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स्वार्थी मनुष्य ले रहे हैँ दूसरों की जान
Updated Sun, 03 Dec 2017 09:22 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
आज का इंसान स्वार्थी हो गया है, अपने स्वार्थ में दूसरों की जान लेने में भी संकोच नहीं करता। कभी-कभी व्यक्ति दूसरों के लिए कहता है कि वह पत्थर समान है। यदि व्यक्ति पत्थर होता तो उसमें भगवान बनने का गुण अवश्य ही विद्यमान होता। यह प्रवचन आचार्य वसुनंदी मुनिराज ने बागपत रोड स्थित वसुनंदी विहार में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में दिए।
आचार्य ने बताया कि एक पत्थर जब तक सड़क पर पड़ा रहता है तब तक बेकार होता है, लेकिन जब वह किसी मूर्तिकार के पास पहुंचता है तो वह उसे काटकर भगवान की मूर्ति बना देता है। गुरु भी उसी मूर्तिकार के समान है, जो उदासीन भक्तों के बुरे कर्मों को प्रवचन और शास्त्र की हथोड़ी से चोट करके दुर्जन से सज्जन बनाते हैं। माता द्वारा देखे गए सोलह स्वप्न का सजीव चित्रण देखकर सभी का मन हर्षित हो उठा। इससे पहले योगेश जैन, बीना जैन ने ध्वजारोहण कर मंच का उद्घाटन किया। इंद्र इंद्राणियों ने पारंपरिक परिधानों में सजकर घट यात्रा निकाली। महानगर में पंचकल्याणक की धूम दिखाई दी। यात्रा मंदिर से विशाल पंडाल में पहुंची। भगवान की माता के रूप में अनीता जैन का समाज द्वारा गोद भराई कार्यक्रम हुआ। सुरेश जैन रितुराज, हंस कुमार, विजय कुमार, प्रमोद जैन, विपिन जैन, अंकुर जैन, मृदुल जैन, रणजीत जैन, दिनेश जैन, प्रिंस जैन, अक्षत जैन, रविंद्र जैन, सुनील जैन प्रवक्ता, राजीव जैन, सुभाष जैन, श्रेयांश जैन, प्रभास जैन आदि मौजूद रहे।
खास बातें
- पंचकल्याणक महोत्सव में आचार्य वसुनंदी ने किए प्रवचन
- बैंडबाजे की धुन से गूंजा वसुनंदी विहार
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मेरठ।
आज का इंसान स्वार्थी हो गया है, अपने स्वार्थ में दूसरों की जान लेने में भी संकोच नहीं करता। कभी-कभी व्यक्ति दूसरों के लिए कहता है कि वह पत्थर समान है। यदि व्यक्ति पत्थर होता तो उसमें भगवान बनने का गुण अवश्य ही विद्यमान होता। यह प्रवचन आचार्य वसुनंदी मुनिराज ने बागपत रोड स्थित वसुनंदी विहार में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में दिए।
आचार्य ने बताया कि एक पत्थर जब तक सड़क पर पड़ा रहता है तब तक बेकार होता है, लेकिन जब वह किसी मूर्तिकार के पास पहुंचता है तो वह उसे काटकर भगवान की मूर्ति बना देता है। गुरु भी उसी मूर्तिकार के समान है, जो उदासीन भक्तों के बुरे कर्मों को प्रवचन और शास्त्र की हथोड़ी से चोट करके दुर्जन से सज्जन बनाते हैं। माता द्वारा देखे गए सोलह स्वप्न का सजीव चित्रण देखकर सभी का मन हर्षित हो उठा। इससे पहले योगेश जैन, बीना जैन ने ध्वजारोहण कर मंच का उद्घाटन किया। इंद्र इंद्राणियों ने पारंपरिक परिधानों में सजकर घट यात्रा निकाली। महानगर में पंचकल्याणक की धूम दिखाई दी। यात्रा मंदिर से विशाल पंडाल में पहुंची। भगवान की माता के रूप में अनीता जैन का समाज द्वारा गोद भराई कार्यक्रम हुआ। सुरेश जैन रितुराज, हंस कुमार, विजय कुमार, प्रमोद जैन, विपिन जैन, अंकुर जैन, मृदुल जैन, रणजीत जैन, दिनेश जैन, प्रिंस जैन, अक्षत जैन, रविंद्र जैन, सुनील जैन प्रवक्ता, राजीव जैन, सुभाष जैन, श्रेयांश जैन, प्रभास जैन आदि मौजूद रहे।
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खास बातें
- पंचकल्याणक महोत्सव में आचार्य वसुनंदी ने किए प्रवचन
- बैंडबाजे की धुन से गूंजा वसुनंदी विहार