{"_id":"5cf97d8fbdec2207167ef013","slug":"15598544732-meerut-news19","type":"story","status":"publish","title_hn":"भाकियू के चिंतन शिविर में किसान आंदोलन के लिए बनेगी रणनीति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भाकियू के चिंतन शिविर में किसान आंदोलन के लिए बनेगी रणनीति
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाकियू के चिंतन शिविर में बनेगी किसान आंदोलन की रणनीति
मेरठ। लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद गन्ना बकाया भुगतान को लेकर किसान राजनीति गरमाने जा रही है। 16 से 18 जून तक हरिद्वार में होने जा रहे भाकियू के किसान चिंतन शिविर में गन्ना बकाया भुगतान, आवारा पशुओं से निजात और सिंचाई के लिए रजवाहों की टेल तक पानी आदि की समस्या को लेकर चिंतन होगा।
प्रत्येक वर्ष किसानों की समस्याओं और मांगों को लेकर हरिद्वार में भाकियू का राष्ट्रीय चिंतन शिविर लगता है। इस बार भी तीन दिवसीय शिविर मेें देश के तमाम राज्यों से किसान प्रतिनिधि शिरकत करेंगे। मेरठ से भी सैकड़ों किसान शिविर में हिस्सा लेंगे। इसकी तैयारी को लेकर बृहस्पतिवार को बटजेवरा स्थित शिव मंदिर प्रांगण में पंचायत भी हुई। गन्ना पेराई सत्र 2018-19 संपन्न होने के बाद भी शुगर इंडस्ट्री ने संपूर्ण गन्ना मूल्य भुगतान नहीं किया है। प्रदेश के गन्ना मूल्य भुगतान की बात करें तो अभी तक आधा ही भुगतान हो सका है। लोकसभा चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने जल्द ही भुगतान कराने का वादा किया था, लेकिन इंडस्ट्री पर कोई असर न होता देख भाकियू ने आंदोलन के लिए कमर कसनी शुरू कर दी है। इसके लिए भाकियू 16 जून से लेकर 18 जून तक हरिद्वार में किसान चिंतन शिविर का आयोजन करने जा रहा है। शिविर में देश के किसानों की समस्याओं और सरकार के स्तर पर उनके समाधान आदि के अलावा गन्ना बकाया भुगतान, फसलों के लिए समस्या बने आवारा पशुओं और सिंचाई के लिए रजवाहों की टेल तक पानी पहुंचाने की मांग को लेकर रणनीति बनेगी। बैठक में भाकियू जिलाध्यक्ष गजेंद्र सिंह ने किसानों को चिंतन शिविर की जानकारी दी गई और 15 जून को यहां से हरिद्वार के लिए भारी संख्या में रवाना होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि आवारा पशुओं का प्रशासन ने इंतजाम नहीं किया तो किसान पशुओं को पकड़कर ब्लाक, तहसील और नगर पंचायत कार्यालयों में बांध देंगे। अध्यक्षता जगत सिंह राठी ने की। इस मौके पर सतबीर जंगेठी, राजकुमार करनावल, जगजीत सिंह रावत, बबलू सिंह, जवाहर सिंह जिटौली, रवींद्र दौरालिया, विनोद जिटौली, मनोज त्यागी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
मेरठ। लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद गन्ना बकाया भुगतान को लेकर किसान राजनीति गरमाने जा रही है। 16 से 18 जून तक हरिद्वार में होने जा रहे भाकियू के किसान चिंतन शिविर में गन्ना बकाया भुगतान, आवारा पशुओं से निजात और सिंचाई के लिए रजवाहों की टेल तक पानी आदि की समस्या को लेकर चिंतन होगा।
प्रत्येक वर्ष किसानों की समस्याओं और मांगों को लेकर हरिद्वार में भाकियू का राष्ट्रीय चिंतन शिविर लगता है। इस बार भी तीन दिवसीय शिविर मेें देश के तमाम राज्यों से किसान प्रतिनिधि शिरकत करेंगे। मेरठ से भी सैकड़ों किसान शिविर में हिस्सा लेंगे। इसकी तैयारी को लेकर बृहस्पतिवार को बटजेवरा स्थित शिव मंदिर प्रांगण में पंचायत भी हुई। गन्ना पेराई सत्र 2018-19 संपन्न होने के बाद भी शुगर इंडस्ट्री ने संपूर्ण गन्ना मूल्य भुगतान नहीं किया है। प्रदेश के गन्ना मूल्य भुगतान की बात करें तो अभी तक आधा ही भुगतान हो सका है। लोकसभा चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने जल्द ही भुगतान कराने का वादा किया था, लेकिन इंडस्ट्री पर कोई असर न होता देख भाकियू ने आंदोलन के लिए कमर कसनी शुरू कर दी है। इसके लिए भाकियू 16 जून से लेकर 18 जून तक हरिद्वार में किसान चिंतन शिविर का आयोजन करने जा रहा है। शिविर में देश के किसानों की समस्याओं और सरकार के स्तर पर उनके समाधान आदि के अलावा गन्ना बकाया भुगतान, फसलों के लिए समस्या बने आवारा पशुओं और सिंचाई के लिए रजवाहों की टेल तक पानी पहुंचाने की मांग को लेकर रणनीति बनेगी। बैठक में भाकियू जिलाध्यक्ष गजेंद्र सिंह ने किसानों को चिंतन शिविर की जानकारी दी गई और 15 जून को यहां से हरिद्वार के लिए भारी संख्या में रवाना होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि आवारा पशुओं का प्रशासन ने इंतजाम नहीं किया तो किसान पशुओं को पकड़कर ब्लाक, तहसील और नगर पंचायत कार्यालयों में बांध देंगे। अध्यक्षता जगत सिंह राठी ने की। इस मौके पर सतबीर जंगेठी, राजकुमार करनावल, जगजीत सिंह रावत, बबलू सिंह, जवाहर सिंह जिटौली, रवींद्र दौरालिया, विनोद जिटौली, मनोज त्यागी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन