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सरकार ने पांच रुपये जो बढाया है वह मिल मालिकों को सहायता दी है।
Updated Thu, 03 May 2018 08:08 PM IST
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मवाना। सरकार द्वारा गन्ना किसान को पांच रुपये की छूट देने की बाबत किसान नेताओं का कहना है कि सरकार ने गन्ना किसान के नाम पर मिल मालिकों और उद्योगपतियों को राहत दी है।
उल्लेखनीय है कि इस बार किसान के लिए गन्ने की पैदावार सिरदर्द साबित हुई है। किसान गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर पेराई सत्र के अंतिम समय तक इस जुगाड़ में लगा है कि किसी प्रकार उसका सारा गन्ना मिल में चला जाए। जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक गुहार लगाने के बाद भी उसकी पर्ची की समस्या अंत तक समय समाधान नहीं हो सका है।
किसान नेता हरवीर सिंह निलौहा ने बताया कि सरकार ने घोषणा की थी कि पांच रुपये क्विंटल के हिसाब से किसान को भुगतान दिया जाएगा। उनका कहना है कि सरकार ने इस प्रकार की घोषणा करके किसान तथा जनता दोनों को बरगलाया है। यह पैसा किसान को नहीं बल्कि मिल मालिकों की सहायता के लिए दिया है। जिससे किसान का कोई भला नहीं होने वाला है। केवल उद्योगपतियों का ही भला होगा। सरकार ने किसानों को धोखा दिया है। वहीं, किसान सभा के मंडलीय सचिव और किसान नेता जितेंद्र सिंह का कहना है कि सरकार जनता की गाढ़ी कमाई से उद्योगपतियों की सहायता कर रही है। पांच रुपये अतिरिक्त भुगतान की घोषणा किसान के नाम पर की है। हालांकि इसका सीधा लाभ मिल मालिकों को होगा।
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मवाना शुगर मिल पेराई सत्र समाप्ति की ओर
मवाना। मवाना शुगर मिल पेराई सत्र के अंत की ओर बढ़ने लगी है। मिल कभी भी बंद हो सकती है। मिल प्रबंधन दो नोटिस इस संबंध में जारी कर चुका है। वहीं, मिल के महाप्रबंधक प्रमोद बालियान का सरकार की घोषणा के संबंध में कहना है कि यदि प्रदेश सरकार भी एसएपी में कुछ घोषणा कर दे तो मिले घाटे से उबर सकती हैं।
उल्लेखनीय है कि अब भी मिल क्षेत्र में किसानों का काफी गन्ना बकाया खड़ा हुआ है। जनप्रतिनिधियों तथा गन्ना विभाग के आला अधिकारियों द्वारा किसानों को आश्वस्त किया गया था कि जब तक किसानों का पूरा गन्ना नहीं डल जाता तब तक मिल बंद नहीं होगी। अब यह कोरा आश्वासन नजर आने लगा है।
मिल प्रबंधक प्रमोद बालियान का मिल का पेराई सत्र खत्म किए जाने की बाबत कहना है कि मिल प्रबंधन द्वारा 30 अप्रैल और चार मई को नोटिस जारी कर मिल बंद किए जाने की बाबत आला अधिकारियों को अवगत कराया दिया है। तीसरा नोटिस संभवत: चार मई को जारी होगा। इसके बाद स्पष्ट हो जाएगा कि मिल कब बंद होगा। इससे स्पष्ट है कि मिल अब बंद होने के बहुत करीब पहुंच गया है। वहीं, उन्होंने बताया कि इस बार मिल ने 1 करोड़ 96 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की। हालांकि बीते पेराई सत्र में एक करोड़ 48 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की थी। इस बार 44 लाख बोरे चीनी का उत्पादन किया है, जबकि बीते वर्ष 16 बोरे चीनी का उत्पादन किया था। वहीं, आज सरकार द्वारा की गई घोषणा की बाबत पूछे जाने पर प्रमोद बालियान का कहना था कि इससे मिलों को लाभ पहुंचेगा। चीनी मिलें घाटे में चल रही हैं। यदि केंद्र सरकार की भांति प्रदेश सरकार भी एसएपी में कुछ सहायता दे दे तो प्रदेश की मिलें घाटे से ऊबर जाएंगी।
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उल्लेखनीय है कि इस बार किसान के लिए गन्ने की पैदावार सिरदर्द साबित हुई है। किसान गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर पेराई सत्र के अंतिम समय तक इस जुगाड़ में लगा है कि किसी प्रकार उसका सारा गन्ना मिल में चला जाए। जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक गुहार लगाने के बाद भी उसकी पर्ची की समस्या अंत तक समय समाधान नहीं हो सका है।
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किसान नेता हरवीर सिंह निलौहा ने बताया कि सरकार ने घोषणा की थी कि पांच रुपये क्विंटल के हिसाब से किसान को भुगतान दिया जाएगा। उनका कहना है कि सरकार ने इस प्रकार की घोषणा करके किसान तथा जनता दोनों को बरगलाया है। यह पैसा किसान को नहीं बल्कि मिल मालिकों की सहायता के लिए दिया है। जिससे किसान का कोई भला नहीं होने वाला है। केवल उद्योगपतियों का ही भला होगा। सरकार ने किसानों को धोखा दिया है। वहीं, किसान सभा के मंडलीय सचिव और किसान नेता जितेंद्र सिंह का कहना है कि सरकार जनता की गाढ़ी कमाई से उद्योगपतियों की सहायता कर रही है। पांच रुपये अतिरिक्त भुगतान की घोषणा किसान के नाम पर की है। हालांकि इसका सीधा लाभ मिल मालिकों को होगा।
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मवाना शुगर मिल पेराई सत्र समाप्ति की ओर
मवाना। मवाना शुगर मिल पेराई सत्र के अंत की ओर बढ़ने लगी है। मिल कभी भी बंद हो सकती है। मिल प्रबंधन दो नोटिस इस संबंध में जारी कर चुका है। वहीं, मिल के महाप्रबंधक प्रमोद बालियान का सरकार की घोषणा के संबंध में कहना है कि यदि प्रदेश सरकार भी एसएपी में कुछ घोषणा कर दे तो मिले घाटे से उबर सकती हैं।
उल्लेखनीय है कि अब भी मिल क्षेत्र में किसानों का काफी गन्ना बकाया खड़ा हुआ है। जनप्रतिनिधियों तथा गन्ना विभाग के आला अधिकारियों द्वारा किसानों को आश्वस्त किया गया था कि जब तक किसानों का पूरा गन्ना नहीं डल जाता तब तक मिल बंद नहीं होगी। अब यह कोरा आश्वासन नजर आने लगा है।
मिल प्रबंधक प्रमोद बालियान का मिल का पेराई सत्र खत्म किए जाने की बाबत कहना है कि मिल प्रबंधन द्वारा 30 अप्रैल और चार मई को नोटिस जारी कर मिल बंद किए जाने की बाबत आला अधिकारियों को अवगत कराया दिया है। तीसरा नोटिस संभवत: चार मई को जारी होगा। इसके बाद स्पष्ट हो जाएगा कि मिल कब बंद होगा। इससे स्पष्ट है कि मिल अब बंद होने के बहुत करीब पहुंच गया है। वहीं, उन्होंने बताया कि इस बार मिल ने 1 करोड़ 96 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की। हालांकि बीते पेराई सत्र में एक करोड़ 48 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की थी। इस बार 44 लाख बोरे चीनी का उत्पादन किया है, जबकि बीते वर्ष 16 बोरे चीनी का उत्पादन किया था। वहीं, आज सरकार द्वारा की गई घोषणा की बाबत पूछे जाने पर प्रमोद बालियान का कहना था कि इससे मिलों को लाभ पहुंचेगा। चीनी मिलें घाटे में चल रही हैं। यदि केंद्र सरकार की भांति प्रदेश सरकार भी एसएपी में कुछ सहायता दे दे तो प्रदेश की मिलें घाटे से ऊबर जाएंगी।