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गेहूं क्रय केंद्र लक्ष्य से पिछड़े
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गेेहूं क्रय केंद्र लक्ष्य से पिछड़े
खरखौदा। कस्बा समेत गांव कैली, बिजौली एवं लोहियानगर में अलग-अलग एजेंसियों द्वारा केंद्र स्थापित कर गेहूं की खरीद की जा रही है। इनमें से कई केंद्र लक्ष्य हासिल करने के करीब हैं, जबकि कई अभी काफी पिछड़ रहे हैं। एक केंद्र तो एक सप्ताह पहले ही बंद कर दिया गया। वहां न तो लेबर है और न ही कांटा। केंद्र प्रभारी भी किसानों से बकाये की वसूली करने निकल गए हैं।
सूबे में भारतीय खाद्य निगम, सहकारी संघ, यूपी एग्रो, उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ द्वारा गेहूं खरीद की जाती है। इस वर्ष भी एक अप्रैल से 15 जून तक गेहूं खरीदा जाना है। कस्बा खरखौदा एवं गांव बिजौली में सहकारी संघ द्वारा, कैली में उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ एवं लोहियानगर स्थित अनाज मंडी में भारतीय खाद्य निगम द्वारा गेहूं की खरीद की जा रही है। इस वर्ष खरखौदा को 10 हजार कुंतल, बिजौली को 6 हजार, कैली को तीन हजार एवं लोहियानगर केंद्र को 15 हजार कुंतल का लक्ष्य पूरा करना है। क्रय केंद्र बंद होने में करीब एक सप्ताह बाकी है। जिसमें खरखौदा क्रय केंद्र ने 9300, बिजौली ने 5074, कैली में 2589 कुंतल खरीदारी की है। सभी केंद्र अपने लक्ष्य के करीब हैं। हालांकि लोहियानगर स्थित केंद्र भारतीय खाद्य निगम द्वारा संचालित है। उसका लक्ष्य क्षेत्र के हिसाब से 15 हजार कुंतल रखा गया था। हालांकि अब केंद्र बंद होने के करीब है। एफसीआई के इस केंद्र पर अभी तक केवल 5452 कुंतल गेहूं खरीद की जा सकी है। यह लक्ष्य से अभी काफी दूर है।
बाजार मूल्य बढ़ने के बावजूद पिछड़े
क्रय केंद्रों पर गेहूं का समर्थन मूल्य 1840 रुपये है। वहीं, बाजार में मूल्य 2000 रुपये तक मिल रहा है। हालांकि इसके बावजूद सभी क्रय केंद्र लक्ष्य तक पहुंच गए हैं। इसके लिए सभी समितियों के कर्मचारी किसानों के घर तक भी गए। इसके बावजूद केंद्र लक्ष्य तक नहीं पहुंच सके हैं।
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एफसीआई अधिकारी किसानों तक नहीं पहुंचे
गेहूं की फसल तैयार होकर आई तो क्षेत्र में बरसात एवं ओलावृष्टि हो गई। गेहूं कटा पड़ा था वह काला पड़ गया तथा जो नहीं कट पाया था उसमें मिट्टी आ गई। आरोप है कि एफसीआई ने कई किसानों के गेहूं वापस कर दिये। जिसको लेकर किसान ने वहां जाना उचित नहीं समझा। किसानों ने अपने रिश्तेदारों एवं परिचितों के माध्यम से दूसरे केंद्रों पर गेेहूं बेच दिया।
कैली क्रय केंद्र एक सप्ताह पहले ही बंद
अभी गेहूं क्रय केंद्र बंद होने में करीब एक सप्ताह है। यह क्रय केंद्र अभी अपने लक्ष्य को हासिल भी नहीं कर पाया। किसानों से संपर्क साधने एवं गेहूं की खरीदारी करने के बजाय केंद्र पर न तो कोई लेबर है और न ही कांटा लगाया गया है। वहीं, प्रभारी को केंद्र को बंद कर क्षेत्र में किसानों से बकाये की वसूली करने के लिए जाना बता रहे हैं।
जो एजेंसियां अपने लक्ष्य तक पहुंच गई हैं वे सभी किसानों से जुड़ी रहती हैं। किसान उन समितियों से बीज, खाद एवं कृषि लोन भी लेते हैं। एफसीआई केवल दो माह में गेहूं खरीद के लिए आती है। प्रचार-प्रसार की कमी एवं किसानों से तालमेल के अभाव के कारण एफसीआई लक्ष्य का जिले में महज 34 फीसदी ही खरीदारी कर सकी है। एफसीआई की खरीदारी कम होने के पीछे एक कारण क्वालिटी भी रही है। वहीं, कैली क्रय केंद्र समय से पहले ही कैसे बंद कर दिया गया इसकी जांच की होगी। -सतेंद्र कुमार, जिला खाद्घ विपणन अधिकारी व अपर जिला खरीद अधिकारी मेरठ।
उनकी समिति सीधे किसान से जुड़ी हुई है। जिन किसानों ने पिछले वर्ष अपना गेहूं बेचा था। उन सभी के घर जाकर संपर्क किया गया तथा खरीद लक्ष्य के करीब पहुंच गई है। -विश्वबंधु जिला प्रबंधक पीसीएफ
बाजार में अच्छे दाम के चलते किसानों ने सरकारी केंद्रों से मुंह फेरा
गेहूं खरीद के लिए सरकार ने समय सीमा बढ़ाकर 25 जून कर दी
सरधना। सरकार द्वारा गेहूं खरीद के लिए एक अप्रैल से 15 जून तक समय तय किया गया। साथ ही गेहूं खरीद का लक्ष्य भी रखा गया था। किसानों द्वारा गेहूं क्रय केंद्रों का रुख नहीं करने पर लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है। जिस कारण सरकार द्वारा अब गेहूं खरीद के लिए दस दिन का समय और बढ़ा दिया है।
क्षेत्र में किसानों का गेहूं खरीदने के लिए सरकार द्वारा पांच क्रय केंद्र खोले गए हैं। जिसमें तीन सरधना, एक-एक सलावा एवं रार्धना में खोले गए हैं। 1 अप्रैल से 15 जून तक गेहूं खरीद की जानी है। उन केंद्रों को लक्ष्य भी निर्धारित कर दिया गया। इसके बावजूद किसानों द्वारा गेहूं क्रय केंद्रों का रुख नहीं करने से वे खाली पडे़ हैं। जिसके चलते लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है। जिसमें मंडी परिसर स्थित आरएफसी केंद्र प्रभारी किरण चौधरी ने बताया कि 5000 कुंतल का लक्ष्य है। 8 जून तक महज 2383 कुंतल खरीद की जा सकी है। हालांकि पिछले वर्ष इस केंद्र पर चार हजार कुंतल का लक्ष्य रखा गया था। वहीं, सात हजार कुंतल की खरीद हुई थी। वहीं, दूसरे भारतीय खाद्य निगम केंद्र के प्रभारी रोहनिका ने बताया कि उनके केंद्र पर 15 हजार कुंतल का लक्ष्य है जबकि शनिवर तक 1800 कुंतल गेहूं की खरीद हो सकी है। सरकार द्वारा गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा करने के लिए दस दिन का अतिरिक्त समय दिया गया हैं। जिससे अब 25 जून तक गेहूं की खरीद की जाएगी।
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खरखौदा। कस्बा समेत गांव कैली, बिजौली एवं लोहियानगर में अलग-अलग एजेंसियों द्वारा केंद्र स्थापित कर गेहूं की खरीद की जा रही है। इनमें से कई केंद्र लक्ष्य हासिल करने के करीब हैं, जबकि कई अभी काफी पिछड़ रहे हैं। एक केंद्र तो एक सप्ताह पहले ही बंद कर दिया गया। वहां न तो लेबर है और न ही कांटा। केंद्र प्रभारी भी किसानों से बकाये की वसूली करने निकल गए हैं।
सूबे में भारतीय खाद्य निगम, सहकारी संघ, यूपी एग्रो, उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ द्वारा गेहूं खरीद की जाती है। इस वर्ष भी एक अप्रैल से 15 जून तक गेहूं खरीदा जाना है। कस्बा खरखौदा एवं गांव बिजौली में सहकारी संघ द्वारा, कैली में उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ एवं लोहियानगर स्थित अनाज मंडी में भारतीय खाद्य निगम द्वारा गेहूं की खरीद की जा रही है। इस वर्ष खरखौदा को 10 हजार कुंतल, बिजौली को 6 हजार, कैली को तीन हजार एवं लोहियानगर केंद्र को 15 हजार कुंतल का लक्ष्य पूरा करना है। क्रय केंद्र बंद होने में करीब एक सप्ताह बाकी है। जिसमें खरखौदा क्रय केंद्र ने 9300, बिजौली ने 5074, कैली में 2589 कुंतल खरीदारी की है। सभी केंद्र अपने लक्ष्य के करीब हैं। हालांकि लोहियानगर स्थित केंद्र भारतीय खाद्य निगम द्वारा संचालित है। उसका लक्ष्य क्षेत्र के हिसाब से 15 हजार कुंतल रखा गया था। हालांकि अब केंद्र बंद होने के करीब है। एफसीआई के इस केंद्र पर अभी तक केवल 5452 कुंतल गेहूं खरीद की जा सकी है। यह लक्ष्य से अभी काफी दूर है।
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बाजार मूल्य बढ़ने के बावजूद पिछड़े
क्रय केंद्रों पर गेहूं का समर्थन मूल्य 1840 रुपये है। वहीं, बाजार में मूल्य 2000 रुपये तक मिल रहा है। हालांकि इसके बावजूद सभी क्रय केंद्र लक्ष्य तक पहुंच गए हैं। इसके लिए सभी समितियों के कर्मचारी किसानों के घर तक भी गए। इसके बावजूद केंद्र लक्ष्य तक नहीं पहुंच सके हैं।
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एफसीआई अधिकारी किसानों तक नहीं पहुंचे
गेहूं की फसल तैयार होकर आई तो क्षेत्र में बरसात एवं ओलावृष्टि हो गई। गेहूं कटा पड़ा था वह काला पड़ गया तथा जो नहीं कट पाया था उसमें मिट्टी आ गई। आरोप है कि एफसीआई ने कई किसानों के गेहूं वापस कर दिये। जिसको लेकर किसान ने वहां जाना उचित नहीं समझा। किसानों ने अपने रिश्तेदारों एवं परिचितों के माध्यम से दूसरे केंद्रों पर गेेहूं बेच दिया।
कैली क्रय केंद्र एक सप्ताह पहले ही बंद
अभी गेहूं क्रय केंद्र बंद होने में करीब एक सप्ताह है। यह क्रय केंद्र अभी अपने लक्ष्य को हासिल भी नहीं कर पाया। किसानों से संपर्क साधने एवं गेहूं की खरीदारी करने के बजाय केंद्र पर न तो कोई लेबर है और न ही कांटा लगाया गया है। वहीं, प्रभारी को केंद्र को बंद कर क्षेत्र में किसानों से बकाये की वसूली करने के लिए जाना बता रहे हैं।
जो एजेंसियां अपने लक्ष्य तक पहुंच गई हैं वे सभी किसानों से जुड़ी रहती हैं। किसान उन समितियों से बीज, खाद एवं कृषि लोन भी लेते हैं। एफसीआई केवल दो माह में गेहूं खरीद के लिए आती है। प्रचार-प्रसार की कमी एवं किसानों से तालमेल के अभाव के कारण एफसीआई लक्ष्य का जिले में महज 34 फीसदी ही खरीदारी कर सकी है। एफसीआई की खरीदारी कम होने के पीछे एक कारण क्वालिटी भी रही है। वहीं, कैली क्रय केंद्र समय से पहले ही कैसे बंद कर दिया गया इसकी जांच की होगी। -सतेंद्र कुमार, जिला खाद्घ विपणन अधिकारी व अपर जिला खरीद अधिकारी मेरठ।
उनकी समिति सीधे किसान से जुड़ी हुई है। जिन किसानों ने पिछले वर्ष अपना गेहूं बेचा था। उन सभी के घर जाकर संपर्क किया गया तथा खरीद लक्ष्य के करीब पहुंच गई है। -विश्वबंधु जिला प्रबंधक पीसीएफ
बाजार में अच्छे दाम के चलते किसानों ने सरकारी केंद्रों से मुंह फेरा
गेहूं खरीद के लिए सरकार ने समय सीमा बढ़ाकर 25 जून कर दी
सरधना। सरकार द्वारा गेहूं खरीद के लिए एक अप्रैल से 15 जून तक समय तय किया गया। साथ ही गेहूं खरीद का लक्ष्य भी रखा गया था। किसानों द्वारा गेहूं क्रय केंद्रों का रुख नहीं करने पर लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है। जिस कारण सरकार द्वारा अब गेहूं खरीद के लिए दस दिन का समय और बढ़ा दिया है।
क्षेत्र में किसानों का गेहूं खरीदने के लिए सरकार द्वारा पांच क्रय केंद्र खोले गए हैं। जिसमें तीन सरधना, एक-एक सलावा एवं रार्धना में खोले गए हैं। 1 अप्रैल से 15 जून तक गेहूं खरीद की जानी है। उन केंद्रों को लक्ष्य भी निर्धारित कर दिया गया। इसके बावजूद किसानों द्वारा गेहूं क्रय केंद्रों का रुख नहीं करने से वे खाली पडे़ हैं। जिसके चलते लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है। जिसमें मंडी परिसर स्थित आरएफसी केंद्र प्रभारी किरण चौधरी ने बताया कि 5000 कुंतल का लक्ष्य है। 8 जून तक महज 2383 कुंतल खरीद की जा सकी है। हालांकि पिछले वर्ष इस केंद्र पर चार हजार कुंतल का लक्ष्य रखा गया था। वहीं, सात हजार कुंतल की खरीद हुई थी। वहीं, दूसरे भारतीय खाद्य निगम केंद्र के प्रभारी रोहनिका ने बताया कि उनके केंद्र पर 15 हजार कुंतल का लक्ष्य है जबकि शनिवर तक 1800 कुंतल गेहूं की खरीद हो सकी है। सरकार द्वारा गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा करने के लिए दस दिन का अतिरिक्त समय दिया गया हैं। जिससे अब 25 जून तक गेहूं की खरीद की जाएगी।