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पंच कल्याणक।
Updated Mon, 27 Nov 2017 08:02 PM IST
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हस्तिनापुर।
श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में विराजमान 31 फीट उत्तंग बडे़ बाबा शांतिनाथ भगवान के पंच कल्याणक के पांच वर्ष पूरे होने पर सोमवार को महामस्तिकाभिषेक एवं संगीतमय पूजन कार्यक्रम हुआ। इसमें बड़ी संख्या में जयपुर, रुड़की, देहरादून, खतौली, सरधना समेत दूरदराज के स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर धर्मलाभ अर्जित किया।
108 श्री भावभूषण महाराज, 108 श्री निर्वाण भूषण महाराज, धर्मचारिणी सुनीता दीदी के मंगल आशीर्वाद से महामस्तकाभिषेक की महत्ता का गुणगान किया। कार्यक्रम में 108 श्री भावभूषण महाराज ने कहा कि तीर्थंकरों के पूज्य जीवन के श्रवण मनन तथा गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान एवं मोक्ष रूपी पांच कल्याणकों की विधियां देखने से सद्मार्ग मिलता है। अंतत: यह जीव पंचमगति अर्थात मोक्ष का पार्थिक बनता है। 108 श्री निर्वाण भूषण महाराज ने मंगल प्रवचनों में कहा कि तीर्थकरों के जन्म से लेकर निर्वाण प्राप्ति पर्यंत पंचकल्याणक क्रियाएं होती हैं। उन्हीं को पंचकल्याणक क्रियाएं कहा जाता है। आत्मा से परमात्मा बनने की प्रक्रिया का नाम पंचकल्याणक है। इसलिए मनुष्य को अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर ऐसे महोत्सव में भाग लेकर पुण्य अर्जन करना चाहिए। ऐसे संस्कार से मानव महामानव बन जाता है। पंचकल्याणक ऐसे महापुरुषों के जीवन की विशिष्ट मंगलमय प्रस्तुति है। जिनके चिंतन एवं दर्शन से जीवन में उत्तरोत्तर विकास होता है। श्री दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी के महामंत्री मुकेश जैन ने कहा कि अयोध्या के समान हस्तिनापुर भी अत्यंत प्राचीन तीर्थ क्षेत्र है। यहां सोलहवें तीर्थंकर श्री शांतिनाथ, सतरहवें तीर्थंकर श्री कुंथुनाथ एवं अठारहवें तीर्थंकर श्री अरहनाथ भगवान का जन्म हुआ था। तीनों तीर्थंकरों ने इतिहास के अनुसार दीक्षा ली एवं यहीं उन्हें केवल ज्ञान प्राप्त हुआ। इसलिए यह पावन नगरी इतिहासातीत काल से तीर्थ क्षेत्र के रूप में मान्य रही है। मांगलिक क्रियाएं पं. आशीष जैन शास्त्री ने संपन्न कराई। कार्यक्रम में कमेटी अध्यक्ष अनिल जैन, महामंत्री मुकेश जैन, सुनील जैन समेत बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं धर्मप्रेमी रहे। उन्होंने भी कार्यक्रम में विचार रखे।
मुख्य बातें
श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में महामस्तिकाभिषेक एवं संगीतमय पूजन कार्यक्रम
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श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में विराजमान 31 फीट उत्तंग बडे़ बाबा शांतिनाथ भगवान के पंच कल्याणक के पांच वर्ष पूरे होने पर सोमवार को महामस्तिकाभिषेक एवं संगीतमय पूजन कार्यक्रम हुआ। इसमें बड़ी संख्या में जयपुर, रुड़की, देहरादून, खतौली, सरधना समेत दूरदराज के स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर धर्मलाभ अर्जित किया।
108 श्री भावभूषण महाराज, 108 श्री निर्वाण भूषण महाराज, धर्मचारिणी सुनीता दीदी के मंगल आशीर्वाद से महामस्तकाभिषेक की महत्ता का गुणगान किया। कार्यक्रम में 108 श्री भावभूषण महाराज ने कहा कि तीर्थंकरों के पूज्य जीवन के श्रवण मनन तथा गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान एवं मोक्ष रूपी पांच कल्याणकों की विधियां देखने से सद्मार्ग मिलता है। अंतत: यह जीव पंचमगति अर्थात मोक्ष का पार्थिक बनता है। 108 श्री निर्वाण भूषण महाराज ने मंगल प्रवचनों में कहा कि तीर्थकरों के जन्म से लेकर निर्वाण प्राप्ति पर्यंत पंचकल्याणक क्रियाएं होती हैं। उन्हीं को पंचकल्याणक क्रियाएं कहा जाता है। आत्मा से परमात्मा बनने की प्रक्रिया का नाम पंचकल्याणक है। इसलिए मनुष्य को अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर ऐसे महोत्सव में भाग लेकर पुण्य अर्जन करना चाहिए। ऐसे संस्कार से मानव महामानव बन जाता है। पंचकल्याणक ऐसे महापुरुषों के जीवन की विशिष्ट मंगलमय प्रस्तुति है। जिनके चिंतन एवं दर्शन से जीवन में उत्तरोत्तर विकास होता है। श्री दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी के महामंत्री मुकेश जैन ने कहा कि अयोध्या के समान हस्तिनापुर भी अत्यंत प्राचीन तीर्थ क्षेत्र है। यहां सोलहवें तीर्थंकर श्री शांतिनाथ, सतरहवें तीर्थंकर श्री कुंथुनाथ एवं अठारहवें तीर्थंकर श्री अरहनाथ भगवान का जन्म हुआ था। तीनों तीर्थंकरों ने इतिहास के अनुसार दीक्षा ली एवं यहीं उन्हें केवल ज्ञान प्राप्त हुआ। इसलिए यह पावन नगरी इतिहासातीत काल से तीर्थ क्षेत्र के रूप में मान्य रही है। मांगलिक क्रियाएं पं. आशीष जैन शास्त्री ने संपन्न कराई। कार्यक्रम में कमेटी अध्यक्ष अनिल जैन, महामंत्री मुकेश जैन, सुनील जैन समेत बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं धर्मप्रेमी रहे। उन्होंने भी कार्यक्रम में विचार रखे।
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मुख्य बातें
श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में महामस्तिकाभिषेक एवं संगीतमय पूजन कार्यक्रम