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आम के बागों में पेडों पर बंपर बोर से बाग मालिक व ठेकेदारों के चेहरे पर रोनक
Updated Fri, 09 Mar 2018 10:12 PM IST
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सरधना। क्षेत्र में आम के बागों में इस समय बौर आने लगा है। इससे बाग मालिक और ठेकेदार खुश दिखाई दे रहे हैं। हालांकि मौसम के उतार-चढ़ाव से उनकी धड़कनें तेज हो रही हैं। उनका कहना है कि यदि मौसम आम की फसल के लिए माकूल रहा तो फसल काफी अच्छी रहेगी। इससे पिछले वर्षों में रहे घाटे से उभारा मिल सकता है। वहीं, उद्यान विशेषज्ञ भी इस बात फसल अच्छी होने की उम्मीद जता रहे हैं।
सरधना क्षेत्र के गांव कुलंजन-नंगला आर्डर, भामौरी, ईकड़ी स्थित आम के बागों में पेड़ों पर अच्छा खासा बौर दिखाई दे रहा है। बाग मालिक अहसान कुरैशी, विक्की सैनी, अजय उर्फ सोनू, दिनेश, यामीन, जावेद आदि का कहना है कि आम के बागों में पेड़ों पर अच्छा खासा बोर दिखाई दे रहा है, जो कि कई वर्षों बाद इस तरह का बौर देखा गया हैं। वहीं, बाग मालिक एवं ठेकेदार पेड़ों पर कीटनाशक का छिड़काव करने में लगे हुए हैं। जिससे बौर और निकट भविष्य में आने वाली फसल को बीमारियों से बचाया जा सके। हालांकि क्षेत्र में आम के बागों का क्षेत्रफल लगातार घटता जा रहा है। इसके पीछे पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत है। वन विभाग से पुराने हो चुके फल रहित और बीमारी से खराब हो रहे आम के बागों के कटान की अनुमति लेकर अंधाधुंध कुल्हाड़ी चलाई जा रही है। माफिया कई नए बाग को उजाड़ चुके हैं।
वहीं, क्षेत्र के गांव भामौरी, जुल्हैड़ा, चांदना समेत अन्य के जंगल में भट्ठे संचालित किए जाने से भी बागों की उत्पादकता पर असर पड़ा है। हालांकि इस बार भट्ठे अभी तक नहीं चलने से प्रदूषण का स्तर कम रहा है। उद्यान विशेषज्ञों का मानना है कि इसके चलते भी बौर अधिक आया है। इस बाबत सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के उद्यान विभाग के प्रोफेसर सुनील मलिक का कहना है कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार आम का बौर अधिक आया है। वहीं, बीमारी भी कम है। मिलीबग बीमारी के चलते पिछले सालों में उत्पादन गिरा। इससे बाग मालिकों को घाटा उठाना पड़ा है। हालांकि इस उन्हें उम्मीद है कि पैदावार अधिक होने से उन्हें राहत मिलेगी।
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मुख्य बातें
मौसम अनुकूल रहने से आम का उत्पादन बढ़ने के आसार
बाग मालिकों की धड़कनें बढ़ा रहा है मौसम का उतार-चढ़ाव
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सरधना क्षेत्र के गांव कुलंजन-नंगला आर्डर, भामौरी, ईकड़ी स्थित आम के बागों में पेड़ों पर अच्छा खासा बौर दिखाई दे रहा है। बाग मालिक अहसान कुरैशी, विक्की सैनी, अजय उर्फ सोनू, दिनेश, यामीन, जावेद आदि का कहना है कि आम के बागों में पेड़ों पर अच्छा खासा बोर दिखाई दे रहा है, जो कि कई वर्षों बाद इस तरह का बौर देखा गया हैं। वहीं, बाग मालिक एवं ठेकेदार पेड़ों पर कीटनाशक का छिड़काव करने में लगे हुए हैं। जिससे बौर और निकट भविष्य में आने वाली फसल को बीमारियों से बचाया जा सके। हालांकि क्षेत्र में आम के बागों का क्षेत्रफल लगातार घटता जा रहा है। इसके पीछे पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत है। वन विभाग से पुराने हो चुके फल रहित और बीमारी से खराब हो रहे आम के बागों के कटान की अनुमति लेकर अंधाधुंध कुल्हाड़ी चलाई जा रही है। माफिया कई नए बाग को उजाड़ चुके हैं।
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वहीं, क्षेत्र के गांव भामौरी, जुल्हैड़ा, चांदना समेत अन्य के जंगल में भट्ठे संचालित किए जाने से भी बागों की उत्पादकता पर असर पड़ा है। हालांकि इस बार भट्ठे अभी तक नहीं चलने से प्रदूषण का स्तर कम रहा है। उद्यान विशेषज्ञों का मानना है कि इसके चलते भी बौर अधिक आया है। इस बाबत सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के उद्यान विभाग के प्रोफेसर सुनील मलिक का कहना है कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार आम का बौर अधिक आया है। वहीं, बीमारी भी कम है। मिलीबग बीमारी के चलते पिछले सालों में उत्पादन गिरा। इससे बाग मालिकों को घाटा उठाना पड़ा है। हालांकि इस उन्हें उम्मीद है कि पैदावार अधिक होने से उन्हें राहत मिलेगी।
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मुख्य बातें
मौसम अनुकूल रहने से आम का उत्पादन बढ़ने के आसार
बाग मालिकों की धड़कनें बढ़ा रहा है मौसम का उतार-चढ़ाव