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भराला गांव में संदिग्ध बीमारी से दो घोड़ों की मौत
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भराला गांव में संदिग्ध बीमारी से दो घोड़ों की मौत
मोदीपुरम। भराला गांव में सोमवार सुबह संदिग्ध बीमारी से दो घोड़ों की मौत हो गई। घोड़ों के मालिक का आरोप है कि सूचना देने के बाद भी पशु चिकित्सक मौके पर नहीं पहुंचे। इलाज के अभाव में घोड़ों ने दम तोड़ दिया।
गांव निवासी भूपेंद्र पुत्र जगपाल प्रजापति ने बताया कि सोमवार सुबह दोनों घोड़ों की अचानक तबियत बिगड़ गई। वे जमीन पर गिरकर तड़पने लगे। उसने दौराला पशु चिकित्साधिकारी को सूचना दी, लेकिन कोई डॉक्टर मौके पर नही आया। आरोप है कि कई घंटे बाद चिकित्सक पहुंचे, लेकिन तब तक घोड़ों की मौत हो चुकी थी। पीड़ित ने मामले की शिकायत डीएम अनिल ढींगरा एवं जिला पशु चिकित्साधिकारी एके सिंह से करने की बात कही है।
पांच माह पूर्व मारे थे दो घोड़े
भूपेंद्र ने बताया कि पांच माह पूर्व पशु चिकित्सकों ने उसके दो घोड़ों को संक्रामक बीमारी बताकर जहर का इंजेक्शन दे दिया था। उन्होंने सरकार से 25 हजार रुपये मुआवजा दिलाने की बात कही थी, लेकिन आज तक मुआवजा नहीं मिला।
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वर्जन======
टीम पहले से ही घोड़ा मालिक के घर मौजूद थी। घोड़ा मालिक ने पहले निजी चिकित्सक के उपचार कराया था। घोड़े मरने की सूचना पर मैं भी पीड़ित के घर गया था। मुआवजे का मामला लखनऊ में अटका है। जल्द ही मुआवजा मिल जाएगा। -डॉ. कमल, पशु चिकित्सा प्रभारी दौराला
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मोदीपुरम। भराला गांव में सोमवार सुबह संदिग्ध बीमारी से दो घोड़ों की मौत हो गई। घोड़ों के मालिक का आरोप है कि सूचना देने के बाद भी पशु चिकित्सक मौके पर नहीं पहुंचे। इलाज के अभाव में घोड़ों ने दम तोड़ दिया।
गांव निवासी भूपेंद्र पुत्र जगपाल प्रजापति ने बताया कि सोमवार सुबह दोनों घोड़ों की अचानक तबियत बिगड़ गई। वे जमीन पर गिरकर तड़पने लगे। उसने दौराला पशु चिकित्साधिकारी को सूचना दी, लेकिन कोई डॉक्टर मौके पर नही आया। आरोप है कि कई घंटे बाद चिकित्सक पहुंचे, लेकिन तब तक घोड़ों की मौत हो चुकी थी। पीड़ित ने मामले की शिकायत डीएम अनिल ढींगरा एवं जिला पशु चिकित्साधिकारी एके सिंह से करने की बात कही है।
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पांच माह पूर्व मारे थे दो घोड़े
भूपेंद्र ने बताया कि पांच माह पूर्व पशु चिकित्सकों ने उसके दो घोड़ों को संक्रामक बीमारी बताकर जहर का इंजेक्शन दे दिया था। उन्होंने सरकार से 25 हजार रुपये मुआवजा दिलाने की बात कही थी, लेकिन आज तक मुआवजा नहीं मिला।
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टीम पहले से ही घोड़ा मालिक के घर मौजूद थी। घोड़ा मालिक ने पहले निजी चिकित्सक के उपचार कराया था। घोड़े मरने की सूचना पर मैं भी पीड़ित के घर गया था। मुआवजे का मामला लखनऊ में अटका है। जल्द ही मुआवजा मिल जाएगा। -डॉ. कमल, पशु चिकित्सा प्रभारी दौराला