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बस अड्डे को शहर से बाहर करने के विकल्प तलाशेगी रोडवेज
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बस अड्डे को शहर से बाहर करने के विकल्प तलाशेगी रोडवेज
रैपिड ट्रेन का स्टेशन प्रस्तावित होने पर भैसाली बस अड्डे को ले जाना पड़ेगा शहर से बाहर
मुख्यालय से एक जून को आ रही टीम, एनसीआरटीसी अधिकारियों के साथ करेगी संयुक्त सर्वे
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
रैपिड ट्रेन के प्रस्तावित भैसाली स्टेशन के लिए रोडवेज बस अड्डे को शहर से बाहर करने या अन्य कोई विकल्प तलाशने की कवायद तेज हो गई है। शनिवार को रोडवेज मुख्यालय से आने वाली अधिकारियों की टीम एनसीआरटीसी अधिकारियों के साथ मौके पर प्रोजेक्ट का सर्वे करेगी। इसके बाद इनकी एमडीए अधिकारियों और मंडलायुक्त के साथ बैठक होगी।
रैपिड ट्रेन परियोजना तेजी से परवान चढ़ रही है। एनसीआरटीसी ने रोडवेज के भैसाली बस अड्डे पर रैपिड ट्रेन स्टेशन प्रस्तावित किया है। इसके लिए एनसीआरटीसी रोडवेज बस अड्डे को शहर से बाहर करने की मांग की है। लेकिन रोडवेज बस अड्डे को बाहर नहीं ले जाना चाहता है। रोडवेज का कहना है कि उनके पास बस अड्डे के लिए उपयोगी जमीन नहीं है। साथ ही रैपिड स्टेशन से कनेक्टिविटी के लिए रोडवेज बस अड्डा जरूरी है। इस मामले का हल निकालने के लिए रोडवेज व एनसीआरटीसी अधिकारियों की टीम आज मेरठ पहुंचेगी। रोडवेज सूत्रों ने बताया कि लखनऊ मुख्यालय से जनरल मैनेजर राजीव चौहान और अधिशासी अभियंता मोहम्मद इरफान शनिवार सुबह मेरठ पहुंचेंगे। दोनों अधिकारी एनसीआरटीसी अधिकारियों के साथ मिलकर इस मुद्दे को सुलझाने का प्रयास करेंगे।
महायोजना में बाहर जाना था बस अड्डा
एमडीए की महायोजना 2020 में शहर के अंदर आबादी में आ चुके रोडवेज बस अड्डों को बाहर करने का प्रस्ताव किया गया था। लेकिन महायोजना खत्म होने का एक साल बचने पर भी इस दिशा में एमडीए एक इंच भी नहीं बढ़ा है। रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि जब तक बस अड्डे के लिए उपयोगी जमीन नहीं मिलेगी तब तक अड्डे को शिफ्ट नहीं किया जा सकता है।
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पांच करोड़ रुपये खर्च हो गए बस अड्डे पर
बस अड्डे को शहर से बाहर करने की जद्दोजहद के बीच इसके जीर्णोद्धार पर पांच करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। अगर बस अड्डे को बाहर करना था तो इतनी बड़ी राशि यहां क्यों खर्च की गई। यही नहीं बस अड्डे को शहर से बाहर करने का मामला हाईकोर्ट में भी चल रहा है।
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रैपिड ट्रेन का स्टेशन प्रस्तावित होने पर भैसाली बस अड्डे को ले जाना पड़ेगा शहर से बाहर
मुख्यालय से एक जून को आ रही टीम, एनसीआरटीसी अधिकारियों के साथ करेगी संयुक्त सर्वे
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
रैपिड ट्रेन के प्रस्तावित भैसाली स्टेशन के लिए रोडवेज बस अड्डे को शहर से बाहर करने या अन्य कोई विकल्प तलाशने की कवायद तेज हो गई है। शनिवार को रोडवेज मुख्यालय से आने वाली अधिकारियों की टीम एनसीआरटीसी अधिकारियों के साथ मौके पर प्रोजेक्ट का सर्वे करेगी। इसके बाद इनकी एमडीए अधिकारियों और मंडलायुक्त के साथ बैठक होगी।
रैपिड ट्रेन परियोजना तेजी से परवान चढ़ रही है। एनसीआरटीसी ने रोडवेज के भैसाली बस अड्डे पर रैपिड ट्रेन स्टेशन प्रस्तावित किया है। इसके लिए एनसीआरटीसी रोडवेज बस अड्डे को शहर से बाहर करने की मांग की है। लेकिन रोडवेज बस अड्डे को बाहर नहीं ले जाना चाहता है। रोडवेज का कहना है कि उनके पास बस अड्डे के लिए उपयोगी जमीन नहीं है। साथ ही रैपिड स्टेशन से कनेक्टिविटी के लिए रोडवेज बस अड्डा जरूरी है। इस मामले का हल निकालने के लिए रोडवेज व एनसीआरटीसी अधिकारियों की टीम आज मेरठ पहुंचेगी। रोडवेज सूत्रों ने बताया कि लखनऊ मुख्यालय से जनरल मैनेजर राजीव चौहान और अधिशासी अभियंता मोहम्मद इरफान शनिवार सुबह मेरठ पहुंचेंगे। दोनों अधिकारी एनसीआरटीसी अधिकारियों के साथ मिलकर इस मुद्दे को सुलझाने का प्रयास करेंगे।
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महायोजना में बाहर जाना था बस अड्डा
एमडीए की महायोजना 2020 में शहर के अंदर आबादी में आ चुके रोडवेज बस अड्डों को बाहर करने का प्रस्ताव किया गया था। लेकिन महायोजना खत्म होने का एक साल बचने पर भी इस दिशा में एमडीए एक इंच भी नहीं बढ़ा है। रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि जब तक बस अड्डे के लिए उपयोगी जमीन नहीं मिलेगी तब तक अड्डे को शिफ्ट नहीं किया जा सकता है।
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पांच करोड़ रुपये खर्च हो गए बस अड्डे पर
बस अड्डे को शहर से बाहर करने की जद्दोजहद के बीच इसके जीर्णोद्धार पर पांच करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। अगर बस अड्डे को बाहर करना था तो इतनी बड़ी राशि यहां क्यों खर्च की गई। यही नहीं बस अड्डे को शहर से बाहर करने का मामला हाईकोर्ट में भी चल रहा है।