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रोजे जहन्नुम की आग से निजात दिलाते है।
Updated Sat, 02 Jun 2018 02:24 AM IST
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जुम्मे की नमाज अदा कराई
माछरा। रमजान-उल-मुबारक के तीसरे जुम्मे की नमाज मस्जिदों व मदरसों में अदा की गई। जुम्मे की नमाज के दौरान 30 रोजे के अलग-अलग तीनों चरणों के महत्व पर रोशनी डाली गई।
आज दोपहर जुम्मे की नमाज क्षेत्र के मुंडाली, खंद्रावली, शाफियाबाद लोटी, अजराड़ा, आड़, नंगलामल, मऊखास, मेघराजपुर, सिसौली, रछौती आदि गांवों की मस्जिदों एवं मदरसों मे अदा की गई। जुम्मे के कारण मस्जिदों, मदरसों मे नमाजियों की तादाद भी काफी रही और जुम्मे का रोजा रखने में नन्हे-मुन्हे बच्चों ने भी काफी दिलचस्पी दिखाई तथा अपने जज्बात का मुजाहिरा किया। गांव खंद्रावली में स्थित इस्लामिया मदरसा की मौलाना हाफिज मोहम्मद सातिब ने नमाज के दौरान रमजान की अजमत (महिमा) पर रोशनी डालकर तकरीर करते हुए बताया कि तीस रोजों में पहले दस रोजे गुनाम से माफी के लिए है इन दिनों रोजे रखकर तथा सच्चे दिल से पशेमानी करने वालों को अल्लाह पाक माफ कर देते है।
मौलाना सातिब ने बीच के दस रोजों की अजमत का जिक्र करते हुए कहा कि यह रोजे जहन्नुम की आग से निजात दिलाते है। अल्लाह से माफी पाकर गुनाहगारों के गुनाह माफ हो जाते है और जहन्नुम की आग रोजेदारों के लिए ठंडी करने का वायदा अल्लाह पाक का है।
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इस तरह तीसरे चरण के आखिरी दस रोजों के बारे में मौलाना इसरार कासमी ने कुरआन पाक के हवाले से बताया कि यह रोजे जन्नत में दाखिले के लिए रोजेेदार की मदद करते है।
इस दौरान हाजी आरिफ प्रधान, हाजी इसराक, मंसूर, जमील अहमद, मरगूब, आदि रहे।
सरूरपुर। शुक्रवार को जुमे की नमाज से पहले मदीना मस्जिद दमगढ़ी में बयान फरामते हुए हाफिज नूर मोहम्मद ने बताया कि रमजान का महीना बरकत और पाकीजगी का ऐसा महीना है जिसमें अल्लाह की रहमत बरसती हैं। दूसरे असरे में रोजेदार अपने पाक परवरदिगार से अपने गुनाहों की तौबा करते हुए माफ कराता हैं। जिसमें अल्लाह ताआला की रहमत इस असरे में अपने बंदों के गुनाह माफ करता हैं। इंसान को अपनी जान, माल व वक्त से खुदा के रास्ते मे निकलकर दीन के लिए मेहनत करनी चाहिए। इस महीने में मुसलमान रोजे रखकर परहेजगारी का इम्तिहान देते है जिससे दूसरों की भूख प्यास का अहसास किया जा सके। मौलाना युसुफ कासमी ने बताया कि रोजे का मकसद महज भूख प्यास नहीं है बल्कि बदन के हर हिस्से रोजा पाबंदी के साथ होना चाहिए। रोजे में बुरा देखना, बुरा सुनना सभी हिस्सों को गलत कामों से दूर रखना फर्ज है। रोजा इन तीनों चीजों पर काबू रखने की इबादत हैं। लिहाजा अल्लाह ने रमजान का महीना सादगी के साथ इबादत के लिए तय किया गया हैं। उन्होंने बताया कि रमजान के मायने संपन्न लोगों को भी भूख-प्यास का अहसास कराकर पूरी कौम को अल्लाह ताआला के करीब लाकर नेक राह पर डालना हैं। साथ ही यह महीना इंसान को अपने अंदर झांकने और खुद को इम्तिहान के लिए सुधार करने का मौका भी देता हैं। क्षेत्र के करनावल, हर्रा, खिवाई, दमगढ़ी, जसड़ सुलताननगर, पांचली बुजुर्ग, नारंगपुर, मैनापूठी, रोहटा, सलाहपुर, पूठ आदि गांवों में लोगों ने जुमे की नमाज में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
माछरा। रमजान-उल-मुबारक के तीसरे जुम्मे की नमाज मस्जिदों व मदरसों में अदा की गई। जुम्मे की नमाज के दौरान 30 रोजे के अलग-अलग तीनों चरणों के महत्व पर रोशनी डाली गई।
आज दोपहर जुम्मे की नमाज क्षेत्र के मुंडाली, खंद्रावली, शाफियाबाद लोटी, अजराड़ा, आड़, नंगलामल, मऊखास, मेघराजपुर, सिसौली, रछौती आदि गांवों की मस्जिदों एवं मदरसों मे अदा की गई। जुम्मे के कारण मस्जिदों, मदरसों मे नमाजियों की तादाद भी काफी रही और जुम्मे का रोजा रखने में नन्हे-मुन्हे बच्चों ने भी काफी दिलचस्पी दिखाई तथा अपने जज्बात का मुजाहिरा किया। गांव खंद्रावली में स्थित इस्लामिया मदरसा की मौलाना हाफिज मोहम्मद सातिब ने नमाज के दौरान रमजान की अजमत (महिमा) पर रोशनी डालकर तकरीर करते हुए बताया कि तीस रोजों में पहले दस रोजे गुनाम से माफी के लिए है इन दिनों रोजे रखकर तथा सच्चे दिल से पशेमानी करने वालों को अल्लाह पाक माफ कर देते है।
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मौलाना सातिब ने बीच के दस रोजों की अजमत का जिक्र करते हुए कहा कि यह रोजे जहन्नुम की आग से निजात दिलाते है। अल्लाह से माफी पाकर गुनाहगारों के गुनाह माफ हो जाते है और जहन्नुम की आग रोजेदारों के लिए ठंडी करने का वायदा अल्लाह पाक का है।
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इस तरह तीसरे चरण के आखिरी दस रोजों के बारे में मौलाना इसरार कासमी ने कुरआन पाक के हवाले से बताया कि यह रोजे जन्नत में दाखिले के लिए रोजेेदार की मदद करते है।
इस दौरान हाजी आरिफ प्रधान, हाजी इसराक, मंसूर, जमील अहमद, मरगूब, आदि रहे।
सरूरपुर। शुक्रवार को जुमे की नमाज से पहले मदीना मस्जिद दमगढ़ी में बयान फरामते हुए हाफिज नूर मोहम्मद ने बताया कि रमजान का महीना बरकत और पाकीजगी का ऐसा महीना है जिसमें अल्लाह की रहमत बरसती हैं। दूसरे असरे में रोजेदार अपने पाक परवरदिगार से अपने गुनाहों की तौबा करते हुए माफ कराता हैं। जिसमें अल्लाह ताआला की रहमत इस असरे में अपने बंदों के गुनाह माफ करता हैं। इंसान को अपनी जान, माल व वक्त से खुदा के रास्ते मे निकलकर दीन के लिए मेहनत करनी चाहिए। इस महीने में मुसलमान रोजे रखकर परहेजगारी का इम्तिहान देते है जिससे दूसरों की भूख प्यास का अहसास किया जा सके। मौलाना युसुफ कासमी ने बताया कि रोजे का मकसद महज भूख प्यास नहीं है बल्कि बदन के हर हिस्से रोजा पाबंदी के साथ होना चाहिए। रोजे में बुरा देखना, बुरा सुनना सभी हिस्सों को गलत कामों से दूर रखना फर्ज है। रोजा इन तीनों चीजों पर काबू रखने की इबादत हैं। लिहाजा अल्लाह ने रमजान का महीना सादगी के साथ इबादत के लिए तय किया गया हैं। उन्होंने बताया कि रमजान के मायने संपन्न लोगों को भी भूख-प्यास का अहसास कराकर पूरी कौम को अल्लाह ताआला के करीब लाकर नेक राह पर डालना हैं। साथ ही यह महीना इंसान को अपने अंदर झांकने और खुद को इम्तिहान के लिए सुधार करने का मौका भी देता हैं। क्षेत्र के करनावल, हर्रा, खिवाई, दमगढ़ी, जसड़ सुलताननगर, पांचली बुजुर्ग, नारंगपुर, मैनापूठी, रोहटा, सलाहपुर, पूठ आदि गांवों में लोगों ने जुमे की नमाज में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।