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अतराड़ा में आवारा पशुओं को स्कूल में कैद किया
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अतराड़ा में आवारा पशुओं को स्कूल में कैद किया
खरखौदा। आवारा पशुओं से ग्रामीणों को छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। ये फसलें बर्बाद कर रहे हैं। इससे आजिज गांव अतराड़ा के ग्रामीणों ने कई दर्जन आवारा पशुओं को शुक्रवार को प्राथमिक विद्यालय में बंद कर दिया।
किसानों ने फसलों को नष्ट करने वाले आवारा पशुओं से छुटकारा दिलाने के लिए जनप्रतिनिधियों ने मांग की थी। इस पर प्रदेश सरकार द्वारा शहरों एवं नगर पंचायत स्तर पर आश्रय स्थल खोले थे। पशुओं की संख्या अधिक होने के कारण ये आश्रय स्थल जल्द भर गए। आवारा पशुओं की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ने से आश्रय स्थल कम पड़ गए। गांव-गांव में सैकड़ों की संख्या में झुंड में ये पशु किसानों की फसलें चट कर रहे हैं। सरकार द्वारा इनके रखरखाव के लिए बनाई गई योजना भी कारगर साबित नहीं हो पा रही है। गांव अतराड़ा निवासी ग्रामीणों ने सैकड़ों आवारा गोवंश को घेरकर प्राथमिक विद्यालय में कैद कर दिया। वहीं, ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार की ओर से इस दिशा में कदम नहीं उठाया गया तो अबकी बार पशुओं को अधिकारियों के दफ्तर में छोड़ देंगे।
पशुओं के लिए उचित व्यवस्था बनाने में अभी कुछ समय लगेगा। ग्रामीण अपने हाथ में कानून ले रहे हैं। ग्रामीणों ने यदि विद्यालय का ताला तोड़कर पशुओं को कैद किया है तो उच्चाधिकारियों से बात कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -राजीव वर्मा, खंड विकास अधिकारी खरखौदा
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गोवंश का खेती में इस्तेमाल नहीं
जोत कम होने तथा खेती का मशीनीकरण होने से गोवंश का उपयोग बहुत कम हो गया है। देसी नस्ल के गोवंश खेती के प्रयोग के लिए उपयुक्त थे। अब देसी नस्ल इस क्षेत्र से लगभग लुप्त हो गई है। अधिक दूध लेने के प्रयास में हाईब्रिड नस्ल लाई गई। मादा पशु ने दूध अधिक दिया, लेकिन नर खेती के इस्तेमाल के लायक नहीं रहे हैं।
बांझपन बढ़ा रहा आवारा पशुओं की तादाद
फसलों में रासायनिक खाद, कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल, अधिक दूूध देने से इन पशुओं में कमी आने के कारण, दूध के अनुरूप संतुलित पशु आहार नहीं मिलने तथा इन पशुओं में पैदा होने वाले परजीवियों से छुटकारा पाने के लिए दवा के इस्तेमाल समेत अन्य कारणों पशुओं में बांझपन बढ़ रहा है। 50 प्रतिशत से अधिक पशु दो बार गर्भधारण करने के बाद बांझ हो जाते हैं। इसके चलते किसान इन पशुओं को आवारा छोड़ देते हैं। इससे इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है।
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खरखौदा। आवारा पशुओं से ग्रामीणों को छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। ये फसलें बर्बाद कर रहे हैं। इससे आजिज गांव अतराड़ा के ग्रामीणों ने कई दर्जन आवारा पशुओं को शुक्रवार को प्राथमिक विद्यालय में बंद कर दिया।
किसानों ने फसलों को नष्ट करने वाले आवारा पशुओं से छुटकारा दिलाने के लिए जनप्रतिनिधियों ने मांग की थी। इस पर प्रदेश सरकार द्वारा शहरों एवं नगर पंचायत स्तर पर आश्रय स्थल खोले थे। पशुओं की संख्या अधिक होने के कारण ये आश्रय स्थल जल्द भर गए। आवारा पशुओं की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ने से आश्रय स्थल कम पड़ गए। गांव-गांव में सैकड़ों की संख्या में झुंड में ये पशु किसानों की फसलें चट कर रहे हैं। सरकार द्वारा इनके रखरखाव के लिए बनाई गई योजना भी कारगर साबित नहीं हो पा रही है। गांव अतराड़ा निवासी ग्रामीणों ने सैकड़ों आवारा गोवंश को घेरकर प्राथमिक विद्यालय में कैद कर दिया। वहीं, ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार की ओर से इस दिशा में कदम नहीं उठाया गया तो अबकी बार पशुओं को अधिकारियों के दफ्तर में छोड़ देंगे।
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पशुओं के लिए उचित व्यवस्था बनाने में अभी कुछ समय लगेगा। ग्रामीण अपने हाथ में कानून ले रहे हैं। ग्रामीणों ने यदि विद्यालय का ताला तोड़कर पशुओं को कैद किया है तो उच्चाधिकारियों से बात कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -राजीव वर्मा, खंड विकास अधिकारी खरखौदा
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गोवंश का खेती में इस्तेमाल नहीं
जोत कम होने तथा खेती का मशीनीकरण होने से गोवंश का उपयोग बहुत कम हो गया है। देसी नस्ल के गोवंश खेती के प्रयोग के लिए उपयुक्त थे। अब देसी नस्ल इस क्षेत्र से लगभग लुप्त हो गई है। अधिक दूध लेने के प्रयास में हाईब्रिड नस्ल लाई गई। मादा पशु ने दूध अधिक दिया, लेकिन नर खेती के इस्तेमाल के लायक नहीं रहे हैं।
बांझपन बढ़ा रहा आवारा पशुओं की तादाद
फसलों में रासायनिक खाद, कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल, अधिक दूूध देने से इन पशुओं में कमी आने के कारण, दूध के अनुरूप संतुलित पशु आहार नहीं मिलने तथा इन पशुओं में पैदा होने वाले परजीवियों से छुटकारा पाने के लिए दवा के इस्तेमाल समेत अन्य कारणों पशुओं में बांझपन बढ़ रहा है। 50 प्रतिशत से अधिक पशु दो बार गर्भधारण करने के बाद बांझ हो जाते हैं। इसके चलते किसान इन पशुओं को आवारा छोड़ देते हैं। इससे इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है।