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अस्तित्व खो रहे जिले के तालाब, अफसर कागजों में ही उलझे

Fri, 07 Jun 2019 02:24 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 07 Jun 2019 02:24 AM IST
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अस्तित्व खो रहे जिले के तालाब, अफसर कागजों में ही उलझे
अस्तित्व खो रहे जिले के तालाब, अफसर कागजों में ही उलझे
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मेरठ। जिले का जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार इस समस्या के समाधान के उपाय करने की बजाय सिर्फ मीटिंग और कागजी कार्रवाई में ही उलझे हैं। ऐसे में जिले के आधे से ज्यादा तालाब तो अपना अस्तित्व पूरी तरह खो चुके हैं, जो बचे हैं वे भी सफाई व देखरेख के अभाव में खत्म होने की कगार पर हैं।
मेरठ जिले के राजस्व अभिलेखों में करीब 2500 तालाब हैं। गांवों में ही कुछ तालाब नजर आते हैं, लेकिन शहर में इनका वजूद पूरी तरह मिट चुका है। मेरठ महानगर में गढ़ रोड़, एनएच-58, मवाना रोड सहित शहर के बीच में भी कई तालाब थे। इन तालाबों पर अब पक्के निर्माण हो चुके हैं। शहर में इन तालाबों को पाटकर अस्पताल, बड़े शिक्षण संस्थान सहित कई कालोनियां बना दी गई हैं। अहम बात ये है कि जब यह निर्माण हो रहा था तो तहसील और एमडीए सहित नगर निगम को भी निर्माण की पूरी जानकारी थी, लेकिन किसी ने कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई।
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शहर से अलग देहात की स्थिति भी कमोबेश यही है। देहात क्षेत्र में मुख्य मार्गों के किनारे जितने भी तालाब हैं, उनपर कब्जे होते जा रहे हैं। इन तालाबों को पाटकर दुकान और मकान बन गए हैं। तालाबों पर बेधड़क हुए इन निर्माणों के होते वक्त आला अधिकारियों से लेकर संबंधित विभागों के अधिकारी भी इन मार्गों से गुजरे, लेकिन किसी ने भी इन पर ध्यान देना गवारा नहीं समझा। परीक्षितगढ़, सरधना, मवाना, हापुड़, गढ़ रोड, किठौर-परीक्षितगढ़, मवाना-परीक्षितगढ़ मार्ग सहित तमाम ऐसे मुख्य मार्ग हैं, जहां पर कभी सड़क किनारे तालाब हुआ करते थे, लेकिन अब इन तालाबों पर कब्जे हो चुके हैं।
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कब्जा मुक्त कराने के नाम पर खानापूर्ति
तालाबों को कब्जा मुक्त कराना योगी सरकार की प्राथमिकता में था। सरकार आते ही जिला प्रशासन ने इस पर कार्रवाई भी की, लेकिन एक -दो माह के भीतर ही यह कवायद दम तोड़ गई। सिर्फ गांव देहात के इक्का दुक्का तालाबों पर जहां अस्थाई कब्जे थे , उन्हें ही हटवाकर अभियान की इतिश्री कर दी। हालांकि अब लोकसभा चुनाव समाप्त होने के बाद एक बार फिर से इस ओर कवायद शुरू हुई है और सरधना में 14 तालाबों पर कब्जा चिह्नित किया गया है। लेकिन अन्य जगहों पर भी तालाबों का कब्जा चिह्नित कर उन्हें हटवाया जायेगा, इसकी कोई ठोस योजना जिला प्रशासन के पास नहीं है।
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