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परीक्षा फामो्रं से मिले 95 करोड़, सैलरी-परीक्षा पर 58 करोड़ खर्च
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मेरठ-सहरानपुर मंडल के सभी जिलों के ध्यानार्थ
वर्ष 2018-19 में यूनिवर्सिटी को हुई 137 करोड़ की आय, 125 करोड़ हुए खर्च
नए सत्र में विभिन्न पाठ्यक्रमों में बढ़ाई जा सकती है 10 फीसदी फीस
मेरठ। सीसीएसयू में हुई फाइनेंस कमेटी की बैठक में वित्तीय वर्ष 2018-19 का ब्योरा रखा गया। पिछले सत्र में यूनिवर्सिटी को 137 करोड़ रुपये की आय हुई। जिसमें 125 करोड़ रुपये खर्च हुए। 12 करोड़ रुपये की यूनिवर्सिटी को बचत हुई।
सबसे ज्यादा आय यूनिवर्सिटी को रेग्युलर कोर्सों की फीस से हुई है। इसमें यूनिवर्सिटी को 45 करोड़ रुपये परीक्षा शुल्क के प्राप्त हुए। प्राइवेट परीक्षा फार्म से 40 करोड़ रुपये का शुल्क प्राप्त हुआ। 3 करोड़ रुपये पंजीकृत शुल्क आया। 3 करोड़ रुपये का शुल्क डिग्री, मार्कशीट आदि प्रमाण पत्रों से प्राप्त हुए। 6 करोड़ रुपये शासन ने एरियर के मिले हैं। 4.89 करोड़ रुपये की शासन से ग्रांट मिली है। यूनिवर्सिटी कैंपस में चल रहे साइकिल स्टैंड से 19 लाख और 40 लाख लाख रुपये उत्तर पुस्तिकाओं की रद्दी आदि से प्राप्त हुए। सीसीएसयू में खर्च की बात करें तो सबसे ज्यादा खर्च प्रोफेसर और कर्मचारियों की सैलरी पर 34 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके अलावा परीक्षा पर 24 करोड़ 33 लाख रुपये का खर्च आया। कैंपस में सिक्योरिटी पर चार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए। इसके अलावा बिजली, जेनरेटर समेत 50 से ज्यादा मदों में खर्च हुए।
घट जाएगी कॉलेजों-छात्रों की संख्या
सीसीएसयू से संबद्ध मेरठ-सहारनपुर मंडल के नौ जिलों में इस वक्त एक हजार से ज्यादा कॉलेज हैं। इनमें करीब चार लाख छात्र-छात्राएं पढ़ाई करते हैं। हालांकि नए सत्र में यह संख्या सहारनपुर में यूनिवर्सिटी शुरू होने के बाद कम हो जाएगी। 180 से ज्यादा सेल्फ फाइनेंस कॉलेज और 70 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राएं अलग हो जाएंगे। इससे यूनिवर्सिटी पर दबाव तो कम होगा लेकिन आय भी कम होगी।
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नए सत्र में 10 फीसदी तक फीस बढ़ाने पर विचार
फाइनेंस कमेटी की बैठक में नए सत्र से सभी पाठ्यक्रमों में 10 फीसदी तक फीस बढ़ाने पर भी निर्णय लिया गया है। बैठक में विचार रखा गया कि साल 2014 के बाद से यूनिवर्सिटी ने कहीं फीस नहीं बढ़ाई है। ऐसे में फीस बढ़ोतरी पर सहमति बनी। नए सत्र से सभी पाठ्यक्रमों में बढ़ी फीस से ही प्रवेश हो सकते हैं। कई रेग्युलर विषयों में जनरल कैटेगिरी में भी यूनिवर्सिटी की फीस एक हजार रुपये से भी कम है। ओबीसी और एससी कैटेगिरी में तो चार सौ रुपये से भी कम फीस है। ऐसे में फीस बढ़ाया जाना करीब-करीब तय है।
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वर्ष 2018-19 में यूनिवर्सिटी को हुई 137 करोड़ की आय, 125 करोड़ हुए खर्च
नए सत्र में विभिन्न पाठ्यक्रमों में बढ़ाई जा सकती है 10 फीसदी फीस
मेरठ। सीसीएसयू में हुई फाइनेंस कमेटी की बैठक में वित्तीय वर्ष 2018-19 का ब्योरा रखा गया। पिछले सत्र में यूनिवर्सिटी को 137 करोड़ रुपये की आय हुई। जिसमें 125 करोड़ रुपये खर्च हुए। 12 करोड़ रुपये की यूनिवर्सिटी को बचत हुई।
सबसे ज्यादा आय यूनिवर्सिटी को रेग्युलर कोर्सों की फीस से हुई है। इसमें यूनिवर्सिटी को 45 करोड़ रुपये परीक्षा शुल्क के प्राप्त हुए। प्राइवेट परीक्षा फार्म से 40 करोड़ रुपये का शुल्क प्राप्त हुआ। 3 करोड़ रुपये पंजीकृत शुल्क आया। 3 करोड़ रुपये का शुल्क डिग्री, मार्कशीट आदि प्रमाण पत्रों से प्राप्त हुए। 6 करोड़ रुपये शासन ने एरियर के मिले हैं। 4.89 करोड़ रुपये की शासन से ग्रांट मिली है। यूनिवर्सिटी कैंपस में चल रहे साइकिल स्टैंड से 19 लाख और 40 लाख लाख रुपये उत्तर पुस्तिकाओं की रद्दी आदि से प्राप्त हुए। सीसीएसयू में खर्च की बात करें तो सबसे ज्यादा खर्च प्रोफेसर और कर्मचारियों की सैलरी पर 34 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके अलावा परीक्षा पर 24 करोड़ 33 लाख रुपये का खर्च आया। कैंपस में सिक्योरिटी पर चार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए। इसके अलावा बिजली, जेनरेटर समेत 50 से ज्यादा मदों में खर्च हुए।
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घट जाएगी कॉलेजों-छात्रों की संख्या
सीसीएसयू से संबद्ध मेरठ-सहारनपुर मंडल के नौ जिलों में इस वक्त एक हजार से ज्यादा कॉलेज हैं। इनमें करीब चार लाख छात्र-छात्राएं पढ़ाई करते हैं। हालांकि नए सत्र में यह संख्या सहारनपुर में यूनिवर्सिटी शुरू होने के बाद कम हो जाएगी। 180 से ज्यादा सेल्फ फाइनेंस कॉलेज और 70 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राएं अलग हो जाएंगे। इससे यूनिवर्सिटी पर दबाव तो कम होगा लेकिन आय भी कम होगी।
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नए सत्र में 10 फीसदी तक फीस बढ़ाने पर विचार
फाइनेंस कमेटी की बैठक में नए सत्र से सभी पाठ्यक्रमों में 10 फीसदी तक फीस बढ़ाने पर भी निर्णय लिया गया है। बैठक में विचार रखा गया कि साल 2014 के बाद से यूनिवर्सिटी ने कहीं फीस नहीं बढ़ाई है। ऐसे में फीस बढ़ोतरी पर सहमति बनी। नए सत्र से सभी पाठ्यक्रमों में बढ़ी फीस से ही प्रवेश हो सकते हैं। कई रेग्युलर विषयों में जनरल कैटेगिरी में भी यूनिवर्सिटी की फीस एक हजार रुपये से भी कम है। ओबीसी और एससी कैटेगिरी में तो चार सौ रुपये से भी कम फीस है। ऐसे में फीस बढ़ाया जाना करीब-करीब तय है।