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रमजान के दूसरे जुमे पर अकीदतमंदों ने वतन की सलामती की दुआ मांगी
Updated Fri, 25 May 2018 08:52 PM IST
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सरूरपुर। पाक रमजान माह के दूसरे जुमे की नमाज में अकीदतमंदों ने अल्लाह ताआला से वतन में अमन-चैन की दुआ मांगते हुए अपने गुनाहों से तौबा की। जुमे की नमाज क्षेत्र की मस्जिदों में बड़ी तादाद में अकीदतमंदों ने अदा की।
जुमे की नमाज से पहले मस्जिद में बयान फरामते हुए मौलाना इरशाद ने बताया कि रमजान का महीना बरकत और पाकीजगी का है। इसमें अल्लाह की रहमत बरसती है। जिसका दूसरा असरा शुरू होने वाला है। जिसमें रोजेदार अपने पाक परवरदिगार से अपने गुनाहों की तौबा करते हुए माफ कराता है। जिसमें अल्लाह ताआला की रहमत इस असरे में अपने बंदों के गुनाह माफ करता हैं। इंसान को अपनी जान, माल व वक्त से खुदा के रास्ते में निकलकर दीन के लिए मेहनत करनी चाहिए। इस महीने में मुसलमान रोजे रखकर परहेजगारी का इम्तिहान देते हैं ताकि दूसरों की भूख प्यास का अहसास किया जा सके। मदीना मस्जिद दमगढ़ी में कारी गुल सनव्वर ने बताया कि रोजे का मकसद महज भूख प्यास नहीं है बल्कि बदन के हर हिस्से रोजा पाबंदी के साथ होना चाहिए। यानि रोजे में बुरा देखना, बुरा सुनना सभी हिस्सों को गलत कामों से दूर रखना फर्ज है। रोजा इन तीनों चीजों पर काबू रखने की इबादत है। रोजे के दौरान झूठ बोलने, चुगली करने, किसी पर बुरी निगाह डालने व हर छोटी से छोटी बुराई से दूर रहना जरूरी है। लिहाजा अल्लाह ने रमजान का महीना सादगी के साथ इबादत के लिए तय किया गया है। उन्होंने बताया कि रमजान के मायने संपन्न लोगों को भी भूख-प्यास का अहसास कराकर पूरी कौम को अल्लाह ताआला के करीब लाकर नेक राह पर डालना है। साथ ही यह महीना इंसान को अपने अंदर झांकने और खुद को इम्तिहान के लिए सुधार करने का मौका भी देता हैं। क्षेत्र के करनावल, हर्रा, खिवाई, मैनापूठी, दमगढ़ी, जसड़ सुलताननगर , पांचली बुजुर्ग, नारंगपुर, रोहटा, पूठ, कैथवाड़ी, सलाहपुर आदि गांवों में लोगों ने जुमे की नमाज में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।
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जुमे की नमाज से पहले मस्जिद में बयान फरामते हुए मौलाना इरशाद ने बताया कि रमजान का महीना बरकत और पाकीजगी का है। इसमें अल्लाह की रहमत बरसती है। जिसका दूसरा असरा शुरू होने वाला है। जिसमें रोजेदार अपने पाक परवरदिगार से अपने गुनाहों की तौबा करते हुए माफ कराता है। जिसमें अल्लाह ताआला की रहमत इस असरे में अपने बंदों के गुनाह माफ करता हैं। इंसान को अपनी जान, माल व वक्त से खुदा के रास्ते में निकलकर दीन के लिए मेहनत करनी चाहिए। इस महीने में मुसलमान रोजे रखकर परहेजगारी का इम्तिहान देते हैं ताकि दूसरों की भूख प्यास का अहसास किया जा सके। मदीना मस्जिद दमगढ़ी में कारी गुल सनव्वर ने बताया कि रोजे का मकसद महज भूख प्यास नहीं है बल्कि बदन के हर हिस्से रोजा पाबंदी के साथ होना चाहिए। यानि रोजे में बुरा देखना, बुरा सुनना सभी हिस्सों को गलत कामों से दूर रखना फर्ज है। रोजा इन तीनों चीजों पर काबू रखने की इबादत है। रोजे के दौरान झूठ बोलने, चुगली करने, किसी पर बुरी निगाह डालने व हर छोटी से छोटी बुराई से दूर रहना जरूरी है। लिहाजा अल्लाह ने रमजान का महीना सादगी के साथ इबादत के लिए तय किया गया है। उन्होंने बताया कि रमजान के मायने संपन्न लोगों को भी भूख-प्यास का अहसास कराकर पूरी कौम को अल्लाह ताआला के करीब लाकर नेक राह पर डालना है। साथ ही यह महीना इंसान को अपने अंदर झांकने और खुद को इम्तिहान के लिए सुधार करने का मौका भी देता हैं। क्षेत्र के करनावल, हर्रा, खिवाई, मैनापूठी, दमगढ़ी, जसड़ सुलताननगर , पांचली बुजुर्ग, नारंगपुर, रोहटा, पूठ, कैथवाड़ी, सलाहपुर आदि गांवों में लोगों ने जुमे की नमाज में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।
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