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शूटर दादी ने एसपी को बताई सफलता की कहानी

Fri, 17 May 2019 01:59 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 17 May 2019 01:59 AM IST
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शूटर दादी ने एसपी को बताई सफलता की कहानी
शूटर दादी ने एसपी को बताई सफलता की कहानी
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बेटी और दामाद के साथ एसएसपी ऑफिस पहुंचीं शूटर दादी प्रकाशी तोमर
दामाद के साथ धोखाधड़ी के मामले में की शिकायत, कार्रवाई की मांग की
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। बृहस्पतिवार दोपहर दो बजकर 10 मिनट का समय था। एसएसपी ऑफिस पर एसपी देहात अविनाश पांडेय शिकायतें सुन रहे थे। तभी बागपत के जौहड़ी गांव की निवासी शूटर दादी प्रकाशी तोमर, अपनी बेटी कुसुम और दामाद सुभाष चंद के साथ वहां पहुंचीं। एसपी देहात उन्हें अचानक से देखकर हैरान रह गए और कुर्सी से खड़े हो गए।
एसपी देहात ने सामान्य शिष्टाचार निभाते हुए शूटर दादी से आने का प्रयोजन पूछा। जिस पर उन्होंने बताया कि उनके दामाद सुभाष चंद एचएएल नासिक में मास्टर टेक्नीशियन हैं। उन्होंने तीन साल पहले कंकरखेड़ा में एक निजी कॉलोनी में मकान बुक किया था। आरोप है कि बिल्डर से 50 लाख में सौदा तय हुआ था। कुल 16 बार में 53.70 लाख की रकम बिल्डर को दी जा चुकी है। इसके बाद भी बिल्डर मकान तैयार करके नहीं दे रहा। 11 मई को कंकरखेड़ा थाने में तहरीर दी थी। लेकिन सुनवाई नहीं हुई। एसपी देहात ने इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा एपी मिश्रा को फोन पर निर्देश दिए कि शनिवार दोपहर तक इस मामले का समाधान निकाला जाए। बाद में प्रकाशी तोमर सीओ दौराला जितेंद्र कुमार से भी मिलीं।
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वहीं, बिल्डर का कहना है कि 50 लाख में मकान खरीदने का सौदा तय हुआ था। इसमें रजिस्ट्री और स्टांप ड्यूटी अलग से थी। 43 लाख मेरे पास अब तक आए हैं। बकाया रुपयों की डिमांड की गई थी, उसी पर विवाद शुरू हुआ। इस पर मैंने मकान निर्माण का काम रोक दिया। इस विवाद को निपटा लिया जाएगा।
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दादी... आपको सफलता कैसे मिली
एसपी देहात ने पूछा कि दादी आपको अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता कैसे मिली। जिस पर शूटर दादी ने बताया कि वह अपनी पोती को शूटिंग कैंप में लेकर पहुंची थीं। कई दिन तक वहां गईं। इस दौरान एक दिन मैंने भी पिस्टल से निशाना लगाया तो पहला निशाना ही सटीक लगा। जिसके बाद मेरा हौसला बढ़ा और मैंने प्रैक्टिस शुरू की।
आजकल की पीढ़ी...
एसपी देहात ने पूछा कि दादी! हाथ बहुत मजबूत हैं जिस पर उन्होंने कहा कि आजकल की पीढ़ी ने काम करना छोड़ दिया। हमने बचपन में इतना इतना चून माढ़ा। पांच पांच भैंसों का दूध निकाला, तब हाथ मजबूत हुए। आजकल के लोगों ने तो काम करना छोड़ दिया, जिससे बीमारी बढ़ने लगी।

हां! कारगिल में चलावेगी बंदूक
शूटर दादी ने कहा कि हमने जग में पानी लेकर प्रैक्टिस की। रेेंज में पिस्टल भी नही मिली, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। कई लोगों ने कहा कि हां! कारगिल में यही चलावेगी बंदूक। लोगों ने बहुत मजाक उड़ाई। लेकिन मेरे लड़कों ने बहुत मदद की। फारूक पठान कोच था, जिसने बहुत मदद की। बेटों ने पैसों से भी मदद भी बहुत की। कोच ने भी साथ दिया। एक साल बाद रुड़की के डीआईजी जो बहुत बड़ा आदमी था, मैं कैसे सामना करती। 32 बोर की पिस्टल मेरे हाथ में थमा दी। मैंने जीता गोल्ड मेडल और डीआईजी ने सिल्वर मेडल। उसके बाद मुझे दुनिया जान गई। पेपर ने मुझे बहुत आगे बढ़ाया, मेरा कभी हौसला नहीं टूटा। पिस्टल से कई मेडल जीते। राष्ट्रपति ने भी मुझे बुलाया।
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