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बातनौर के ग्रामीणों का तहसील में हंगामा
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बातनौर के ग्रामीणों का तहसील में हंगामा
मवाना। गांव बातनौर के ग्रामीणों ने सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता के खिलाफ तहसील में जमकर हंगामा किया। वहीं, डीलर की जांच कराकर दुकान को निरस्त करने की मांग की। उपजिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए खंड विकास अधिकारी को जांच के आदेश दिए हैं।
गांव बातनौर निवासी ग्रामीण सोमवार को तहसील पहुंचे तथा सरकारी सस्ता गल्ला विक्र्ेता के खिलाफ हंगामा करना शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि सस्ता गल्ला विक्रेता राशन एवं मिट्टी का तेल देने से इनकार करता है। इतना ही नहीं गालियां देकर अपमानित करता है। इन्हीं आरोपों के चलते कई बार दुकान निरस्त हुई है।
सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता के खिलाफ बीती 16 मई को शिकायत पत्र दिया था। इसकी जांच नायब तहसीलदार को दी गई थी। नायब तहसीलदार आज तक जांच करने के लिए गांव नहीं पहुंचे हैं। 25 मई को जांच के संबंध में नायब तहसीलदार से मिले। उनका जवाब था कि जब समय मिलेगा तब जांच करेंगे। ग्रामीणों का आरोप था कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि राशन डीलर को बचाने का प्रयास अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है। इसके बाद एक शिकायत पत्र एसडीएम अंकुर श्रीवास्तव को दिया। एसडीएम ने दोबारा से जांच के लिए नायब तहसीलदार को आदेश दिए तो ग्रामीण बिगड़ गए तथा पुन: हंगामा कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उनको नायब तहसीलदार से जांच नहीं करानी है। इस पर एसडीएम ने खंड विकास अधिकारी को जांचकर जांच रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं। हंगामा करने वालों में अब्दुल समद, प्रमोद, सोलाल सैनी, मनोज आदि काफी संख्या में थे।
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मवाना। गांव बातनौर के ग्रामीणों ने सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता के खिलाफ तहसील में जमकर हंगामा किया। वहीं, डीलर की जांच कराकर दुकान को निरस्त करने की मांग की। उपजिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए खंड विकास अधिकारी को जांच के आदेश दिए हैं।
गांव बातनौर निवासी ग्रामीण सोमवार को तहसील पहुंचे तथा सरकारी सस्ता गल्ला विक्र्ेता के खिलाफ हंगामा करना शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि सस्ता गल्ला विक्रेता राशन एवं मिट्टी का तेल देने से इनकार करता है। इतना ही नहीं गालियां देकर अपमानित करता है। इन्हीं आरोपों के चलते कई बार दुकान निरस्त हुई है।
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सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता के खिलाफ बीती 16 मई को शिकायत पत्र दिया था। इसकी जांच नायब तहसीलदार को दी गई थी। नायब तहसीलदार आज तक जांच करने के लिए गांव नहीं पहुंचे हैं। 25 मई को जांच के संबंध में नायब तहसीलदार से मिले। उनका जवाब था कि जब समय मिलेगा तब जांच करेंगे। ग्रामीणों का आरोप था कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि राशन डीलर को बचाने का प्रयास अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है। इसके बाद एक शिकायत पत्र एसडीएम अंकुर श्रीवास्तव को दिया। एसडीएम ने दोबारा से जांच के लिए नायब तहसीलदार को आदेश दिए तो ग्रामीण बिगड़ गए तथा पुन: हंगामा कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उनको नायब तहसीलदार से जांच नहीं करानी है। इस पर एसडीएम ने खंड विकास अधिकारी को जांचकर जांच रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं। हंगामा करने वालों में अब्दुल समद, प्रमोद, सोलाल सैनी, मनोज आदि काफी संख्या में थे।
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