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सरकार ने माना अदालत को दी गलत जानकारियां
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सरकार ने माना अदालत को दी गलत जानकारियां
- मेरठ रेड लाइट एरिया में एक सप्ताह में दाखिल होगा नया हलफनामा
- गलत सूचना देने वाले अफसर पर होगी कार्रवाई, याची अधिवक्ता को सुरक्षा देने का निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज/मेरठ। मेरठ शहर से रेडलाइट एरिया हटाने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर राज्य सरकार ने स्वीकार किया है कि पहले दाखिल हलफनामे में गलत सूचनाएं दी गई हैं। प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि एक सप्ताह में सही तथ्यों के साथ बेहतर हलफनामा दाखिल किया जाएगा। कोर्ट के यह पूछने पर कि गलत जानकारी देकर अदालत को गुमराह करने वाले अधिकारियों पर सरकार क्या कार्रवाई कर रही है, इस पर सरकारी वकील ने बताया कि गलत हलफनामा दाखिल करने वाले अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी और कोर्ट को सूचित किया जाएगा।
कोर्ट में मेरठ के डीएम अनिल ढींगरा, एसपी क्राइम डॉ. बीपी अशोक और सीएमओ डॉ राजकुमार हाजिर थे। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर इनकी हाजिरी माफ कर दी। याचिका की सुनवाई 30 अप्रैल को होगी। अधिवक्ता सुनील चौधरी की जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। इससे पूर्व मेरठ जिला प्रशासन के अधिकारियोें ने हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया था कि मेरठ में रेड लाइट एरिया बंद करवा दिया गया है और देह व्यापार नहीं चल रहा है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट से प्रशासन की कलई खुल गई। कोर्ट ने जब सख्ती से पूछताछ की तो अफसरों का झूठ सामने आ गया और सरकारी वकील ने स्वीकार कर लिया कि अदालत को सही सूचनाएं नहीं दी गई हैं। याची सुनील चौधरी ने कोर्ट को बताया कि याचिका दाखिल करने के कारण उसे जान से मारने की धमकी मिल रही है। इस पर कोर्ट ने डीएम प्रयागराज को याची की शिकायत पर नियमानुसार तुरंत कार्यवाही करने का निर्देश दिया है। कहा कि याची आदेश की प्रति के साथ प्रत्यावेदन दे जिस पर डीएम नियमानुसार कार्यवाही करें।
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- मेरठ रेड लाइट एरिया में एक सप्ताह में दाखिल होगा नया हलफनामा
- गलत सूचना देने वाले अफसर पर होगी कार्रवाई, याची अधिवक्ता को सुरक्षा देने का निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज/मेरठ। मेरठ शहर से रेडलाइट एरिया हटाने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर राज्य सरकार ने स्वीकार किया है कि पहले दाखिल हलफनामे में गलत सूचनाएं दी गई हैं। प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि एक सप्ताह में सही तथ्यों के साथ बेहतर हलफनामा दाखिल किया जाएगा। कोर्ट के यह पूछने पर कि गलत जानकारी देकर अदालत को गुमराह करने वाले अधिकारियों पर सरकार क्या कार्रवाई कर रही है, इस पर सरकारी वकील ने बताया कि गलत हलफनामा दाखिल करने वाले अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी और कोर्ट को सूचित किया जाएगा।
कोर्ट में मेरठ के डीएम अनिल ढींगरा, एसपी क्राइम डॉ. बीपी अशोक और सीएमओ डॉ राजकुमार हाजिर थे। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर इनकी हाजिरी माफ कर दी। याचिका की सुनवाई 30 अप्रैल को होगी। अधिवक्ता सुनील चौधरी की जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। इससे पूर्व मेरठ जिला प्रशासन के अधिकारियोें ने हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया था कि मेरठ में रेड लाइट एरिया बंद करवा दिया गया है और देह व्यापार नहीं चल रहा है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट से प्रशासन की कलई खुल गई। कोर्ट ने जब सख्ती से पूछताछ की तो अफसरों का झूठ सामने आ गया और सरकारी वकील ने स्वीकार कर लिया कि अदालत को सही सूचनाएं नहीं दी गई हैं। याची सुनील चौधरी ने कोर्ट को बताया कि याचिका दाखिल करने के कारण उसे जान से मारने की धमकी मिल रही है। इस पर कोर्ट ने डीएम प्रयागराज को याची की शिकायत पर नियमानुसार तुरंत कार्यवाही करने का निर्देश दिया है। कहा कि याची आदेश की प्रति के साथ प्रत्यावेदन दे जिस पर डीएम नियमानुसार कार्यवाही करें।
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