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रजिस्ट्री घोटाले की सूत्रधार रजनी बर्खास्त
Updated Sun, 08 Jul 2018 01:52 AM IST
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मेरठ। निरस्त भूखंडों को फर्जी तरीके से बेचकर लाखों के वारे-न्यारे करने के मामले की सूत्रधार एमडीए लिपिक रजनी कनौजिया की सेवा समाप्त कर दी गई है। इस प्रकरण में तत्कालीन आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार के निर्देश पर मुकदमा दर्ज हुआ, जिसमें दो लिपिकों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। रजनी फरार चल रही है।
यह है पूरा प्रकरण
मेरठ विकास प्राधिकरण की लोहियानगर योजना में यह खेल हुआ था। यहां काफी आवंटियों के पुराने भूखंडों के आवंटन निरस्त कर दिए गए। बाद में एक मुश्त समाधान योजना आई तो एमडीए कर्मचारियों ने पूरे खेल की पटकथा रच दी। निरस्त प्लाटों के खाते में एमडीए कर्मचारियों ने अपनी जेब से ही दो से चार लाख रुपये तक डालकर उनके खाते को पुनर्जीवित कर दिया। उन्हेें नई दर पर बेच डाला और बैनामा भी उन्हीं मूल आवंटियों के नाम से फर्जी ढंग से कर दिया। अहम यह रहा कि इन प्लाटों की बिक्री भी कई-कई बार हुई। उन लोगों में से भी कुछ ने आगे प्लाट बेच दिए और एमडीए को पांच से सात करोड़ रुपये का चूना लगाया। दरअसल उस समय रेट 625और नौ सौ का था। लेकिन अब यहां रेट 12 हजार के पार है। ऐसे में लाखों रुपया पैसा एमडीए कर्मियों की जेब में गया। इस पूरे प्रकरण का भंडाफोड़ अमर उजाला ने किया था।
आयुक्त की जांच में धरे गए कर्मी
इस पूरे प्रकरण की जांच तत्कालीन आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने कराई। टीम की रिपोर्ट के आधार पर आयुक्त ने लिपिक शिवगोपाल वाजपेयी, लिपिक रजनी कनौजिया तथा रिटायर्ड हुए लिपिक तारा चंद समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर करा दी। रजनी कनौजिया फरार हो गई जबकि बाकी दोनों आरोपियों को पुलिस ने धर दबोचा। मामले का खुलासा होने पर रजनी को निलंबित कर जांच चल रही थी। एमडीए वीसी साहब सिंह ने जांच में दोषी पाए जाने पर शनिवार को रजनी को सेवा से पृथक कर दिया। साथ ही निर्देश जारी किए कि उसकी निलंबन अवधि का जीवन निर्वहन भत्ते के अलावा अन्य कोई भुगतान नहीं किया जाएगा।
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गड़बड़झाने का दोषी पाया
एमडीए के वीसी साहब सिंह के अनुसार जांच में रजनी को गड़बड़झाले का दोषी पाया गया है। समय देने के बावजूद रजनी अपने बचाव में भी कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी। ऐसे में रजनी को सेवा से पृथक कर दिया गया है।
खास बातें
- अमर उजाला ने किया था मामले का भंडाफोड़
- एमडीए कर्मचारियों ने निरस्त भूखंडों को बेचकर भरी थीं अपने जेबें
- फर्जी लोग खड़े कर उनके नाम कर दिया निरस्त प्लाटों का आवंटन
- पूर्व आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने एफआईआर कराकर कराया लिपिकों को गिरफ्तार
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यह है पूरा प्रकरण
मेरठ विकास प्राधिकरण की लोहियानगर योजना में यह खेल हुआ था। यहां काफी आवंटियों के पुराने भूखंडों के आवंटन निरस्त कर दिए गए। बाद में एक मुश्त समाधान योजना आई तो एमडीए कर्मचारियों ने पूरे खेल की पटकथा रच दी। निरस्त प्लाटों के खाते में एमडीए कर्मचारियों ने अपनी जेब से ही दो से चार लाख रुपये तक डालकर उनके खाते को पुनर्जीवित कर दिया। उन्हेें नई दर पर बेच डाला और बैनामा भी उन्हीं मूल आवंटियों के नाम से फर्जी ढंग से कर दिया। अहम यह रहा कि इन प्लाटों की बिक्री भी कई-कई बार हुई। उन लोगों में से भी कुछ ने आगे प्लाट बेच दिए और एमडीए को पांच से सात करोड़ रुपये का चूना लगाया। दरअसल उस समय रेट 625और नौ सौ का था। लेकिन अब यहां रेट 12 हजार के पार है। ऐसे में लाखों रुपया पैसा एमडीए कर्मियों की जेब में गया। इस पूरे प्रकरण का भंडाफोड़ अमर उजाला ने किया था।
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आयुक्त की जांच में धरे गए कर्मी
इस पूरे प्रकरण की जांच तत्कालीन आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने कराई। टीम की रिपोर्ट के आधार पर आयुक्त ने लिपिक शिवगोपाल वाजपेयी, लिपिक रजनी कनौजिया तथा रिटायर्ड हुए लिपिक तारा चंद समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर करा दी। रजनी कनौजिया फरार हो गई जबकि बाकी दोनों आरोपियों को पुलिस ने धर दबोचा। मामले का खुलासा होने पर रजनी को निलंबित कर जांच चल रही थी। एमडीए वीसी साहब सिंह ने जांच में दोषी पाए जाने पर शनिवार को रजनी को सेवा से पृथक कर दिया। साथ ही निर्देश जारी किए कि उसकी निलंबन अवधि का जीवन निर्वहन भत्ते के अलावा अन्य कोई भुगतान नहीं किया जाएगा।
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गड़बड़झाने का दोषी पाया
एमडीए के वीसी साहब सिंह के अनुसार जांच में रजनी को गड़बड़झाले का दोषी पाया गया है। समय देने के बावजूद रजनी अपने बचाव में भी कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी। ऐसे में रजनी को सेवा से पृथक कर दिया गया है।
खास बातें
- अमर उजाला ने किया था मामले का भंडाफोड़
- एमडीए कर्मचारियों ने निरस्त भूखंडों को बेचकर भरी थीं अपने जेबें
- फर्जी लोग खड़े कर उनके नाम कर दिया निरस्त प्लाटों का आवंटन
- पूर्व आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने एफआईआर कराकर कराया लिपिकों को गिरफ्तार