{"_id":"5cec4999bdec2207382fb443","slug":"15589892572-meerut-news154","type":"story","status":"publish","title_hn":"दौराला पशु चिकित्सालय पर भराला के ग्रामीणों का हंगामा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दौराला पशु चिकित्सालय पर भराला के ग्रामीणों का हंगामा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दौराला पशु चिकित्सालय पर भराला के ग्रामीणों का हंगामा
दौराला। ग्राम भराला में प्रजापति समाज के एक परिवार में बीमारी के चलते घोड़ों की एक के बाद एक पांच मौत होने से सोमवार को भराला के ग्रामीणों में उबाल आ गया। प्रजापति समाज का गुस्सा फूटा तो सोमवार को सैकड़ों लोगों ने दौराला पशु चिकित्सालय का घेराव कर दिया। चिकित्साधिकारी के खिलाफ नारे बाजी करते हुए जमकर प्रदर्शन किया। गुस्साए ग्रामीणों ने चिकित्सक पर कई गंभीर आरोप भी लगाए। प्रधानों के समझाने के बाद ग्रामीण बामुश्किल शांत हुए।
भराला गांव में प्रजापति समाज के लोग ईट भट्ठे पर घोडे़-तांगे से मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। कुछ माह पूर्व ग्लैंडर्स नामक गंभीर बीमारी से गांव निवासी अनिल व मुन्नू के दो घोड़ों को सरकार के निर्देश पर दौराला पशु चिकित्सालय के चिकित्सकों ने इंजेक्शन देकर मार डाला था। पीड़ित को मुआवजा दिए जाने का प्रावधान बताया था। हालांकि कई माह बीतने के बाद भी पीड़ित परिवार को मुआवजा मिला। इस बीच दो माह पूर्व इसी परिवार के भूपेंद्र के दो घोड़ों की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घोड़ों की बीमारी के दौरान पशु चिकित्साधिकारी डॉ. कमल सिंह बुलाने के बाद भी उपचार करने नहीं पहुंचे थे। उन्होंने जूनियर चिकित्सकों को भेज दिया। जिसके चलते घोड़ों को उचित उपचार नहीं मिल सका था। जिससे उनकी उपचार के अभाव में मौत हो गई। इससे गुस्साए सैकड़ों लोगों ने सोमवार दोपहर पशु चिकित्सालय का घेराव कर दिया और प्रदर्शन करते हुए चिकित्सक के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए हंगामा कर दिया। चिकित्साधिकारी पर घोड़ों का मुआवजा दिलाने के नाम पर सुविधा शुल्क मांगने का आरोप लगाया। हंगामे की सूचना पाकर ग्राम प्रधान भराला उपेंद्र चौधरी ने ग्रामीणों का समर्थन करते हुए चिकित्सक पर लापरवाही के आरोप भी लगाए।
चिरौड़ी निवासी राजेंद्र ने बताया कि तीन माह पूर्व उसके घोडे़ की भी मौत हो गई थी। जिसका बीमा क्लेम दिलाने के नाम पर पशु चिकित्साधिकारी रुपये मांग कर रहा है, नहीं देने पर क्लेम से संबंधित कागजात नहीं करने की चेतावनी दे रहा है। ग्राम प्रधान के समझाने पर ग्रामीण शांत हुए। हंगामा करने वालों में अनिल, मन्नू, भूपेंद्र जगपाल, केशपाल, सुभाष, राजेंद्र, वीर सिंह, मनोज, सुरेंद्र, सुखवीरी, प्रतिमा, संगीता, संतोष, कोमल, रजनी, अंगूरी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
दौराला पशु चिकित्सालय प्रभारी डॉ. कमल सिंह का कहना है कि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं। मृत पशु का पोस्टमार्टम होने के बाद क्लेम मिलता है। पीड़ित राजेंद्र मृृृृृत पशु को दिखा नहीं पाया था। इसलिए उसके क्लेम के कागज, नहीं बनाए गए। ग्लैंडर्स से मारे गए पशुओं के मुआवजे के लिए प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जल्द ही उनका मुआवजा मिल जाएगा।
विज्ञापन
दौराला। ग्राम भराला में प्रजापति समाज के एक परिवार में बीमारी के चलते घोड़ों की एक के बाद एक पांच मौत होने से सोमवार को भराला के ग्रामीणों में उबाल आ गया। प्रजापति समाज का गुस्सा फूटा तो सोमवार को सैकड़ों लोगों ने दौराला पशु चिकित्सालय का घेराव कर दिया। चिकित्साधिकारी के खिलाफ नारे बाजी करते हुए जमकर प्रदर्शन किया। गुस्साए ग्रामीणों ने चिकित्सक पर कई गंभीर आरोप भी लगाए। प्रधानों के समझाने के बाद ग्रामीण बामुश्किल शांत हुए।
भराला गांव में प्रजापति समाज के लोग ईट भट्ठे पर घोडे़-तांगे से मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। कुछ माह पूर्व ग्लैंडर्स नामक गंभीर बीमारी से गांव निवासी अनिल व मुन्नू के दो घोड़ों को सरकार के निर्देश पर दौराला पशु चिकित्सालय के चिकित्सकों ने इंजेक्शन देकर मार डाला था। पीड़ित को मुआवजा दिए जाने का प्रावधान बताया था। हालांकि कई माह बीतने के बाद भी पीड़ित परिवार को मुआवजा मिला। इस बीच दो माह पूर्व इसी परिवार के भूपेंद्र के दो घोड़ों की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घोड़ों की बीमारी के दौरान पशु चिकित्साधिकारी डॉ. कमल सिंह बुलाने के बाद भी उपचार करने नहीं पहुंचे थे। उन्होंने जूनियर चिकित्सकों को भेज दिया। जिसके चलते घोड़ों को उचित उपचार नहीं मिल सका था। जिससे उनकी उपचार के अभाव में मौत हो गई। इससे गुस्साए सैकड़ों लोगों ने सोमवार दोपहर पशु चिकित्सालय का घेराव कर दिया और प्रदर्शन करते हुए चिकित्सक के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए हंगामा कर दिया। चिकित्साधिकारी पर घोड़ों का मुआवजा दिलाने के नाम पर सुविधा शुल्क मांगने का आरोप लगाया। हंगामे की सूचना पाकर ग्राम प्रधान भराला उपेंद्र चौधरी ने ग्रामीणों का समर्थन करते हुए चिकित्सक पर लापरवाही के आरोप भी लगाए।
विज्ञापन
चिरौड़ी निवासी राजेंद्र ने बताया कि तीन माह पूर्व उसके घोडे़ की भी मौत हो गई थी। जिसका बीमा क्लेम दिलाने के नाम पर पशु चिकित्साधिकारी रुपये मांग कर रहा है, नहीं देने पर क्लेम से संबंधित कागजात नहीं करने की चेतावनी दे रहा है। ग्राम प्रधान के समझाने पर ग्रामीण शांत हुए। हंगामा करने वालों में अनिल, मन्नू, भूपेंद्र जगपाल, केशपाल, सुभाष, राजेंद्र, वीर सिंह, मनोज, सुरेंद्र, सुखवीरी, प्रतिमा, संगीता, संतोष, कोमल, रजनी, अंगूरी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
दौराला पशु चिकित्सालय प्रभारी डॉ. कमल सिंह का कहना है कि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं। मृत पशु का पोस्टमार्टम होने के बाद क्लेम मिलता है। पीड़ित राजेंद्र मृृृृृत पशु को दिखा नहीं पाया था। इसलिए उसके क्लेम के कागज, नहीं बनाए गए। ग्लैंडर्स से मारे गए पशुओं के मुआवजे के लिए प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जल्द ही उनका मुआवजा मिल जाएगा।