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प्रदेश सरकार की उपेक्षा का शिकार नेशनल शूटर

Wed, 11 Jul 2018 10:24 PM IST
Updated Wed, 11 Jul 2018 10:24 PM IST
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प्रदेश सरकार की उपेक्षा का शिकार नेशनल शूटर
शरद गुप्ता
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मवाना। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाने वाली शूटर प्रदेश सरकार की उपेक्षा का शिकार है। प्रदेश सरकार से प्रोत्साहन नहीं मिलने की वजह से नेशनल शूटर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं में शिरकत नहीं कर पा रही है। हालांकि दर्जनों मेडल जीतने वाली शूटर ने सरकार से मदद नहीं मिलने के बावजूद हार नहीं मानी है।
मूल रूप से बहसूमा थाना क्षेत्र के गांव अकबरपुर सादात निवासी रुबीना सैफी पुत्र हाजी अब्दुल गफ्फार नेशनल शूटर है। हाजी अब्दुल गफ्फार के पांच बेटों-बेटियों में सबसे बड़ी रुबीना ने इंटरमीडिएट तक पढ़ाई बहसूमा में ही की। इसके बाद उसने कृषक पीजी कॉलेज में दाखिला ले लिया। यहां एनसीसी ज्वाइन करने के बाद उसे शूटिंग की प्रेरणा मिली। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। रुबीना ने बताया कि 2012 से लेकर 2014 तक उसने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 50 मीटर राइफल प्रतियोगिता में भाग लिया और देश के लिए मेडल जीते। 31 दिसंबर 2016 में उसे स्पोर्ट्स कोटे से बीएसएफ में इंदौर में नौकरी मिल गई। इसके बाद उसने बीएसएफ की ओर से खेलना शुरू किया। उसे मलाल है कि प्रदेश सरकार ने उसकी मदद नहीं की।
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टीम इंडिया का हिस्सा रह चुकी
राष्ट्रीय शूटर रुबीना ने बताया कि वह वर्ष 2014 में टीम इंडिया का हिस्सा रह चुकी है। इस दौरान राष्ट्रीय स्तर पर उसने देश के लिए गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद भी सरकार की उपेक्षा उस पर बरकरार रही। रुबीना ने बताया कि वह फिलहाल बीएसएफ की ओर से तैयारी कर रही है।
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नहीं बन सका लाइसेंस
शूटर रुबीना ने बताया कि उसके पिता कारपेंटर हैं। उन्हें 400 से 500 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिलती है। इसके बावजूद उसके पिता घर के साथ-साथ शूटिंग का खर्च भी उठाते रहे हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण आज तक उसका लाइसेंस नहीं बन सका है। वह राइफल भी नहीं खरीद पाई है। काफी चक्कर काटने के बाद भी कोई फायदा नहीं मिला है। वह अपनी किट नहीं होने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं खेल पा रही है।
ओलंपिक में गोल्ड मेडल लाने का सपना
रुबीना ने बताया कि 2020 में होने वाले ओलंपिक में खेलने का उसका सपना है। रुबीना का कहना है कि वह देश के लिए गोल्ड मेडल लाना चाहती है। उससे पहले लाइसेंस व राइफल होना जरूरी है। फिलहाल वह गोवा में होने वाली प्रतियोगिता के लिए तैयारी कर रही है। उसने बताया कि यूपी की सूची में उसका नाम आने की पूरी संभावना है, क्योंकि रैंक में वह अव्वल है।

दो साल तक छोड़ी शूटिंग
सरकार की उपेक्षा के चलते रुबीना ने 2015 से 2016 तक शूटिंग छोड़ दी थी। इस दौरान उसे शूटिंग की कमी काफी खली। रुबीना ने बताया कि वह काफी दुखी थी कि पसंदीदा खेल को छोड़ रही है। 2016 में बीएसएफ में ट्रायल के दौरान उसने 300 में से 293 अंक प्राप्त किए। इसके बल पर उसे बीएसएफ में स्पोर्ट्स कोटे से नौकरी मिली। हालांकि शुरू में बीएसएफ की ओर से भी लाइसेंस एवं राइफल को प्राथमिकता दी गई थी।
2012-न्यू दिल्ली नेशनल प्रतियोगिता में गोल्ड
2013-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जर्मनी व चेक गणराज्य में पांचवीं रैंक
2013-2014-इंडिया टीम के साथ नेशनल प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल
मुख्य बातें
लाइसेंस व राइफल न खरीद पाने के कारण नहीं खेल पा रही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं
टीम इंडिया का भी हिस्सा रह चुकी है रुबीना सैफी
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