{"_id":"595f9ab34f1c1b0d4f8b4828","slug":"151499437747-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"खबर का असर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खबर का असर
Updated Fri, 07 Jul 2017 07:59 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
321 घरों से वसूल होगा शौचालय का पैसा
मेरठ। शौचालय घोटाले में नगर निगम बैकफुट पर आ गया है। नगर निगम प्रशासन ने जिन 321 परिवारों के खाते में शौचालय निर्माण की धनराशि भेजी गयी थी, अब उसको आरटीजीएस के माध्यम से वापस लिया जाएगा। इसके लिए नगरायुक्त ने आदेश कर दिए हैं। साथ ही शौचालय योजना से जुड़े कुछ अधिकारी व कर्मचारियों पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है।
अमर उजाला ने बृहस्पतिवार के अंक में नगर निगम का शौचालय घोटाला उजागर किया था। जिसमें खुलासा किया गया था कि नगर निगम प्रशासन ने बगैर जांच पड़ताल के ही ऐसे परिवारों के खातों में सरकारी खजाने से धनराशि भेज दी, जिन्होंने 2015 में शौचालय के लिए निगम में आवेदन किया था। आवेदन के अनुरूप उनके नाम कंप्यूटर में फीड़ थे। नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान ने शौचालयों का स्थलीय निरीक्षण कराए बगैर ही करीब 26 लाख रुपये का भुगतान करा दिया।
मामला उजागर होने पर नगर निगम प्रशासन में हड़कंप मच गया। भारत सरकार की योजना स्वच्छ भारत मिशन से शौचालय जुड़े होने के कारण निगम प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। नगरायुक्त ने इस योजना से जुड़े सभी अधिकारियों की बैठक ली। जिसमें पूरी व्यवस्था पर वार्ता की गयी। साथ ही भविष्य में योजना पर गंभीरता से कार्य करने का निर्णय लिया गया। नगरायुक्त ने गलत तरीके से बगैर जांच पड़ताल कराए शौचालय के भुगतान को गंभीरता से लिया साथ ही 321 परिवारों के खातों में भेजी गई धनराशि को वापस मंगवाने का आदेश जारी किया। जिसपर एकाउंट विभाग और बैंकों द्वारा कार्रवाई शुरू कर दी है।
विज्ञापन
अब पुरानी व्यवस्था से होगा भुगतान
मेरठ। नगरायुक्त मनोज कुमार ने जहां स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनने वाले शौचालयों के निर्माण में प्रगति लाने के निर्देश दिए हैं, वहीं भुगतान पुरानी प्रक्रिया के तहत कराने का आदेश किया है। यानी जनता के आवेदन पर पहले सफाई निरीक्षक मौके का निरीक्षण करेगा। उसके बाद शौचालय के लिए गड्ढा खोदा जाएगा। निगम की तरफ से फोटो ग्राफी की जाएगी। फोटो और सत्यापन के बाद पहली किश्त चार हजार रुपये जारी की जाएगी। दूसरी किश्त तभी जारी होगी जब शौचालय पूर्ण रूप से बन जाएगा। फाइल में फोटो और निगम की तरफ से सत्यापन रिपोर्ट लगेगी।
खबर का असर
- नगरायुक्त ने बगैर जांच पड़ताल कराए ही भेज दिया था लोगों के खाते में पैसा
- अमर उजाला ने खोला राज तो निगम प्रशासन हरकत में आया
- कुछ सफाई निरीक्षकों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी
विज्ञापन
मेरठ। शौचालय घोटाले में नगर निगम बैकफुट पर आ गया है। नगर निगम प्रशासन ने जिन 321 परिवारों के खाते में शौचालय निर्माण की धनराशि भेजी गयी थी, अब उसको आरटीजीएस के माध्यम से वापस लिया जाएगा। इसके लिए नगरायुक्त ने आदेश कर दिए हैं। साथ ही शौचालय योजना से जुड़े कुछ अधिकारी व कर्मचारियों पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है।
अमर उजाला ने बृहस्पतिवार के अंक में नगर निगम का शौचालय घोटाला उजागर किया था। जिसमें खुलासा किया गया था कि नगर निगम प्रशासन ने बगैर जांच पड़ताल के ही ऐसे परिवारों के खातों में सरकारी खजाने से धनराशि भेज दी, जिन्होंने 2015 में शौचालय के लिए निगम में आवेदन किया था। आवेदन के अनुरूप उनके नाम कंप्यूटर में फीड़ थे। नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान ने शौचालयों का स्थलीय निरीक्षण कराए बगैर ही करीब 26 लाख रुपये का भुगतान करा दिया।
विज्ञापन
मामला उजागर होने पर नगर निगम प्रशासन में हड़कंप मच गया। भारत सरकार की योजना स्वच्छ भारत मिशन से शौचालय जुड़े होने के कारण निगम प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। नगरायुक्त ने इस योजना से जुड़े सभी अधिकारियों की बैठक ली। जिसमें पूरी व्यवस्था पर वार्ता की गयी। साथ ही भविष्य में योजना पर गंभीरता से कार्य करने का निर्णय लिया गया। नगरायुक्त ने गलत तरीके से बगैर जांच पड़ताल कराए शौचालय के भुगतान को गंभीरता से लिया साथ ही 321 परिवारों के खातों में भेजी गई धनराशि को वापस मंगवाने का आदेश जारी किया। जिसपर एकाउंट विभाग और बैंकों द्वारा कार्रवाई शुरू कर दी है।
विज्ञापन
अब पुरानी व्यवस्था से होगा भुगतान
मेरठ। नगरायुक्त मनोज कुमार ने जहां स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनने वाले शौचालयों के निर्माण में प्रगति लाने के निर्देश दिए हैं, वहीं भुगतान पुरानी प्रक्रिया के तहत कराने का आदेश किया है। यानी जनता के आवेदन पर पहले सफाई निरीक्षक मौके का निरीक्षण करेगा। उसके बाद शौचालय के लिए गड्ढा खोदा जाएगा। निगम की तरफ से फोटो ग्राफी की जाएगी। फोटो और सत्यापन के बाद पहली किश्त चार हजार रुपये जारी की जाएगी। दूसरी किश्त तभी जारी होगी जब शौचालय पूर्ण रूप से बन जाएगा। फाइल में फोटो और निगम की तरफ से सत्यापन रिपोर्ट लगेगी।
खबर का असर
- नगरायुक्त ने बगैर जांच पड़ताल कराए ही भेज दिया था लोगों के खाते में पैसा
- अमर उजाला ने खोला राज तो निगम प्रशासन हरकत में आया
- कुछ सफाई निरीक्षकों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी