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स्वाइन फ्लू का खौफ, जारी हुआ अलर्ट
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स्वाइन फ्लू का खौफ, अलर्ट जारी
2017 में भी गर्मियों में भी फैला था स्वाइन फ्लू
ठंडे स्थानों से घूमकर लौटे लोगों को होता है ज्यादा खतरा
दो मरीज मिलने केबाद हरकत में आया स्वास्थ्य विभाग
मेरठ। स्वाइन फ्लू के दो मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। विभाग ने अलर्ट भी जारी किया है। शुक्रवार को जागृति विहार में सर्वे किया गया। मरीज के परिजनों को टेमी फ्लू की दवाइयां दी गईं। और आसपास के लोगों से जागरूक रहने की अपील की गई है।
स्वाइन फ्लू साल 2017 में भी गर्मियों में फैला था। दरअसल, ठंडे स्थानों से घूमकर आने वाले लोगों को अगर स्वाइन फ्लू हुआ है तो उनके संपर्र्क में आने वालों को स्वाइन फ्लू होने का खतरा रहता है। सीएमओ डॉ. राजकुमार ने बताया कि स्वाइन फ्लू के जो मरीज मिले हैं, उन्हें अपने दिल्ली में रहने वाले रिश्तेदार के संपर्क में आने से स्वाइन फ्लू हुआ है। इतने गर्मी में स्वाइन फ्लू का वायरस एक्टिव नहीं रहता है, लेकिन अगर कोई ठंडे स्थान से घूमकर आ रहा है तो उसे इसका खतरा हो सकता है।
यह हैं लक्षण
नाक का लगातार बहना, छींक आना
ठंड लगना और लगातार खांसी
मांसपेशियों में दर्द या अकड़न
सिर में भयानक दर्द, नींद न आना, ज्यादा थकान
दवा खाने पर भी बुखार का बढ़ना
गले में खराश का लगातार बढ़ते जाना
यह बरतें सावधानी
स्वाइन फ्लू की आशंका हो तो सरकारी संस्थान में जांच कराएं
आराम करना, शरीर में पानी की कमी न होने देना
आसपास कोई खांस रहा है तो एहतियात बरतें
हाथों को साबुन से धोएं
इलाज
शुरुआत में पैरासिटामोल जैसी दवाएं बुखार कम करने के लिए दी जाती हैं। बीमारी बढ़ने पर एंटी वायरल दवा ओसेल्टामिविर, टैमी फ्लू और जानामीविर, रेलेंजा जैसी दवाओं से स्वाइन फ्लू का इलाज किया जाता है, लेकिन इन दवाओं को खुद से नहीं लेना चाहिए।
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ऐसे होती है जांच
स्वाइन फ्लू के संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति के थ्रोट स्वेब का सैंपल माइक्रोबायोलॉजी लैब में भेजा जाता है। एलाइजा जांच के बाद पता चलता है कि स्वाइन फ्लू है या नहीं। कई बार निजी लैब में एच1एन1 की पुष्टि हो जाती है। इसके बाद भी आधिकारिक पुष्टि लिए सरकारी लैब में सैंपल भेजा जाता है। स्वाइन फ्लू एनफ्लुएंजा यानी फ्लू वायरस के अपेक्षाकृत नए स्ट्रेन इनफ्लुएंजा वायरस ए से होने वाला इंफेक्शन है। इसके इंफेक्शन ने 2009 और 2010 में महामारी का रूप ले लिया था।
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2017 में भी गर्मियों में भी फैला था स्वाइन फ्लू
ठंडे स्थानों से घूमकर लौटे लोगों को होता है ज्यादा खतरा
दो मरीज मिलने केबाद हरकत में आया स्वास्थ्य विभाग
मेरठ। स्वाइन फ्लू के दो मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। विभाग ने अलर्ट भी जारी किया है। शुक्रवार को जागृति विहार में सर्वे किया गया। मरीज के परिजनों को टेमी फ्लू की दवाइयां दी गईं। और आसपास के लोगों से जागरूक रहने की अपील की गई है।
स्वाइन फ्लू साल 2017 में भी गर्मियों में फैला था। दरअसल, ठंडे स्थानों से घूमकर आने वाले लोगों को अगर स्वाइन फ्लू हुआ है तो उनके संपर्र्क में आने वालों को स्वाइन फ्लू होने का खतरा रहता है। सीएमओ डॉ. राजकुमार ने बताया कि स्वाइन फ्लू के जो मरीज मिले हैं, उन्हें अपने दिल्ली में रहने वाले रिश्तेदार के संपर्क में आने से स्वाइन फ्लू हुआ है। इतने गर्मी में स्वाइन फ्लू का वायरस एक्टिव नहीं रहता है, लेकिन अगर कोई ठंडे स्थान से घूमकर आ रहा है तो उसे इसका खतरा हो सकता है।
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यह हैं लक्षण
नाक का लगातार बहना, छींक आना
ठंड लगना और लगातार खांसी
मांसपेशियों में दर्द या अकड़न
सिर में भयानक दर्द, नींद न आना, ज्यादा थकान
दवा खाने पर भी बुखार का बढ़ना
गले में खराश का लगातार बढ़ते जाना
यह बरतें सावधानी
स्वाइन फ्लू की आशंका हो तो सरकारी संस्थान में जांच कराएं
आराम करना, शरीर में पानी की कमी न होने देना
आसपास कोई खांस रहा है तो एहतियात बरतें
हाथों को साबुन से धोएं
इलाज
शुरुआत में पैरासिटामोल जैसी दवाएं बुखार कम करने के लिए दी जाती हैं। बीमारी बढ़ने पर एंटी वायरल दवा ओसेल्टामिविर, टैमी फ्लू और जानामीविर, रेलेंजा जैसी दवाओं से स्वाइन फ्लू का इलाज किया जाता है, लेकिन इन दवाओं को खुद से नहीं लेना चाहिए।
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ऐसे होती है जांच
स्वाइन फ्लू के संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति के थ्रोट स्वेब का सैंपल माइक्रोबायोलॉजी लैब में भेजा जाता है। एलाइजा जांच के बाद पता चलता है कि स्वाइन फ्लू है या नहीं। कई बार निजी लैब में एच1एन1 की पुष्टि हो जाती है। इसके बाद भी आधिकारिक पुष्टि लिए सरकारी लैब में सैंपल भेजा जाता है। स्वाइन फ्लू एनफ्लुएंजा यानी फ्लू वायरस के अपेक्षाकृत नए स्ट्रेन इनफ्लुएंजा वायरस ए से होने वाला इंफेक्शन है। इसके इंफेक्शन ने 2009 और 2010 में महामारी का रूप ले लिया था।