिकायत कर्ता नसरुद्दीन ने दरोगा राम खिलावन और क्राइम ब्रांच के चार सिपाहियों पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। जिस पर विजिलेंस टीम ने गिरफ्तारी की थी। सिपाही उमेश घर के बाहर खड़ा था, जिसे विवेचनाधिकारी ने आरोपी पाते हुए मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी थी।
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वहीं, आगरा के सरकार बनाम अमृत सिंह के मामले में आरोपी लिपिक मक्खन लाल के विरुद्ध मुकदमा चलाने की अनुमति देने के मामले में प्रमुख सचिव सहायतित परियोजना डिंपल वर्मा ने कोर्ट में बयान दर्ज कराए। उन्होंने बताया कि वह बुलंदशहर में डीएम के पद पर कार्यरत थीं। तब उनके सामने भ्रष्टाचार निवारण संगठन के मुकदमे विवेचक द्वारा लिपिक मक्खन लाल जो विशेष भूमि अध्यापति अधिकारी आगरा के यहां कार्यरत था, उसने लोक सेवक के पद पर रहते हुए भर्ती में नोटशीट तैयार कर नियुक्ति के लिए एसएलओ को प्रस्तुत किया था। जो नियुक्ति नियमावलियों के अनुसार अवैधानिक पायी गई थी। जिस पर उन्होंने मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। दोनों अफसरों के बयान सरकारी वकील देवकी नंदन शर्मा ने दर्ज कराए।
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