{"_id":"5bd76943bdec226930330276","slug":"15408438047-kithor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नवल गांव का पशु अस्पताल बदहाल के कगार पर पहुच चुका है ।","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नवल गांव का पशु अस्पताल बदहाल के कगार पर पहुच चुका है ।
Updated Tue, 30 Oct 2018 01:44 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बौंद्रा। गांव नवल स्थित पशु सेवा केन्द्र में डॉक्टर और फार्मासिस्ट की तैनाती सिर्फ कागजों में है। पशु अस्पताल पर कोई कर्मचारी नहीं आता है। इसके चलते केंद्र खंडहर हो चुका है।
यहां समुचित व्यवस्था नहीं होने से बेजुबानों का इलाज नहीं हो पा रहा है। पशुपालक गाय, बैल, बकरी, भैंस के बीमार होने पर अस्पतालों की ओर दौड़ लगाते हैं। हालांकि वहां डॉक्टर नहीं मिलते हैं। यह देखने में अस्पताल जैसा दिखता नहीं है। वहां वर्षों से बंद पड़ा दरवाजा टूट चुका है। यह इतना बताने के लिए काफी है कि यहां तैनात कर्मचारी अपने कर्तव्यों के प्रति कितने लापरवाह हैं। अंदर प्रवेश करते ही घुटने तक उगे खरपतवार एवं गंदगी देखकर ऐसा लगता है कि यहां कभी कोई पशुपालक मवेशियों के इलाज के लिए आया ही नहीं है। यहां एक डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट की तैनाती है। इसके बावजूद गांव ललियाना, अतलपुर, बौंद्रा, नवल, गेसूपुर, भगवानपुर बांगर, पशुपालकों को झोलाछाप से इलाज कराना मजबूरी हो गई है। वहीं, इस संबंध में शाहजहांपुर पशु चिकित्साधिकारी केके राणा ने बताया कि उक्त पशु सेवा केंद्र में डॉ. शिवकुमार की तैनाती है। अब उनकी ब्लॉक स्तर पर शासन द्वारा एक माह के लिए तैनाती की गई है। जिससे पशु सेवा केंद्र बंद है। वहीं, इस संबंध में ग्रामीण जर्रार अहमद, राकेश कुमार, अमित कुमार, शकील अहमद, सोमपाल सिंह, हरवीर सिंह का कहना है कि दो वर्ष से भी अधिक समय हो गया। कभी पशु सेवा केंद्र पर डॉक्टर ही नहीं आया। जिससे केंद्र में सरकारी नल खराब है। परिसर में घास उगी हुई है तथा दरवाजे उखडे़ हुए हैं। मुख्य दरवाजा कभी बंद नहीं होता जिससे लेकर ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने केंद्र पर डॉक्टर तैनात किया। लाखों की लागत से बनाया पशु सेवा केंद्र उद्देश्य पूरा नहीं कर पा रहा है। जिससे ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार के मुखिया को अवगत कराने की चेतावनी दी है।
विज्ञापन
यहां समुचित व्यवस्था नहीं होने से बेजुबानों का इलाज नहीं हो पा रहा है। पशुपालक गाय, बैल, बकरी, भैंस के बीमार होने पर अस्पतालों की ओर दौड़ लगाते हैं। हालांकि वहां डॉक्टर नहीं मिलते हैं। यह देखने में अस्पताल जैसा दिखता नहीं है। वहां वर्षों से बंद पड़ा दरवाजा टूट चुका है। यह इतना बताने के लिए काफी है कि यहां तैनात कर्मचारी अपने कर्तव्यों के प्रति कितने लापरवाह हैं। अंदर प्रवेश करते ही घुटने तक उगे खरपतवार एवं गंदगी देखकर ऐसा लगता है कि यहां कभी कोई पशुपालक मवेशियों के इलाज के लिए आया ही नहीं है। यहां एक डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट की तैनाती है। इसके बावजूद गांव ललियाना, अतलपुर, बौंद्रा, नवल, गेसूपुर, भगवानपुर बांगर, पशुपालकों को झोलाछाप से इलाज कराना मजबूरी हो गई है। वहीं, इस संबंध में शाहजहांपुर पशु चिकित्साधिकारी केके राणा ने बताया कि उक्त पशु सेवा केंद्र में डॉ. शिवकुमार की तैनाती है। अब उनकी ब्लॉक स्तर पर शासन द्वारा एक माह के लिए तैनाती की गई है। जिससे पशु सेवा केंद्र बंद है। वहीं, इस संबंध में ग्रामीण जर्रार अहमद, राकेश कुमार, अमित कुमार, शकील अहमद, सोमपाल सिंह, हरवीर सिंह का कहना है कि दो वर्ष से भी अधिक समय हो गया। कभी पशु सेवा केंद्र पर डॉक्टर ही नहीं आया। जिससे केंद्र में सरकारी नल खराब है। परिसर में घास उगी हुई है तथा दरवाजे उखडे़ हुए हैं। मुख्य दरवाजा कभी बंद नहीं होता जिससे लेकर ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने केंद्र पर डॉक्टर तैनात किया। लाखों की लागत से बनाया पशु सेवा केंद्र उद्देश्य पूरा नहीं कर पा रहा है। जिससे ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार के मुखिया को अवगत कराने की चेतावनी दी है।
विज्ञापन