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शांतिनाथ की प्रतिमा पाण्डुक शिला पर विराजमान
Updated Wed, 18 Jul 2018 02:24 AM IST
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शांतिनाथ की प्रतिमा पांडुक शिला पर विराजमान
मेरठ। संत शिरोमणी आचार्य विद्या सागर महाराज का 50 वां स्वर्ण संयम महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। रेलवे रोड स्थित आनंदपुरी के दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में इंद्रो ने बैंडबाजों की ध्वनि के साथ भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा को पांडुक शिला पर विराजमान किया गया। जलाभिषेक पाठ व मंगलाचरण कर इंद्रों ने श्रीजी का जलाभिषेक किया। इंद्राणियों ने चंवर ढुलाए, शांतिधारा का सौभाग्य सुनील जैन प्रवक्ता व अरुण जैन को मिला। विनय पाठ पढ़कर देव शास्त्र गुरु महावीर भगवान और आचार्य विद्या सागर महाराज के 50वें संयम महोत्सव के उपलक्ष्य में आचार्य श्री की पूजा इंद्र इंद्राणियों ने की। 51 श्री फल चढ़ाए। इस दौरान महावीर चालीसा का पाठ किया गया। उनके जीवन पर नाटिका प्रस्तुत की गई। वीर सैन, अचल जैन, राजीव जैन, अंकित जैन, रजत जैन, विपिन जैन, शैलेंद्र जैन, सुधीर जैन, तरस जैन, अभिषेक जैन, मनीष जैन, राहुल जैन आदि मुख्य रहे।
शिवमहापुराण सुनकर भक्ति में डूबे श्रोता
मेरठ। कथा व्यास पंडित हरीश उनियाल ने कहा कि भगवान शिव अदृश्य रहकर भी संसार में विद्यमान होते हैं। ये उनका निराकार स्वरूप है। जिसे हम लिंग कहते है। यह भगवान शिव का निराकार स्वरूप का प्रतीक है।
यह बात उन्होंने श्रीरामा संकीर्तन मंदिर में शिवपुराण कथा कहते हुए कही। उन्होंने कहा कि जो भगवान शिव मूर्त रूप से संसार में विद्यमान है। जब वह परमात्मा शिव प्रकृति का सहारा लेकर मूर्तरूप में प्रकट होते। यह उनके साकार स्वरूप का प्रतीक है। पं. प्रभुदत्त शर्मा ने विधि विधान से पूजन कराया।
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मेरठ। संत शिरोमणी आचार्य विद्या सागर महाराज का 50 वां स्वर्ण संयम महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। रेलवे रोड स्थित आनंदपुरी के दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में इंद्रो ने बैंडबाजों की ध्वनि के साथ भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा को पांडुक शिला पर विराजमान किया गया। जलाभिषेक पाठ व मंगलाचरण कर इंद्रों ने श्रीजी का जलाभिषेक किया। इंद्राणियों ने चंवर ढुलाए, शांतिधारा का सौभाग्य सुनील जैन प्रवक्ता व अरुण जैन को मिला। विनय पाठ पढ़कर देव शास्त्र गुरु महावीर भगवान और आचार्य विद्या सागर महाराज के 50वें संयम महोत्सव के उपलक्ष्य में आचार्य श्री की पूजा इंद्र इंद्राणियों ने की। 51 श्री फल चढ़ाए। इस दौरान महावीर चालीसा का पाठ किया गया। उनके जीवन पर नाटिका प्रस्तुत की गई। वीर सैन, अचल जैन, राजीव जैन, अंकित जैन, रजत जैन, विपिन जैन, शैलेंद्र जैन, सुधीर जैन, तरस जैन, अभिषेक जैन, मनीष जैन, राहुल जैन आदि मुख्य रहे।
शिवमहापुराण सुनकर भक्ति में डूबे श्रोता
मेरठ। कथा व्यास पंडित हरीश उनियाल ने कहा कि भगवान शिव अदृश्य रहकर भी संसार में विद्यमान होते हैं। ये उनका निराकार स्वरूप है। जिसे हम लिंग कहते है। यह भगवान शिव का निराकार स्वरूप का प्रतीक है।
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यह बात उन्होंने श्रीरामा संकीर्तन मंदिर में शिवपुराण कथा कहते हुए कही। उन्होंने कहा कि जो भगवान शिव मूर्त रूप से संसार में विद्यमान है। जब वह परमात्मा शिव प्रकृति का सहारा लेकर मूर्तरूप में प्रकट होते। यह उनके साकार स्वरूप का प्रतीक है। पं. प्रभुदत्त शर्मा ने विधि विधान से पूजन कराया।
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