{"_id":"5d06a6ec8ebc3e4d65689b6b","slug":"156071702420-meerut-news163","type":"story","status":"publish","title_hn":"भूगर्भ की सूखी कोख को तर कर रहा औघड़नाथ मंदिर का जल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भूगर्भ की सूखी कोख को तर कर रहा औघड़नाथ मंदिर का जल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- सरकारी सिस्टम के फेल पड़े हैं रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
- नगर निगम, एमडीए आफिस, कमिश्नरी सहित सैंकड़ों स्थानों पर लगे हैं रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। भूगर्भ जल दोहन और जल स्तर बढ़ाने के लिए सरकारी मशीनरी गंभीर नहीं है। शहर की सरकारी और प्राइवेट इमारत, परिसर और पार्कों में लगे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सफाई न होने के कारण खराब पड़े हैं। अधिकारियों को बाबा औघड़नाथ मंदिर परिसर में लगाए गए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से सीख लेने की जरूरत है। बाबा औघड़नाथ मंदिर में प्रतिदिन सैकड़ों लीटर पानी भूगर्भ में डाला जा रहा है।
तेजी से गिर रहा भूगर्भ जल स्तर
शहर में ही नहीं बल्कि जिले में भूगर्भ जल दोहन लगातार बढ़ रहा है। हैंडपंप, सबमर्सिबल, ट्यूबवेल लगाकर धरती की छाती छलनी कर दी गई है। भूगर्भ जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। जल बचाओ, भूगर्भ जल स्तर बढ़ाओ के नारे के साथ पूरे देश में प्रचार प्रसार हो रहा है, लेकिन उसका असर न तो सरकारी मशीनरी में ही दिख रहा है और न जनता में।
यहां बने हैं रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
- नगर निगम परिसर में दो साल पहले बनाए गए दो स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, पहले साल ही फेल गए थे।
- कमिश्नर कार्यालय परिसर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम है। बरसात आने से पहले सफाई होनी चाहिए थी, लेकिन यहां सिस्टम के हालात बेहद खराब है।
- विकास भवन परिसर में बनाया गए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की देखरेख करने वाला कोई नहीं है। हर वर्ष सरकारी मशीनरी पर सवाल उठते रहे हैं।
- एमडीए परिसर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम है। इसकी हालत सबसे बदतर है। यह वही विभाग है जो शहर में बनने वाली किसी भी इमारत का नक्शा तभी पास करता है जब वह मकान के नक्शे में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का स्थान तय करता है। लेकिन यह अपने ही कार्यालय परिसर में लगे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को ठीक नहीं करा पा रहा। शहर में बिल्डिंग तो लगातार बन रही हैं, लेकिन एमडीए के अधिकारी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लागू नहीं करा पा रहा है।
विज्ञापन
पानी संरक्षित नहीं किया तो प्यासी मरेगी जनता
भूगर्भ जल स्तर बढ़ाने के लिए बरसात का पानी संरक्षित नहीं किया तो आने वाले समय में जनता प्यासी मर जाएगी। सरकार ने जल संरक्षित करने के लिए कानून भी बनाया हुआ है। इसके लिए किसी भी सरकारी इमारत और प्राइवेट भवन बनाने से पहले रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की व्यवस्था करनी होगी। माना जाता है कि यदि बारिश का पानी संरक्षित करके भूगर्भ में डाला जाए तो जलस्तर में काफी फायदा होगा।
किसानों को भी जल बचाने में निभानी होगी भूमिका
भूगर्भ जल बचाने में किसानों की भी बड़ी भूमिका होती है। बशर्ते किसान इसे गंभीरता से लें। किसानों को ऐसी फसलों की बुवाई से परहेज करना चाहिए जिसमें अधिक पानी की जरूरत होती है। जैसे धान की खेती में सबसे अधिक पानी की जरूरत होती है। इसके स्थान पर दलहनी, तिलहनी फसलों को उगाया जा सकता है। इतना ही नहीं फसलों की सिंचाई का तरीका बदलकर यानी स्प्रींगलर, पाइप आदि से भी खेतों की सिंचाई की जा सकती है। इससे भूगर्भ जल का काम दोहन होगा।
---------------
जल्द कराएंगे ठीक
निगम परिसर में दो रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे हैं। संबंधित जेई से एक सप्ताह में सिस्टम को पूरी तरह अपडेट करा दिया जाएगा। बरसात के बाद सिस्टम को इसलिए बंद करा दिया गया था कि असामाजिक तत्व इनको नुकसान न पहुंचाएं। -नीना सिंह, अधिशासी अभियंता, नगर निगम।
विज्ञापन
- नगर निगम, एमडीए आफिस, कमिश्नरी सहित सैंकड़ों स्थानों पर लगे हैं रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। भूगर्भ जल दोहन और जल स्तर बढ़ाने के लिए सरकारी मशीनरी गंभीर नहीं है। शहर की सरकारी और प्राइवेट इमारत, परिसर और पार्कों में लगे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम सफाई न होने के कारण खराब पड़े हैं। अधिकारियों को बाबा औघड़नाथ मंदिर परिसर में लगाए गए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से सीख लेने की जरूरत है। बाबा औघड़नाथ मंदिर में प्रतिदिन सैकड़ों लीटर पानी भूगर्भ में डाला जा रहा है।
तेजी से गिर रहा भूगर्भ जल स्तर
शहर में ही नहीं बल्कि जिले में भूगर्भ जल दोहन लगातार बढ़ रहा है। हैंडपंप, सबमर्सिबल, ट्यूबवेल लगाकर धरती की छाती छलनी कर दी गई है। भूगर्भ जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। जल बचाओ, भूगर्भ जल स्तर बढ़ाओ के नारे के साथ पूरे देश में प्रचार प्रसार हो रहा है, लेकिन उसका असर न तो सरकारी मशीनरी में ही दिख रहा है और न जनता में।
विज्ञापन
यहां बने हैं रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
- नगर निगम परिसर में दो साल पहले बनाए गए दो स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, पहले साल ही फेल गए थे।
- कमिश्नर कार्यालय परिसर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम है। बरसात आने से पहले सफाई होनी चाहिए थी, लेकिन यहां सिस्टम के हालात बेहद खराब है।
- विकास भवन परिसर में बनाया गए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की देखरेख करने वाला कोई नहीं है। हर वर्ष सरकारी मशीनरी पर सवाल उठते रहे हैं।
- एमडीए परिसर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम है। इसकी हालत सबसे बदतर है। यह वही विभाग है जो शहर में बनने वाली किसी भी इमारत का नक्शा तभी पास करता है जब वह मकान के नक्शे में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का स्थान तय करता है। लेकिन यह अपने ही कार्यालय परिसर में लगे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को ठीक नहीं करा पा रहा। शहर में बिल्डिंग तो लगातार बन रही हैं, लेकिन एमडीए के अधिकारी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लागू नहीं करा पा रहा है।
विज्ञापन
पानी संरक्षित नहीं किया तो प्यासी मरेगी जनता
भूगर्भ जल स्तर बढ़ाने के लिए बरसात का पानी संरक्षित नहीं किया तो आने वाले समय में जनता प्यासी मर जाएगी। सरकार ने जल संरक्षित करने के लिए कानून भी बनाया हुआ है। इसके लिए किसी भी सरकारी इमारत और प्राइवेट भवन बनाने से पहले रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की व्यवस्था करनी होगी। माना जाता है कि यदि बारिश का पानी संरक्षित करके भूगर्भ में डाला जाए तो जलस्तर में काफी फायदा होगा।
किसानों को भी जल बचाने में निभानी होगी भूमिका
भूगर्भ जल बचाने में किसानों की भी बड़ी भूमिका होती है। बशर्ते किसान इसे गंभीरता से लें। किसानों को ऐसी फसलों की बुवाई से परहेज करना चाहिए जिसमें अधिक पानी की जरूरत होती है। जैसे धान की खेती में सबसे अधिक पानी की जरूरत होती है। इसके स्थान पर दलहनी, तिलहनी फसलों को उगाया जा सकता है। इतना ही नहीं फसलों की सिंचाई का तरीका बदलकर यानी स्प्रींगलर, पाइप आदि से भी खेतों की सिंचाई की जा सकती है। इससे भूगर्भ जल का काम दोहन होगा।
---------------
जल्द कराएंगे ठीक
निगम परिसर में दो रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे हैं। संबंधित जेई से एक सप्ताह में सिस्टम को पूरी तरह अपडेट करा दिया जाएगा। बरसात के बाद सिस्टम को इसलिए बंद करा दिया गया था कि असामाजिक तत्व इनको नुकसान न पहुंचाएं। -नीना सिंह, अधिशासी अभियंता, नगर निगम।