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सरकारी स्कूल खुलने में दस दिन बाकि, नहीं आया पाठ्यक्रम
Updated Wed, 20 Jun 2018 02:24 AM IST
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मेरठ। सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रमों को लेकर पूरी तरह से लापरवाही बरती जा रही है। प्राथमिक विद्यालयों के खुलने में मात्र दस दिन ही बाकी हैं। लेकिन अभी तक जिला बेसिक शिक्षा विभाग के पास पूरा पाठ्यक्रम यानी सभी शीर्षकों की पूरी पुस्तकें नहीं पहुंची हैं। सवाल यह है कि एक महीने तक शिक्षा अधिकारी करते क्या रहे।
योगी सरकार ने प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति सुधारने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जिसमें शासन की ओर से प्रदेश के सभी ब्लॉक में हिंदी माध्यम के सात स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम बनाने का लक्ष्य तय किया। जो एक अप्रैल 2018 से पूरे प्रदेश में लागू होना था। लेकिन सरकारी सिस्टम के आगे शासन का आदेश बौना साबित हुआ। अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के संचालन की बात तो दूर स्कूलों में पाठ्यक्रम पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।
यह है व्यवस्था
एक अप्रैल से नया सत्र शुरू हो गया था। जिसके बाद ग्रीष्मकालीन छुट्टियां भी हो गई। छुट्टियां समाप्त होने में दस ही शेष हैं। लेकिन विभाग के पास पूरा पाठ्यक्रम अभी तक नहीं पहुंचा। सभी स्कूलों में पाठ्यक्रम मुहैय्या कराने की जिम्मेदारी शासन की है। जिले में कुल चौदह सौ प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। जिनमें बच्चों की संख्या करीब 1.20 लाख है। पहली से आठवीं कक्षाओं के लिए पाठ्यक्रम में कुल 58 टाइटल की पुस्तकें बच्चों को वितरण होनी हैं। जिसमें 48 पाठ्य पुस्तकें और 10 कार्य पुस्तकें शामिल हैं।
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पटरी से उतरी व्यवस्था
शासन द्वारा अभी तक 11 टाईटल की पुस्तकें ही मुहैय्या कराई गई हैं। जिसमें गणित और अंग्रेजी जैसे मुख्य विषयों की किताबें ही गायब हैं। सातवीं कक्षा के छह और आठवीं कक्षा के पांच टाईटल की पुस्तकें अभी तक आई हैं। पाठ्यक्रम की 11 टाईटल की पुस्तकें छुट्टियों से पहले ही बेसिक शिक्षा कार्यालय पहुंच गयी थी। लेकिन छुट्टियों में पाठ्यक्रम की पूर्ति को लेकर कोई कार्य नहीं हो पाया। ऐसे में एक जुलाई से खुलने वाले सभी सरकारी स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था पटरी से उतर जाए तो कोई अचंभे वाली बात नहीं है।
सिरदर्द का संचालन
ऐसी व्यवस्थाओं के बीच अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का संचालन विभाग के लिए बड़ी चुनौती होगी। किताबों के साथ ड्रेस, जूते और बैग भी वितरण करना विभाग के लिए सिरदर्द बना हुआ है। बेसिक शिक्षा अधिकारी सतेंद्र कुमार ढाका का कहना है कि पाठ्यक्रम शासन द्वारा ही मुहैय्या कराया जाता है। विभाग के पास 11 टाईटल की पुस्तकें हैं। जो स्कूल खुलते ही वितरित करा दी जाएंगी। बाकी टाईटल आने के बाद ही पुस्तकों का वितरण होगा।
खास बातें:
1.20 लाख बच्चे हैं जिले के 14 सौ सरकारी स्कूलों में
48 पाठ्य पुस्तकें और 10 कार्य पुस्तिका का है पूरा पाठ्यक्रम
11 पाठ्य पुस्तकें ही आ पाईं अभी तक बेसिक शिक्षा विभाग के पास
- छुट्टियों को एक महीना बीता, लेकिन नहीं पहुंचा पूरा पाठ्यक्रम
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योगी सरकार ने प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति सुधारने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जिसमें शासन की ओर से प्रदेश के सभी ब्लॉक में हिंदी माध्यम के सात स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम बनाने का लक्ष्य तय किया। जो एक अप्रैल 2018 से पूरे प्रदेश में लागू होना था। लेकिन सरकारी सिस्टम के आगे शासन का आदेश बौना साबित हुआ। अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के संचालन की बात तो दूर स्कूलों में पाठ्यक्रम पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।
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यह है व्यवस्था
एक अप्रैल से नया सत्र शुरू हो गया था। जिसके बाद ग्रीष्मकालीन छुट्टियां भी हो गई। छुट्टियां समाप्त होने में दस ही शेष हैं। लेकिन विभाग के पास पूरा पाठ्यक्रम अभी तक नहीं पहुंचा। सभी स्कूलों में पाठ्यक्रम मुहैय्या कराने की जिम्मेदारी शासन की है। जिले में कुल चौदह सौ प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। जिनमें बच्चों की संख्या करीब 1.20 लाख है। पहली से आठवीं कक्षाओं के लिए पाठ्यक्रम में कुल 58 टाइटल की पुस्तकें बच्चों को वितरण होनी हैं। जिसमें 48 पाठ्य पुस्तकें और 10 कार्य पुस्तकें शामिल हैं।
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पटरी से उतरी व्यवस्था
शासन द्वारा अभी तक 11 टाईटल की पुस्तकें ही मुहैय्या कराई गई हैं। जिसमें गणित और अंग्रेजी जैसे मुख्य विषयों की किताबें ही गायब हैं। सातवीं कक्षा के छह और आठवीं कक्षा के पांच टाईटल की पुस्तकें अभी तक आई हैं। पाठ्यक्रम की 11 टाईटल की पुस्तकें छुट्टियों से पहले ही बेसिक शिक्षा कार्यालय पहुंच गयी थी। लेकिन छुट्टियों में पाठ्यक्रम की पूर्ति को लेकर कोई कार्य नहीं हो पाया। ऐसे में एक जुलाई से खुलने वाले सभी सरकारी स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था पटरी से उतर जाए तो कोई अचंभे वाली बात नहीं है।
सिरदर्द का संचालन
ऐसी व्यवस्थाओं के बीच अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का संचालन विभाग के लिए बड़ी चुनौती होगी। किताबों के साथ ड्रेस, जूते और बैग भी वितरण करना विभाग के लिए सिरदर्द बना हुआ है। बेसिक शिक्षा अधिकारी सतेंद्र कुमार ढाका का कहना है कि पाठ्यक्रम शासन द्वारा ही मुहैय्या कराया जाता है। विभाग के पास 11 टाईटल की पुस्तकें हैं। जो स्कूल खुलते ही वितरित करा दी जाएंगी। बाकी टाईटल आने के बाद ही पुस्तकों का वितरण होगा।
खास बातें:
1.20 लाख बच्चे हैं जिले के 14 सौ सरकारी स्कूलों में
48 पाठ्य पुस्तकें और 10 कार्य पुस्तिका का है पूरा पाठ्यक्रम
11 पाठ्य पुस्तकें ही आ पाईं अभी तक बेसिक शिक्षा विभाग के पास
- छुट्टियों को एक महीना बीता, लेकिन नहीं पहुंचा पूरा पाठ्यक्रम